By Malay Ojha | Published: 03 November 2026 at 06:38 PM
अमेरिका में 3 नवंबर को हो रहे मध्यावधि चुनाव (Midterm Elections 2026) पर पूरी दुनिया की नजर है। इस चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कुर्सी पर कोई सीधा खतरा नहीं है, लेकिन अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस में रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत बना रहता है या डेमोक्रेटिक पार्टी उसे चुनौती देती है, इसका फैसला जरूर होगा। चुनाव का नतीजा ट्रंप के अगले दो साल के कार्यकाल की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
ट्रंप के लिए क्यों अहम है यह चुनाव?
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव को राष्ट्रपति के कामकाज और लोकप्रियता की बड़ी परीक्षा माना जाता है। ट्रंप जनवरी 2025 में दूसरी बार राष्ट्रपति बने थे। अब उनके कार्यकाल के बीच में हो रहा यह चुनाव बताएगा कि अमेरिकी मतदाता उनकी सरकार के कामकाज को किस नजर से देख रहे हैं। मतदान के दिन से पहले ही 57 मिलियन से अधिक अमेरिकी मतदाता अपने वोट डाल चुके हैं। अब 3 नवंबर को होने वाले मतदान के बाद कांग्रेस की तस्वीर साफ होने लगेगी।
कांग्रेस के दोनों सदनों का बदलेगा गणित
अमेरिकी कांग्रेस के दो सदन हैं। पहला प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) और दूसरा सीनेट (Senate)। भारत की संसद को समझने के लिए इनकी तुलना लोकसभा और राज्यसभा से की जा सकती है, हालांकि दोनों देशों की संसदीय व्यवस्था में कई अंतर भी हैं।
प्रतिनिधि सभा में कुल 435 निर्वाचित सदस्य होते हैं। इनका कार्यकाल दो साल का होता है और सभी 435 सीटों पर हर दो साल में चुनाव कराया जाता है। यही वजह है कि इस बार भी प्रतिनिधि सभा की सभी सीटों पर मतदान हो रहा है।
सीनेट की 35 सीटों पर मुकाबला
अमेरिकी सीनेट में कुल 100 सदस्य होते हैं। प्रत्येक राज्य से दो सीनेटर चुने जाते हैं। इनका कार्यकाल छह साल का होता है, लेकिन सभी सीटों पर एक साथ चुनाव नहीं कराया जाता। हर दो साल में करीब एक तिहाई सीटों पर मतदान होता है। इस बार 33 नियमित सीटों के साथ दो विशेष चुनाव भी हो रहे हैं। इस तरह सीनेट की कुल 35 सीटों पर मुकाबला है।
फिलहाल दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा
चुनाव से पहले अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत है। प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी के 218 और डेमोक्रेटिक पार्टी के 214 सदस्य हैं। इसके अलावा एक निर्दलीय सदस्य रिपब्लिकन के साथ मतदान करते हैं और दो सीटें खाली हैं। वहीं सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के 53 सदस्य हैं, जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी के 45 सदस्य हैं। दो निर्दलीय सीनेटर डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ हैं।
इस चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की कोशिश प्रतिनिधि सभा और सीनेट में अपनी स्थिति मजबूत करने की है। वहीं रिपब्लिकन पार्टी के सामने दोनों सदनों में अपना बहुमत बचाए रखने की चुनौती है।
चुनाव हारने पर भी राष्ट्रपति पद पर बने रहेंगे ट्रंप
मध्यावधि चुनाव की सबसे खास बात यह है कि इसके नतीजों से राष्ट्रपति का कार्यकाल खत्म नहीं होता। अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव अलग प्रक्रिया से होता है और राष्ट्रपति का कार्यकाल चार साल का होता है। इसलिए अगर रिपब्लिकन पार्टी दोनों सदनों में बहुमत गंवा भी देती है, तब भी डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति बने रहेंगे।
हालांकि, संसद में बहुमत का समीकरण बदलने से उनकी सरकार के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अमेरिका में कानून बनाने का अधिकार कांग्रेस के पास है। किसी बड़े विधेयक को कानून बनाने के लिए दोनों सदनों की मंजूरी जरूरी होती है। अगर विपक्ष का बहुमत हो गया तो ट्रंप प्रशासन के कई प्रस्तावों को संसद में समर्थन जुटाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ सकती है।
राष्ट्रपति के पास फिर भी रहेंगे कई अहम अधिकार
कांग्रेस में बहुमत कम होने का मतलब यह नहीं है कि राष्ट्रपति के अधिकार खत्म हो जाएंगे। ट्रंप कार्यकारी आदेश जारी कर सकते हैं और विदेश नीति तथा सेना के कमांडर-इन-चीफ के रूप में अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे। इसके अलावा संसद से पारित किसी विधेयक पर राष्ट्रपति वीटो भी लगा सकते हैं। हालांकि, कांग्रेस के दोनों सदन दो-तिहाई बहुमत से राष्ट्रपति के वीटो को खारिज कर सकते हैं।
दूसरी तरफ, अगर डेमोक्रेटिक पार्टी को किसी सदन में बहुमत मिलता है तो वह संसदीय समितियों के जरिए प्रशासन के फैसलों की जांच और सुनवाई भी तेज कर सकती है। राष्ट्रपति के कई अहम प्रस्तावों और नियुक्तियों पर भी राजनीतिक खींचतान बढ़ सकती है।
मध्यावधि चुनाव का इतिहास ट्रंप के लिए क्यों अहम है?
अमेरिकी चुनावों का इतिहास बताता है कि मध्यावधि चुनाव में अक्सर सत्ताधारी राष्ट्रपति की पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा है। ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन के ऐतिहासिक विश्लेषण के मुताबिक, 1938 के बाद हुए 22 मध्यावधि चुनावों में से 20 बार राष्ट्रपति की पार्टी ने प्रतिनिधि सभा में अपनी सीटें गंवाई हैं।
हालांकि, 1998 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और 2002 में राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के कार्यकाल के दौरान उनकी पार्टियों ने प्रतिनिधि सभा में सीटें बढ़ाई थीं। ये दोनों चुनाव इस ऐतिहासिक रुझान के अपवाद रहे। ऐसे में इस बार का चुनाव भी ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के लिए अहम राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है।
4 नवंबर तक भी साफ नहीं हो सकती पूरी तस्वीर
अमेरिका में मतदान 3 नवंबर को हो रहा है। अलग-अलग राज्यों में मतदान केंद्रों के बंद होने के बाद वोटों की गिनती और नतीजे आने शुरू होंगे। हालांकि, सभी सीटों का अंतिम परिणाम एक ही रात में आना जरूरी नहीं है। कई करीबी मुकाबलों और डाक मतपत्रों की गिनती के कारण प्रतिनिधि सभा और सीनेट में किस पार्टी का नियंत्रण होगा, इसका फैसला आने में कुछ दिन भी लग सकते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रिपब्लिकन पार्टी अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में अपना बहुमत बचा पाएगी या डेमोक्रेटिक पार्टी सत्ता के इस समीकरण को बदलने में कामयाब होगी? नतीजा जो भी हो, इतना तय है कि मध्यावधि चुनाव के बाद राष्ट्रपति ट्रंप के लिए अगले दो साल का राजनीतिक रास्ता पहले से अलग हो सकता है।
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