By Malay Ojha | Published: 02 June 2026 at 02:56 PM
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पिछले कई महीनों से चल रही बातचीत अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है जहां दोनों देशों के बीच किसी बड़े आर्थिक समझौते की घोषणा कभी भी हो सकती है। इसी उद्देश्य से अमेरिका का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल चार दिन की यात्रा पर भारत पहुंचा है। माना जा रहा है कि इस दौरान होने वाली बैठकों में उन बिंदुओं को अंतिम रूप दिया जाएगा जिन पर अभी तक सहमति नहीं बन पाई है।
नई दिल्ली में शुरू हुई इस महत्वपूर्ण वार्ता में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ब्रेंडन लिंच कर रहे हैं, जबकि भारतीय पक्ष की ओर से वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन बातचीत की कमान संभाल रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार दोनों देशों के बीच व्यापार से जुड़े अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और अब केवल कुछ तकनीकी तथा कानूनी पहलुओं को अंतिम रूप देना बाकी है।
पीयूष गोयल ने दिया बड़ा संकेत
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस दिशा में सकारात्मक संकेत दिए हैं। उनका कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण की लगभग पूरी तैयारी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि करीब 99 प्रतिशत बातचीत पूरी हो गई है और केवल कुछ छोटे मुद्दों पर चर्चा चल रही है।
मंत्री के बयान से यह संकेत मिला है कि दोनों देशों के बीच जल्द ही औपचारिक समझौते की घोषणा की जा सकती है।
आखिर क्या है यह व्यापार समझौता?
भारत और अमेरिका पिछले कुछ समय से एक अंतरिम व्यापार समझौते पर काम कर रहे हैं। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार को और आसान बनाना, निवेश बढ़ाना तथा बाजारों तक पहुंच को सरल बनाना है।
फरवरी में दोनों देशों द्वारा जारी संयुक्त बयान में इस दिशा में सहमति बनी थी। उसी के बाद से दोनों पक्ष इस समझौते के कानूनी और व्यावसायिक ढांचे को तैयार करने में जुटे हुए हैं।
किन मुद्दों पर हो रही है चर्चा?
इस समझौते के तहत कई महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। इनमें बाजार पहुंच, सीमा शुल्क, व्यापार सुविधा, निवेश को बढ़ावा देने वाले उपाय, आर्थिक सुरक्षा और गैर-शुल्क बाधाओं को कम करने जैसे विषय प्रमुख हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है तो दोनों देशों के कारोबारियों को बड़ा लाभ मिल सकता है और व्यापारिक संबंधों में नई मजबूती आएगी।
शुल्क व्यवस्था में बदलाव भी अहम मुद्दा
व्यापार वार्ता के दौरान शुल्क दरों का विषय भी चर्चा के केंद्र में है। पहले सामने आए मसौदों में अमेरिका की ओर से भारत पर लगाए गए कुछ शुल्कों में कमी का संकेत दिया गया था।
हालांकि बाद में अमेरिका में शुल्क नीति को लेकर कानूनी विवाद खड़ा हो गया और वहां की न्यायिक प्रक्रिया के कारण स्थिति में बदलाव आया। इसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने कई देशों पर नई शुल्क व्यवस्था लागू करने की घोषणा की थी। अब दोनों पक्ष इस बदले हुए परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए नई रणनीति पर विचार कर रहे हैं।
भारत ने भी दिए बड़े संकेत
जानकारों के अनुसार भारत ने आने वाले वर्षों में अमेरिका से ऊर्जा, विमानन, प्रौद्योगिकी, कीमती धातुओं और औद्योगिक उपयोग के लिए आवश्यक कच्चे माल के आयात को बढ़ाने की संभावना जताई है।
यदि ऐसा होता है तो दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों का दायरा पहले की तुलना में काफी बड़ा हो सकता है। इससे ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक उत्पादन और तकनीकी सहयोग को भी मजबूती मिलेगी।
अमेरिकी पक्ष भी दिखा आशावादी
भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भी हाल ही में संकेत दिया था कि दोनों देशों के बीच बातचीत अब अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा था कि समझौते से जुड़े बचे हुए मुद्दों को सुलझाने के लिए दोनों पक्ष लगातार संपर्क में हैं।
उनके अनुसार निकट भविष्य में व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना काफी मजबूत दिखाई दे रही है।
दोनों देशों के रिश्तों के लिए क्यों अहम है यह समझौता?
भारत और अमेरिका दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच होने वाला कोई भी व्यापारिक समझौता वैश्विक बाजारों पर असर डाल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि निवेश, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी के क्षेत्रों में भी नए अवसर पैदा करेगा। यही वजह है कि दुनियाभर के आर्थिक विशेषज्ञों की नजर इस वार्ता पर बनी हुई है।

