By Malay Ojha | Published: 05 November 2026 at 08:24 PM
दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण ने चिंता बढ़ा दी है। हालात बिगड़ने से रोकने के लिए 5 नवंबर से 20 नवंबर तक कई विशेष प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं। इसके तहत दिल्ली से सटे छह प्रमुख शहरों के सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 फीसदी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम करना होगा। वहीं, धूल उड़ाने वाले निर्माण और तोड़फोड़ के कामों पर भी रोक लगा दी गई है।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू इन नियमों का सीधा असर दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों और निर्माण गतिविधियों पर पड़ेगा। सरकार का मकसद सड़कों पर गाड़ियों की संख्या घटाने के साथ ही निर्माण कार्यों से निकलने वाली धूल को नियंत्रित करना है।
इन छह शहरों के दफ्तरों में लागू होगा वर्क फ्रॉम होम
कमिशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) के निर्देश के मुताबिक, गुरुग्राम, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद, गाजियाबाद और सोनीपत में सरकारी और निजी कार्यालयों के 50 फीसदी कर्मचारियों को घर से काम करना होगा। यह व्यवस्था 20 नवंबर तक लागू रहेगी।
हालांकि, जिन कार्यालयों में आधे कर्मचारियों के साथ कामकाज चलाना संभव नहीं है, उन्हें राज्य सरकारें जरूरत के मुताबिक छूट दे सकती हैं। इस व्यवस्था से रोजाना दफ्तर आने-जाने वाले वाहनों की संख्या कम होने और ट्रैफिक का दबाव घटने की उम्मीद है।
निर्माण और तोड़फोड़ के कामों पर रहेगी रोक
प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए धूल फैलाने वाली निर्माण गतिविधियों पर भी सख्ती की गई है। सड़क किनारे या खुले स्थानों पर धूल उड़ाने वाले काम नहीं किए जा सकेंगे। निर्माण सामग्री खुले में रखने और ऐसी गतिविधियां करने पर भी रोक रहेगी, जिनसे आसपास प्रदूषण बढ़ता है।
हालांकि, जरूरी परियोजनाओं को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। मेट्रो, रेलवे, एयरपोर्ट और अस्पतालों से जुड़े निर्माण कार्य जारी रह सकेंगे। घरों के अंदर प्लंबर, बिजली और दूसरी छोटी-मोटी मरम्मत की भी अनुमति होगी, लेकिन इन कामों से धूल नहीं फैलनी चाहिए।
चार दिन में 117 से 377 पहुंचा दिल्ली का AQI
दिल्ली में प्रदूषण किस तेजी से बढ़ा है, इसका अंदाजा एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। चार दिन पहले राजधानी का AQI 117 था, जो बुधवार को बढ़कर 377 पहुंच गया। यानी महज चार दिनों में हवा की गुणवत्ता में भारी गिरावट दर्ज की गई।
NCR के दूसरे शहरों में भी प्रदूषण का स्तर चिंताजनक बना हुआ है। बुधवार को फरीदाबाद का AQI 160, गाजियाबाद का 257, ग्रेटर नोएडा का 309, गुरुग्राम का 322 और नोएडा का 330 दर्ज किया गया।
दिवाली और पराली जलाने से बढ़ता है प्रदूषण का खतरा
CAQM ने 30 अक्टूबर को ही इन विशेष उपायों की जानकारी दी थी। आयोग का मानना है कि 5 से 20 नवंबर के बीच दिल्ली-NCR में प्रदूषण बढ़ने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। इस दौरान पंजाब और हरियाणा समेत आसपास के राज्यों में पराली जलाने की घटनाएं बढ़ती हैं। दिवाली के दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआं भी हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, मौसम में बदलाव, हवा की धीमी रफ्तार और बढ़ती नमी ने प्रदूषण की समस्या को और गंभीर बना दिया है। हवा की गति कम होने से प्रदूषण के कण वातावरण में दूर तक नहीं जा पाते और निचले स्तर पर जमा होने लगते हैं। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की अनुमिता राय चौधरी के मुताबिक, दिवाली के आसपास भी मौसम की परिस्थितियों में सुधार के संकेत नहीं हैं।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने वाहन चालकों को दी सलाह
प्रदूषण नियंत्रण के साथ ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर भी दिल्ली पुलिस सतर्क है। ट्रैफिक पुलिस ने वाहन चालकों को सलाह दी है कि घर से निकलने से पहले ट्रैफिक एडवाइजरी और रूट डायवर्जन की जानकारी जरूर हासिल कर लें।
प्रतिबंधों के दौरान यातायात व्यवस्था में बदलाव हो सकता है। ऐसे में वाहन चालकों से नियमों का पालन करने और ताजा ट्रैफिक अपडेट देखने की अपील की गई है।
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