By Malay Ojha | Published: 04 November 2026 at 07:20 PM
फिजियोथेरेपिस्ट, ऑस्टियोपैथ और काइरोप्रैक्टर डॉ. रजनीश कांत की पुस्तक ‘राजनीश कांत मेथड (RKM)’ का विमोचन होटल पाटलिपुत्रा एग्जोटिका, एक्जिबिशन रोड में किया गया। जगत गुरु महामंडलेश्वर हिमांगी सखी ने पुस्तक का लोकार्पण किया। इस मौके पर फिल्म अभिनेता जय सिंह राठौड़ और पुस्तक के लेखक डॉ. रजनीश कांत भी मौजूद रहे। टीएस पब्लिकेशन से प्रकाशित इस किताब में रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य, काइरोप्रैक्टिक उपचार और शरीर में होने वाले दर्द से जुड़ी समस्याओं को आसान भाषा में समझाया गया है।
दर्द के इलाज से आगे बेहतर जीवन पर जोर
पुस्तक के विमोचन के दौरान डॉ. रजनीश कांत ने कहा कि उनका मकसद सिर्फ मरीजों के दर्द का उपचार करना नहीं है, बल्कि उन्हें दर्द के साथ जीने की मजबूरी से बाहर निकालना भी है। इस पुस्तक के जरिए वे काइरोप्रैक्टिक पद्धति के बारे में लोगों की समझ बढ़ाना चाहते हैं, ताकि लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर अधिक जागरूक हो सकें।
किताब में 10 अध्याय, रीढ़ की हड्डी से लेकर मरीजों की देखभाल तक जानकारी
पुस्तक में कुल 10 अध्याय हैं। इनमें काइरोप्रैक्टिक देखभाल की बुनियादी जानकारी से लेकर क्लिनिकल ऑब्जर्वेशन, खिलाड़ियों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य की देखभाल तथा रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा की गई है। इसके अलावा इस उपचार पद्धति को लेकर प्रचलित गलत धारणाओं, मरीजों को जागरूक करने और खुद की देखभाल जैसे विषय भी शामिल किए गए हैं।
डॉक्टर की जिम्मेदारी सिर्फ इलाज तक सीमित नहीं : हिमांगी सखी
जगत गुरु महामंडलेश्वर हिमांगी सखी ने पुस्तक और डॉ. रजनीश कांत के कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि डॉक्टर का दायित्व लोगों को स्वस्थ रखने के साथ उन्हें बेहतर जीवन देने का प्रयास करना भी है। उपचार के दौरान मरीज की शारीरिक स्थिति के साथ उसकी मानसिक स्थिति का ध्यान रखना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि समाज में डॉक्टरों के काम और उनकी भूमिका का सम्मान होना चाहिए।
अगले संस्करण में अपनी तकनीक पर और जानकारी देंगे डॉ. कांत
डॉ. रजनीश कांत ने बताया कि पुस्तक के अगले संस्करण में वे अपनी व्यक्तिगत उपचार तकनीक के बारे में विस्तार से जानकारी देने की योजना बना रहे हैं। मौजूदा पुस्तक में RKM पद्धति के साथ क्लिनिक संचालन और दूसरे विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम करने से जुड़े पहलुओं को भी जगह दी गई है।
कुंभ में साधु-संतों के लिए लगाया था उपचार शिविर
गौरतलब है कि डॉ. रजनीश कांत कुंभ के दौरान भी उपचार शिविर लगा चुके हैं। इस शिविर में उन्होंने साधु-संतों का उपचार किया था। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य लोगों को शारीरिक तकलीफों से राहत देने के साथ उनके जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाना भी होना चाहिए।
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