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बिहार में ₹2.57 लाख करोड़ के निवेश की तैयारी, 24 GW अक्षय ऊर्जा का लक्ष्य; निवेशकों को सरकार ने दिया बड़ा ऑफर

By Malay Ojha | Published: 04 November 2026 at 07:02 PM

बिहार अब अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े निवेश की तैयारी कर रहा है। राज्य सरकार ने बिजली उत्पादन से लेकर सौर ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज और ग्रीन हाइड्रोजन तक के क्षेत्र में निवेश के अवसर खोल दिए हैं। नई दिल्ली में आयोजित भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो-2026 में बिहार ने ₹2,57,316 करोड़ की निवेश कार्ययोजना पेश की। इसके साथ ही वर्ष 2030 तक 24 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य भी सामने रखा।

निवेशकों को बिहार आने का न्योता
बुधवार को भारत मंडपम में आयोजित समिट के बिहार स्टेट प्लेनरी सेशन में राज्य के ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने उद्योग जगत और निवेशकों को बिहार में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि बिहार में तेजी से विकास हो रहा है और अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में निवेशकों के लिए हाई ग्रोथ और हाई रिटर्न की संभावनाएं हैं। सरकार निवेशकों को हरसंभव सहयोग देने के लिए तैयार है।

700 मेगावाट से 10 हजार मेगावाट तक पहुंची बिजली की मांग
ऊर्जा मंत्री ने बिहार में बिजली क्षेत्र में आए बदलावों का जिक्र करते हुए बताया कि वर्ष 2005 में राज्य की बिजली की मांग करीब 700 मेगावाट थी, जो अब बढ़कर लगभग 10 हजार मेगावाट हो गई है। ‘हर घर बिजली’ योजना के तहत राज्य के प्रत्येक घर तक बिजली पहुंचाई जा चुकी है।

उन्होंने कहा कि छठ महापर्व और सूर्य उपासना की सदियों पुरानी परंपरा बिहार को सौर ऊर्जा से जोड़ती है। राज्य सरकार पीएम-कुसुम और पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के जरिए भी नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा दे रही है। उनका कहना था कि आने वाले समय में बिहार अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा।

अगले 10 साल में 25 हजार मेगावाट बिजली की जरूरत
ऊर्जा सचिव एवं बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड (BSPHCL) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक अजय यादव ने बताया कि राज्य में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। अनुमान है कि अगले एक दशक में यह मांग करीब 25 हजार मेगावाट तक पहुंच जाएगी।

उन्होंने 301 मेगावाट क्षमता की कजरा सौर ऊर्जा परियोजना और इसके साथ 523 मेगावाट आवर की बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) परियोजना की जानकारी दी। सरकारी भवनों पर सोलर पैनल लगाने की योजना और बिजली कंपनियों के प्रदर्शन का भी जिक्र किया।

दोनों बिजली वितरण कंपनियां मुनाफे में
अजय यादव के मुताबिक, बिहार की उत्तर और दक्षिण क्षेत्र की दोनों बिजली वितरण कंपनियां लाभ की स्थिति में हैं। राज्य में एटीएंडसी (AT&C) हानियां राष्ट्रीय औसत से कम हैं। करीब एक करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं और बिजली बिल संग्रहण की दक्षता लगभग 100 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

उन्होंने बताया कि राज्य में करीब ₹78,400 करोड़ की परियोजनाएं अलग-अलग चरणों में हैं। वहीं, बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन, वितरण और आधारभूत संरचना के रखरखाव सहित कुल ₹2,57,316 करोड़ के निवेश की कार्ययोजना तैयार की गई है।

2030 तक 24 गीगावाट अक्षय ऊर्जा बनाने का लक्ष्य
बिहार सरकार ने अक्षय ऊर्जा नीति-2025 के तहत वित्तीय वर्ष 2030 तक 24 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता और 6 गीगावाट आवर (GWh) ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है।

इसके लिए पंप्ड स्टोरेज नीति-2025, अक्षय ऊर्जा नीति-2025, ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2026 और औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज-2025 के जरिए निवेशकों को सुविधाएं देने की तैयारी है। सरकार का जोर निजी निवेश के साथ ऊर्जा क्षेत्र में नई तकनीक और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर है।

समिट में तीन अहम समझौतों पर हस्ताक्षर
भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट के दौरान बिहार के विद्युत और अक्षय ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए तीन महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

पहला समझौता बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड और सेंटर फॉर मिशन ऑन एनर्जी ट्रांजिशन (CMET), मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MANIT), भोपाल के बीच हुआ। इसके तहत अक्षय ऊर्जा की योजना तैयार करने और बिजली व्यवस्था के बेहतर प्रबंधन में सहयोग किया जाएगा।

दूसरा समझौता पावर सेक्टर स्किल काउंसिल (PSSC), बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड (BSPHCL) और बिहार पावर ट्रेनिंग मैनेजमेंट सोसाइटी (BPTMS), गौरीचक, पटना के बीच हुआ। इसका उद्देश्य बिजली क्षेत्र में प्रशिक्षण, कौशल विकास और कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाना है।

तीसरा समझौता बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड (BSPGCL) और द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) के बीच हुआ। इसके जरिए बिजली और अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग तथा रिसर्च को बढ़ावा दिया जाएगा।

अगले पांच साल में तीन सेक्टर पर रहेगा फोकस
समिट में ‘Bihar’s Renewable Energy Future: Unlocking New Avenues for Investment and Growth’ विषय पर पैनल चर्चा भी हुई। इसमें अजय यादव ने बताया कि अगले दो से पांच वर्षों में डिस्ट्रीब्यूटेड रिन्यूएबल एनर्जी (DRE), बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और अक्षय ऊर्जा से जुड़े उपकरणों के निर्माण में निवेश की बड़ी संभावनाएं हैं।

राज्य का लक्ष्य अलग-अलग योजनाओं के जरिए करीब 5,000 मेगावाट डिस्ट्रीब्यूटेड रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता विकसित करना है। इसमें पीएम-कुसुम योजना के तहत 2,700 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता, सरकारी भवनों पर सोलर पैनल लगाकर 500 मेगावाट क्षमता और पीएम सूर्य घर योजना के तहत करीब 15 लाख परिवारों की छतों पर रूफटॉप सोलर लगाने की योजना शामिल है।

औरंगाबाद में बनेगा 150 मेगावाट का सोलर पार्क
अजय यादव ने बताया कि जलाशयों और अन्य उपयुक्त स्थानों पर भी सौर ऊर्जा परियोजनाएं विकसित की जाएंगी। इसके साथ बड़े बैटरी स्टोरेज सिस्टम, पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं और सोलर प्लस स्टोरेज मॉडल पर काम किया जाएगा। उन्होंने औरंगाबाद में प्रस्तावित 150 मेगावाट क्षमता के सोलर पार्क का भी उल्लेख किया।

अडानी, टाटा पावर और एडीबी के प्रतिनिधियों ने रखे विचार
पैनल चर्चा में अदानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के बिजनेस डेवलपमेंट एंड स्ट्रेटजी प्रमुख सुमित वर्मा, टाटा पावर ट्रेडिंग कंपनी लिमिटेड के सीईओ एवं एमडी तरुण कत्याल, एशियन डेवलपमेंट बैंक के प्रिंसिपल एनर्जी स्पेशलिस्ट जेम्स कोलांथराज और जर्मन बायोगैस एसोसिएशन के सीईओ डॉ. क्लॉडियस दा कोस्टा गोमेज शामिल हुए।

चर्चा का संचालन काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (CEEW) की प्रोग्राम लीड राशि सिंह ने किया। इसमें बिहार में निजी निवेश, ऊर्जा भंडारण, ग्रीन हाइड्रोजन, तकनीकी नवाचार और अक्षय ऊर्जा से जुड़े उद्योगों की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

कार्यक्रम में भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी, संयुक्त सचिव अनुपम कुमार, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के घनश्याम प्रसाद, BSPGCL के प्रबंध निदेशक विशाल राज और अवाडा के संस्थापक एवं अध्यक्ष विनीत मित्तल समेत कई वरिष्ठ अधिकारी और उद्योग जगत के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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बिहार में ₹2.57 लाख करोड़ के निवेश की तैयारी, 24 GW अक्षय ऊर्जा का लक्ष्य; निवेशकों को सरकार ने दिया बड़ा ऑफर

By Malay Ojha | Published: 04 November 2026 at 07:02 PM

बिहार अब अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े निवेश की तैयारी कर रहा है। राज्य सरकार ने बिजली उत्पादन से लेकर सौर ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज और ग्रीन हाइड्रोजन तक के क्षेत्र में निवेश के अवसर खोल दिए हैं। नई दिल्ली में आयोजित भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो-2026 में बिहार ने ₹2,57,316 करोड़ की निवेश कार्ययोजना पेश की। इसके साथ ही वर्ष 2030 तक 24 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य भी सामने रखा।

निवेशकों को बिहार आने का न्योता
बुधवार को भारत मंडपम में आयोजित समिट के बिहार स्टेट प्लेनरी सेशन में राज्य के ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने उद्योग जगत और निवेशकों को बिहार में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि बिहार में तेजी से विकास हो रहा है और अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में निवेशकों के लिए हाई ग्रोथ और हाई रिटर्न की संभावनाएं हैं। सरकार निवेशकों को हरसंभव सहयोग देने के लिए तैयार है।

700 मेगावाट से 10 हजार मेगावाट तक पहुंची बिजली की मांग
ऊर्जा मंत्री ने बिहार में बिजली क्षेत्र में आए बदलावों का जिक्र करते हुए बताया कि वर्ष 2005 में राज्य की बिजली की मांग करीब 700 मेगावाट थी, जो अब बढ़कर लगभग 10 हजार मेगावाट हो गई है। ‘हर घर बिजली’ योजना के तहत राज्य के प्रत्येक घर तक बिजली पहुंचाई जा चुकी है।

उन्होंने कहा कि छठ महापर्व और सूर्य उपासना की सदियों पुरानी परंपरा बिहार को सौर ऊर्जा से जोड़ती है। राज्य सरकार पीएम-कुसुम और पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के जरिए भी नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा दे रही है। उनका कहना था कि आने वाले समय में बिहार अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा।

अगले 10 साल में 25 हजार मेगावाट बिजली की जरूरत
ऊर्जा सचिव एवं बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड (BSPHCL) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक अजय यादव ने बताया कि राज्य में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। अनुमान है कि अगले एक दशक में यह मांग करीब 25 हजार मेगावाट तक पहुंच जाएगी।

उन्होंने 301 मेगावाट क्षमता की कजरा सौर ऊर्जा परियोजना और इसके साथ 523 मेगावाट आवर की बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) परियोजना की जानकारी दी। सरकारी भवनों पर सोलर पैनल लगाने की योजना और बिजली कंपनियों के प्रदर्शन का भी जिक्र किया।

दोनों बिजली वितरण कंपनियां मुनाफे में
अजय यादव के मुताबिक, बिहार की उत्तर और दक्षिण क्षेत्र की दोनों बिजली वितरण कंपनियां लाभ की स्थिति में हैं। राज्य में एटीएंडसी (AT&C) हानियां राष्ट्रीय औसत से कम हैं। करीब एक करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं और बिजली बिल संग्रहण की दक्षता लगभग 100 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

उन्होंने बताया कि राज्य में करीब ₹78,400 करोड़ की परियोजनाएं अलग-अलग चरणों में हैं। वहीं, बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन, वितरण और आधारभूत संरचना के रखरखाव सहित कुल ₹2,57,316 करोड़ के निवेश की कार्ययोजना तैयार की गई है।

2030 तक 24 गीगावाट अक्षय ऊर्जा बनाने का लक्ष्य
बिहार सरकार ने अक्षय ऊर्जा नीति-2025 के तहत वित्तीय वर्ष 2030 तक 24 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता और 6 गीगावाट आवर (GWh) ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है।

इसके लिए पंप्ड स्टोरेज नीति-2025, अक्षय ऊर्जा नीति-2025, ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2026 और औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज-2025 के जरिए निवेशकों को सुविधाएं देने की तैयारी है। सरकार का जोर निजी निवेश के साथ ऊर्जा क्षेत्र में नई तकनीक और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर है।

समिट में तीन अहम समझौतों पर हस्ताक्षर
भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट के दौरान बिहार के विद्युत और अक्षय ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए तीन महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

पहला समझौता बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड और सेंटर फॉर मिशन ऑन एनर्जी ट्रांजिशन (CMET), मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MANIT), भोपाल के बीच हुआ। इसके तहत अक्षय ऊर्जा की योजना तैयार करने और बिजली व्यवस्था के बेहतर प्रबंधन में सहयोग किया जाएगा।

दूसरा समझौता पावर सेक्टर स्किल काउंसिल (PSSC), बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड (BSPHCL) और बिहार पावर ट्रेनिंग मैनेजमेंट सोसाइटी (BPTMS), गौरीचक, पटना के बीच हुआ। इसका उद्देश्य बिजली क्षेत्र में प्रशिक्षण, कौशल विकास और कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाना है।

तीसरा समझौता बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड (BSPGCL) और द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) के बीच हुआ। इसके जरिए बिजली और अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग तथा रिसर्च को बढ़ावा दिया जाएगा।

अगले पांच साल में तीन सेक्टर पर रहेगा फोकस
समिट में ‘Bihar’s Renewable Energy Future: Unlocking New Avenues for Investment and Growth’ विषय पर पैनल चर्चा भी हुई। इसमें अजय यादव ने बताया कि अगले दो से पांच वर्षों में डिस्ट्रीब्यूटेड रिन्यूएबल एनर्जी (DRE), बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और अक्षय ऊर्जा से जुड़े उपकरणों के निर्माण में निवेश की बड़ी संभावनाएं हैं।

राज्य का लक्ष्य अलग-अलग योजनाओं के जरिए करीब 5,000 मेगावाट डिस्ट्रीब्यूटेड रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता विकसित करना है। इसमें पीएम-कुसुम योजना के तहत 2,700 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता, सरकारी भवनों पर सोलर पैनल लगाकर 500 मेगावाट क्षमता और पीएम सूर्य घर योजना के तहत करीब 15 लाख परिवारों की छतों पर रूफटॉप सोलर लगाने की योजना शामिल है।

औरंगाबाद में बनेगा 150 मेगावाट का सोलर पार्क
अजय यादव ने बताया कि जलाशयों और अन्य उपयुक्त स्थानों पर भी सौर ऊर्जा परियोजनाएं विकसित की जाएंगी। इसके साथ बड़े बैटरी स्टोरेज सिस्टम, पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं और सोलर प्लस स्टोरेज मॉडल पर काम किया जाएगा। उन्होंने औरंगाबाद में प्रस्तावित 150 मेगावाट क्षमता के सोलर पार्क का भी उल्लेख किया।

अडानी, टाटा पावर और एडीबी के प्रतिनिधियों ने रखे विचार
पैनल चर्चा में अदानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के बिजनेस डेवलपमेंट एंड स्ट्रेटजी प्रमुख सुमित वर्मा, टाटा पावर ट्रेडिंग कंपनी लिमिटेड के सीईओ एवं एमडी तरुण कत्याल, एशियन डेवलपमेंट बैंक के प्रिंसिपल एनर्जी स्पेशलिस्ट जेम्स कोलांथराज और जर्मन बायोगैस एसोसिएशन के सीईओ डॉ. क्लॉडियस दा कोस्टा गोमेज शामिल हुए।

चर्चा का संचालन काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (CEEW) की प्रोग्राम लीड राशि सिंह ने किया। इसमें बिहार में निजी निवेश, ऊर्जा भंडारण, ग्रीन हाइड्रोजन, तकनीकी नवाचार और अक्षय ऊर्जा से जुड़े उद्योगों की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

कार्यक्रम में भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी, संयुक्त सचिव अनुपम कुमार, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के घनश्याम प्रसाद, BSPGCL के प्रबंध निदेशक विशाल राज और अवाडा के संस्थापक एवं अध्यक्ष विनीत मित्तल समेत कई वरिष्ठ अधिकारी और उद्योग जगत के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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