By Malay Ojha | Published: 04 November 2026 at 04:20 PM
वाराणसी के जिला एवं सत्र न्यायालय के एक अधिवक्ता को सोशल मीडिया पर बदनाम करने की धमकी देकर 10 लाख रुपये मांगने का मामला सामने आया है। आरोप है कि फर्जी सोशल मीडिया आईडी बनाकर निजी चैट और एडिटेड स्क्रीनशॉट वायरल किए गए। इतना ही नहीं, रुपये नहीं देने पर जान से मारने की धमकी भी दी गई। मामले में लालपुर-पाण्डेयपुर थाने में छह नामजद आरोपियों समेत अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
3 नवंबर को दर्ज हुई FIR, छह लोग नामजद
पुलिस ने FIR संख्या 0355/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 352, 351(3), 356(2), 308(2) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 में मुकदमा दर्ज किया है। मामले में आकांक्षा ओझा, अनाहिता गोस्वामी, आदित्य ओझा, अवनीश त्रिपाठी और मंजू ओझा समेत अन्य अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है।
निजी चैट और स्क्रीनशॉट वायरल करने की धमकी
शिकायतकर्ता अधिवक्ता की तहरीर के मुताबिक, आरोपियों ने फेसबुक, एक्स और व्हाट्सएप के जरिए उन्हें निशाना बनाया। आरोप है कि निजी चैट, स्क्रीनशॉट और कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई सामग्री सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी गई। इसके जरिए अधिवक्ता की सामाजिक और पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का डर दिखाकर 10 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई।
हनीट्रैप के जरिए फंसाने का भी आरोप
शिकायत में ब्लैकमेलिंग के लिए हनीट्रैप जैसी रणनीति अपनाने का आरोप भी लगाया गया है। तहरीर के अनुसार, सोशल मीडिया पर फर्जी आईडी और निजी बातचीत से जुड़ी सामग्री का इस्तेमाल कर अधिवक्ता पर दबाव बनाया गया। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दिए जाने की बात भी शिकायत में कही गई है।
मुंबई में भी दर्ज है इसी तरह का मामला
शिकायतकर्ता ने पुलिस को यह भी बताया है कि आरोपियों पर कथित तौर पर इसी तरह से दूसरे लोगों को निशाना बनाने का आरोप पहले भी लग चुका है। इस संबंध में मुंबई के ओशिवरा थाने में भी एक मामला दर्ज होने का उल्लेख तहरीर में किया गया है। पुलिस अब इस पहलू की भी जांच करेगी कि दोनों मामलों के बीच कोई संबंध है या नहीं।
निरीक्षक कमलेश कुमार यादव को मिली जांच
मामले की जांच लालपुर-पाण्डेयपुर थाने के निरीक्षक कमलेश कुमार यादव को सौंपी गई है। पुलिस का कहना है कि शिकायत के आधार पर FIR दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल आरोपों की जांच जारी है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
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