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यूपी में वोटर लिस्ट से खेल की साजिश? राम गोपाल यादव का दावा- हर विधानसभा में 10 हजार वोट काटने का टारगेट

By Malay Ojha | Published: 30 October 2026 at 10:58 AM

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राम गोपाल यादव ने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि प्रदेश की हर विधानसभा सीट पर करीब 10 हजार सपा समर्थकों के वोट काटने का लक्ष्य तय किया गया है। उनका आरोप है कि बीजेपी कार्यकर्ता SDM का आईडी-पासवर्ड लेकर वोटर रजिस्ट्रेशन सेंटर (VRC) में बैठ रहे हैं और मतदाता सूची में अपनी मर्जी से बदलाव कर रहे हैं।

हर विधानसभा में 10 हजार वोट काटने का आरोप
राम गोपाल यादव ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि प्रदेश में ऐसे अधिकारियों को SDM बनाया जा रहा है, जो अपना आईडी-पासवर्ड बीजेपी कार्यकर्ताओं को सौंप देते हैं। इसके बाद बीजेपी से जुड़े लोग VRC में बैठकर सपा समर्थकों के नाम मतदाता सूची से हटाने और बीजेपी समर्थकों के नाम जोड़ने का काम कर रहे हैं। उन्होंने निर्वाचन आयोग से इस मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

OTP के जरिए भी हो रहा खेल?
सपा महासचिव ने अपने आरोप में OTP का भी जिक्र किया है। उनका कहना है कि संबंधित आईडी-पासवर्ड से जुड़े सिस्टम पर आने वाला OTP भी बीजेपी कार्यकर्ता के पास पहुंचता है। वह अपनी सहमति देकर मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पूरी करा देता है। हालांकि, राम गोपाल यादव के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

अखिलेश यादव भी चुनाव आयोग पर उठा चुके हैं सवाल
यह पहली बार नहीं है जब समाजवादी पार्टी ने मतदाता सूची में गड़बड़ी का मुद्दा उठाया है। पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पहले भी बीजेपी, चुनाव आयोग और प्रशासन पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप लगा चुके हैं। उनका कहना है कि चुनाव से पहले विपक्षी समर्थकों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाते हैं और मतदान के दिन भी उन्हें वोट डालने से रोकने की कोशिश होती है।

19 लाख से ज्यादा संदिग्ध मतदाताओं की पहचान का दावा
अखिलेश यादव ने ‘समाजवादी ECI ऑडिट’ के जरिए मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया था। उन्होंने दावा किया था कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने 19 लाख से अधिक संदिग्ध मतदाताओं की पहचान की है। सपा प्रमुख के मुताबिक, कई विधानसभा क्षेत्रों में एक ही व्यक्ति के नाम की कई प्रविष्टियां दर्ज हैं। उन्होंने एक युवक का उदाहरण देते हुए दावा किया था कि उसका नाम 12 अलग-अलग जगहों पर मतदाता सूची में दर्ज है।

अखिलेश ने सवाल उठाया था कि एक ही व्यक्ति के नाम पर कई जगह वोट दर्ज होने से चुनाव में गड़बड़ी की आशंका बढ़ सकती है। सपा लगातार मांग कर रही है कि मतदाता सूची की जांच पारदर्शी तरीके से कराई जाए और किसी भी योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से न हटाया जाए।

पीलीभीत में 10,470 प्रविष्टियों में मिली गड़बड़ी
सपा के आरोपों के बीच पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची से जुड़ा मामला भी सामने आ चुका है। कांग्रेस ने वहां 16,554 प्रविष्टियों में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। शिकायत में कहा गया था कि हजारों मतदाताओं के नाम और उनके पिता के नाम बदल दिए गए, जबकि EPIC और सीरियल नंबर पहले जैसे ही रहे। इसके अलावा नाम हटाने और नए नाम जोड़ने में भी अनियमितता का आरोप लगा था।

दो SDM पर FIR, ऑपरेटर की सेवाएं समाप्त
मामले की जांच के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया था कि 31 मई से 29 अगस्त के बीच VRC ऑपरेटर की ओर से मतदाता विवरण में संशोधन के लिए 13,779 फॉर्म-8 की एंट्री की गई थी। इनमें 10,470 फॉर्म स्वीकार किए गए, जबकि 3,309 फॉर्म खारिज हुए। जांच में स्वीकार किए गए 10,470 मामलों में अनियमितताएं पाई गईं।

इस मामले में तत्कालीन SDM मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई थी। VRC कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार की सेवाएं भी समाप्त कर दी गई थीं। दोनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।

जीत के अंतर से ज्यादा बताई गई थीं गड़बड़ियां
पीलीभीत सदर सीट का मामला इसलिए भी राजनीतिक रूप से अहम हो गया था, क्योंकि 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के संजय गंगवार ने सपा प्रत्याशी को करीब 6,970 वोटों से हराया था। कांग्रेस का दावा था कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों से जुड़ी प्रविष्टियों की संख्या जीत के अंतर से भी अधिक थी।

2027 चुनाव से पहले मतदाता सूची पर बढ़ेगी निगरानी?
अब राम गोपाल यादव के ताजा आरोपों ने मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक विवाद और बढ़ा दिया है। सपा ने निर्वाचन आयोग से पूरे मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। दूसरी तरफ, पीलीभीत में सामने आई अनियमितताओं ने भी मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।

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यूपी में वोटर लिस्ट से खेल की साजिश? राम गोपाल यादव का दावा- हर विधानसभा में 10 हजार वोट काटने का टारगेट

By Malay Ojha | Published: 30 October 2026 at 10:58 AM

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राम गोपाल यादव ने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि प्रदेश की हर विधानसभा सीट पर करीब 10 हजार सपा समर्थकों के वोट काटने का लक्ष्य तय किया गया है। उनका आरोप है कि बीजेपी कार्यकर्ता SDM का आईडी-पासवर्ड लेकर वोटर रजिस्ट्रेशन सेंटर (VRC) में बैठ रहे हैं और मतदाता सूची में अपनी मर्जी से बदलाव कर रहे हैं।

हर विधानसभा में 10 हजार वोट काटने का आरोप
राम गोपाल यादव ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि प्रदेश में ऐसे अधिकारियों को SDM बनाया जा रहा है, जो अपना आईडी-पासवर्ड बीजेपी कार्यकर्ताओं को सौंप देते हैं। इसके बाद बीजेपी से जुड़े लोग VRC में बैठकर सपा समर्थकों के नाम मतदाता सूची से हटाने और बीजेपी समर्थकों के नाम जोड़ने का काम कर रहे हैं। उन्होंने निर्वाचन आयोग से इस मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

OTP के जरिए भी हो रहा खेल?
सपा महासचिव ने अपने आरोप में OTP का भी जिक्र किया है। उनका कहना है कि संबंधित आईडी-पासवर्ड से जुड़े सिस्टम पर आने वाला OTP भी बीजेपी कार्यकर्ता के पास पहुंचता है। वह अपनी सहमति देकर मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पूरी करा देता है। हालांकि, राम गोपाल यादव के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

अखिलेश यादव भी चुनाव आयोग पर उठा चुके हैं सवाल
यह पहली बार नहीं है जब समाजवादी पार्टी ने मतदाता सूची में गड़बड़ी का मुद्दा उठाया है। पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पहले भी बीजेपी, चुनाव आयोग और प्रशासन पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप लगा चुके हैं। उनका कहना है कि चुनाव से पहले विपक्षी समर्थकों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाते हैं और मतदान के दिन भी उन्हें वोट डालने से रोकने की कोशिश होती है।

19 लाख से ज्यादा संदिग्ध मतदाताओं की पहचान का दावा
अखिलेश यादव ने ‘समाजवादी ECI ऑडिट’ के जरिए मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया था। उन्होंने दावा किया था कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने 19 लाख से अधिक संदिग्ध मतदाताओं की पहचान की है। सपा प्रमुख के मुताबिक, कई विधानसभा क्षेत्रों में एक ही व्यक्ति के नाम की कई प्रविष्टियां दर्ज हैं। उन्होंने एक युवक का उदाहरण देते हुए दावा किया था कि उसका नाम 12 अलग-अलग जगहों पर मतदाता सूची में दर्ज है।

अखिलेश ने सवाल उठाया था कि एक ही व्यक्ति के नाम पर कई जगह वोट दर्ज होने से चुनाव में गड़बड़ी की आशंका बढ़ सकती है। सपा लगातार मांग कर रही है कि मतदाता सूची की जांच पारदर्शी तरीके से कराई जाए और किसी भी योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से न हटाया जाए।

पीलीभीत में 10,470 प्रविष्टियों में मिली गड़बड़ी
सपा के आरोपों के बीच पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची से जुड़ा मामला भी सामने आ चुका है। कांग्रेस ने वहां 16,554 प्रविष्टियों में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। शिकायत में कहा गया था कि हजारों मतदाताओं के नाम और उनके पिता के नाम बदल दिए गए, जबकि EPIC और सीरियल नंबर पहले जैसे ही रहे। इसके अलावा नाम हटाने और नए नाम जोड़ने में भी अनियमितता का आरोप लगा था।

दो SDM पर FIR, ऑपरेटर की सेवाएं समाप्त
मामले की जांच के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया था कि 31 मई से 29 अगस्त के बीच VRC ऑपरेटर की ओर से मतदाता विवरण में संशोधन के लिए 13,779 फॉर्म-8 की एंट्री की गई थी। इनमें 10,470 फॉर्म स्वीकार किए गए, जबकि 3,309 फॉर्म खारिज हुए। जांच में स्वीकार किए गए 10,470 मामलों में अनियमितताएं पाई गईं।

इस मामले में तत्कालीन SDM मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई थी। VRC कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार की सेवाएं भी समाप्त कर दी गई थीं। दोनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।

जीत के अंतर से ज्यादा बताई गई थीं गड़बड़ियां
पीलीभीत सदर सीट का मामला इसलिए भी राजनीतिक रूप से अहम हो गया था, क्योंकि 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के संजय गंगवार ने सपा प्रत्याशी को करीब 6,970 वोटों से हराया था। कांग्रेस का दावा था कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों से जुड़ी प्रविष्टियों की संख्या जीत के अंतर से भी अधिक थी।

2027 चुनाव से पहले मतदाता सूची पर बढ़ेगी निगरानी?
अब राम गोपाल यादव के ताजा आरोपों ने मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक विवाद और बढ़ा दिया है। सपा ने निर्वाचन आयोग से पूरे मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। दूसरी तरफ, पीलीभीत में सामने आई अनियमितताओं ने भी मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।

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