By Malay Ojha | Published: 03 November 2026 at 07:12 PM
बिहार में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी कुंदन कृष्णन और आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह के बीच विवाद अब संपत्ति के आरोपों तक पहुंच गया है। पांच करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस के बावजूद सांसद ने अपने तेवर नरम नहीं किए हैं। सुधाकर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कुंदन कृष्णन, उनकी पत्नी और करीबी लोगों के नाम पर कथित तौर पर मौजूद जमीन, शेयर और दूसरी संपत्तियों का ब्योरा सार्वजनिक किया। उन्होंने दावा किया कि इन संपत्तियों का मूल्य सैकड़ों करोड़ रुपये तक हो सकता है।
350 करोड़ रुपये की संपत्ति का लगाया हिसाब
बक्सर से आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि कुंदन कृष्णन और उनके परिवार के नाम पर घोषित संपत्तियों के अलावा भी कई जमीनें और निवेश हैं, जिनका पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। उन्होंने दूसरे लोगों के नाम पर संपत्ति खरीदने और संभावित बेनामी निवेश का मुद्दा भी उठाया। सांसद ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
विरासत में मिली 38 करोड़ की संपत्ति पर नहीं उठाया सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुधाकर सिंह ने कहा कि कुंदन कृष्णन को अपने माता-पिता से करीब 38 करोड़ रुपये की संपत्ति विरासत में मिली है। उन्होंने साफ किया कि विरासत में मिली संपत्ति को लेकर उनका कोई सवाल नहीं है। उनकी आपत्ति अधिकारी और उनकी पत्नी डॉ. मल्लिका सिंह के नाम पर अर्जित संपत्तियों को लेकर है।
सांसद के मुताबिक, दोनों की ओर से घोषित संपत्ति का बाजार मूल्य करीब 87 करोड़ रुपये है। लेकिन उनके पास मौजूद दस्तावेजों और जमीन के रिकॉर्ड की पड़ताल में कुछ ऐसी संपत्तियों की जानकारी मिली है, जिनका जिक्र घोषित ब्योरे में नहीं है।
कैमूर में 16 एकड़ से ज्यादा जमीन की खरीद पर सवाल
सुधाकर सिंह ने कैमूर जिले में करीब 16 एकड़ 88 डिसमिल कृषि भूमि की खरीद का मामला उठाया। उनका दावा है कि इस जमीन की मौजूदा बाजार कीमत करीब दो करोड़ रुपये है, जबकि रजिस्ट्री के दस्तावेजों में इसकी कीमत लगभग 17.50 लाख रुपये दिखाई गई है।
सांसद ने आरोप लगाया कि जमीन की खरीद में नकद भुगतान हुआ। उन्होंने सवाल किया कि जब अधिकारी और उनकी पत्नी के पास बैंक खातों और निवेश के रूप में पर्याप्त धनराशि मौजूद है, तो जमीन खरीदने के लिए नकद भुगतान की जरूरत क्यों पड़ी? उन्होंने इस लेनदेन की जांच कराने की मांग की।
नालंदा से पटना तक कई जमीनों का किया जिक्र
आरजेडी सांसद ने नालंदा में कुंदन कृष्णन के पैतृक गांव के पास जमीन खरीदे जाने का भी दावा किया। उन्होंने दिनेश राम नाम के व्यक्ति से जमीन का सौदा होने की बात कही और आरोप लगाया कि इसका उल्लेख संपत्ति की घोषणा में नहीं किया गया है।
इसके अलावा पटना के मालसलामी इलाके के सिमरी-मुरारपुर में डॉ. मल्लिका सिंह के नाम पर करीब 10 कट्ठा जमीन होने का दावा किया। सुधाकर सिंह के अनुसार, इस जमीन का बाजार मूल्य लगभग 20 करोड़ रुपये हो सकता है। वहीं, ट्रांसपोर्ट नगर में कुंदन कृष्णन के नाम पर साढ़े तीन से साढ़े चार कट्ठा जमीन होने की बात भी कही।
2005 से 2008 के बीच जमीन की रजिस्ट्री पर उठाए सवाल
सुधाकर सिंह ने जमीनों की खरीद के समय को भी अपने आरोपों का अहम आधार बनाया। उन्होंने बताया कि कुंदन कृष्णन 22 सितंबर 2005 से 25 मार्च 2008 तक पटना के एसएसपी रहे थे। सांसद का दावा है कि पटना में अधिकारी, उनकी पत्नी और बिट्टू सिंह के नाम पर खरीदी गई कई जमीनों की रजिस्ट्री इसी अवधि में हुई थी।
उन्होंने मालसलामी के अलग-अलग प्लॉट का विवरण देते हुए कहा कि एक प्लॉट में डॉ. मल्लिका सिंह के नाम पर करीब 40 कट्ठा और बिट्टू सिंह के नाम पर 60 कट्ठा जमीन है। दूसरे प्लॉट में मल्लिका सिंह के नाम पर करीब 34 कट्ठा और बिट्टू सिंह के नाम पर लगभग 70 कट्ठा जमीन होने का दावा किया।
सांसद ने इन जमीनों की कीमत सैकड़ों करोड़ रुपये तक होने का अनुमान लगाया। हालांकि, उनके दावों में बताए गए जमीन के वास्तविक रकबे, स्वामित्व और बाजार मूल्य की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
शेयर बाजार में निवेश और 850 ग्राम सोने का भी जिक्र
सुधाकर सिंह ने कुंदन कृष्णन और उनकी पत्नी के शेयर बाजार में निवेश से जुड़े दस्तावेजों का भी हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि दोनों के नाम पर एक्सिस बैंक, बजाज हिंदुस्तान, भारती टेलीवेंचर्स, सिप्ला, फोर्टिस हेल्थकेयर, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, आईटीसी और एनएमडीसी जैसी कंपनियों के शेयर रहे हैं।
सांसद ने वर्ष 2016 के संपत्ति विवरण का जिक्र करते हुए करीब 36 लाख रुपये के शेयर खरीदने की बात कही। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर मौजूदा संपत्ति विवरण में शेयर निवेश शून्य है, तो पहले खरीदे गए शेयरों को कब और कितने रुपये में बेचा गया? इस रकम का विवरण कहां है?
इसके साथ ही उन्होंने अधिकारी और उनके परिवार के पास करीब 850 ग्राम सोना होने का दावा किया। हीरा, पुखराज, रूबी, प्लेटिनम और चांदी जैसी कीमती वस्तुओं का भी जिक्र करते हुए उनकी मात्रा और वास्तविक कीमत का ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की।
लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं होने पर भी उठाए सवाल
सुधाकर सिंह ने बिहार में लंबे समय से लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं होने का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि जब एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की संपत्ति को लेकर इतने गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, तो शिकायत की सुनवाई और जांच के लिए प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच में लोकायुक्त जैसी संस्था की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में उन्होंने बिहार में लोकायुक्त की नियुक्ति सुनिश्चित कराने के लिए हाईकोर्ट जाने की बात कही।
आर्थिक अपराध इकाई से जांच कराने की मांग
आरजेडी सांसद ने आर्थिक अपराध इकाई समेत सक्षम जांच एजेंसियों से कुंदन कृष्णन और उनके करीबियों की संपत्ति की जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए सरकार को मामले में पारदर्शी जांच करानी चाहिए।
सुधाकर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “150 करोड़ की अपनी संपत्ति और पौने दो सौ करोड़ की संपत्ति अपने गुर्गे रितेश रंजन, यही तो जांच का विषय है। ये हो गया करीब सवा तीन सौ-साढ़े तीन सौ करोड़। ये 20 पर्सेंट है, 80 पर्सेंट के कागज की वैरीफाई कर रहे हैं। मुख्यमंत्री से इस अधिकारी (कुंदन कृष्णन) की संपत्ति की जांच कराई जाए।”
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर से शुरू हुआ था विवाद
कुंदन कृष्णन और सुधाकर सिंह के बीच विवाद की शुरुआत भोजपुर के भरत भूषण तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद हुई थी। इस मामले में सांसद ने पुलिस की कार्रवाई और तत्कालीन एसटीएफ नेतृत्व की भूमिका पर सवाल उठाए थे।
इसके बाद कुंदन कृष्णन की ओर से पांच करोड़ रुपये के मानहानि दावे से जुड़ा कानूनी नोटिस भेजा गया था। नोटिस में सुधाकर सिंह से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग भी की गई थी।
मानहानि नोटिस के बाद भी पीछे हटने को तैयार नहीं सांसद
कानूनी नोटिस मिलने के बाद भी सुधाकर सिंह ने अपना रुख नहीं बदला। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर पूरे मामले में सरकार से जवाब मांगा। लोकसभा अध्यक्ष को भी पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की थी।
सांसद का आरोप है कि कई मामलों में टेंडर रद्द हुए या दोबारा टेंडर की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि संसाधनों की कमी के बावजूद वह इस मुद्दे को उठाते रहेंगे।
फिलहाल, कुंदन कृष्णन और उनके परिवार की संपत्ति को लेकर सुधाकर सिंह की ओर से लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित दस्तावेजों की आधिकारिक जांच होना बाकी है। ऐसे में अब सबकी नजर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और संबंधित जांच एजेंसियों के अगले कदम पर है।
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