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ममता बनर्जी की कार पर कीचड़-जूता और पत्थर फेंके, कांचरापाड़ा में भारी विरोध; बोलीं- ‘मेरा सिर फट जाता’

By Malay Ojha | Published: 09 August 2026 at 05:44 PM

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को रविवार को कांचरापाड़ा में भारी विरोध का सामना करना पड़ा। पुलिस हिरासत में जान गंवाने वाले तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ता के परिवार से मिलने पहुंचीं ममता बनर्जी के काफिले को प्रदर्शनकारियों ने घेर लिया। इस दौरान उनकी कार पर कीचड़, जूते और पत्थर फेंके जाने की बात सामने आई। प्रदर्शनकारियों ने उनके खिलाफ ‘चोर-चोर’ के नारे भी लगाए। घटना के बाद ममता बनर्जी ने राज्य की नई सरकार और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए।

ममता बनर्जी जिस परिवार से मिलने पहुंची थीं, वह कांचरापाड़ा के वार्ड 23 की पूर्व तृणमूल पार्षद जेनी शर्मा कीट का परिवार है। जेनी के पति बिरजू कीट की पुलिस हिरासत में मौत हुई थी। ममता बनर्जी के वहां पहुंचने के बाद विरोध कर रहे लोगों ने उनके काफिले को रोकने की कोशिश की और चारों तरफ से घेर लिया। देखते ही देखते मौके पर राजनीतिक तनाव बढ़ गया।

‘मेरा सिर फट जाता’, ममता का पुलिस पर बड़ा आरोप
घटना के बाद ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी कार पर बड़ी ईंटें भी फेंकी गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर पत्थर या ईंट उन्हें लग जाती तो गंभीर हादसा हो सकता था। ममता ने कहा, “मेरा सिर फट जाता। मैं यहीं मर जाती।” उन्होंने पुलिस पर भाजपा को बचाने का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब हो गई है।

भाजपा पर भड़काने का आरोप, कार्रवाई की चेतावनी
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि इस विरोध के पीछे भाजपा से जुड़े लोग हैं और पुलिस उन्हें संरक्षण दे रही है। उन्होंने कहा कि वह इस मामले में मुकदमा करेंगी। ममता ने राज्य की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि बंगाल में कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं रह गई है। हालांकि, भाजपा ने ममता के आरोपों को खारिज किया और घटना में अपने कार्यकर्ताओं की भूमिका से इनकार किया।

भाजपा बोली- ममता की कार पर हमला गलत, पार्टी समर्थन नहीं करती
पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने ममता बनर्जी की कार पर हुए कथित हमले से दूरी बना ली। उन्होंने कहा कि अगर किसी ने पूर्व मुख्यमंत्री की गाड़ी पर पत्थर, कीचड़ या चप्पल फेंकी है तो भाजपा उसका समर्थन नहीं करती। उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना में भाजपा के किसी कार्यकर्ता के शामिल होने की जानकारी नहीं है। भट्टाचार्य के मुताबिक, ऐसी घटना राज्य की छवि के लिए भी ठीक नहीं है और यदि ऐसा हुआ है तो पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए।

अग्निमित्रा पॉल ने भी कहा- हिंसा भाजपा की संस्कृति नहीं
राज्य सरकार में मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने भी ममता बनर्जी के साथ इस तरह के व्यवहार का समर्थन नहीं किया। उन्होंने कहा कि किसी पर हमला करना, कालिख लगाना या जूता-चप्पल फेंकना स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनका कहना था कि ममता बनर्जी के शासनकाल को लेकर भाजपा के अपने राजनीतिक आरोप हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किसी तरह की हिंसा को सही ठहराया जाए।

भाजपा नेता ने ममता पर लगाया ‘लाशों की राजनीति’ का आरोप
वहीं भाजपा नेता अर्जुन सिंह ने ममता बनर्जी के कांचरापाड़ा दौरे पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी राजनीतिक फायदा उठाने के लिए ऐसी घटनाओं को मुद्दा बना रही हैं। उनका कहना था कि अगर किसी अपराध में किसी की भूमिका है तो कानून के मुताबिक सजा मिलनी चाहिए, लेकिन घटना को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।

पुलिस हिरासत में हुई थी बिरजू कीट की मौत
दरअसल, पूरा विवाद बिरजू कीट की पुलिस हिरासत में हुई मौत के बाद शुरू हुआ। हलीशहर थाने की पुलिस ने बिरजू कीट को कथित जबरन वसूली समेत कई मामलों में गिरफ्तार किया था। उसे शुक्रवार को अदालत में पेश किया गया था, जहां से उसे पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया था। इसके बाद शनिवार को उसकी पुलिस हिरासत में मौत की खबर सामने आई।

परिवार ने पुलिस पर लगाया मारपीट का आरोप
मृतक की पत्नी और पूर्व तृणमूल पार्षद जेनी शर्मा कीट ने आरोप लगाया कि पुलिस लॉकअप के अंदर उनके पति के साथ मारपीट की गई और इसी वजह से उनकी मौत हुई। इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है। मामले को लेकर पुलिस की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है। यही मामला बाद में राजनीतिक विवाद का बड़ा कारण बन गया और ममता बनर्जी पीड़ित परिवार से मिलने कांचरापाड़ा पहुंचीं।

ममता के दौरे को भाजपा ने बताया राजनीतिक कदम
भाजपा की ओर से आरोप लगाया गया कि ममता बनर्जी कांचरापाड़ा में माहौल को भड़काने और राजनीतिक फायदा लेने पहुंची थीं। पार्टी नेताओं ने कहा कि पुलिस हिरासत में हुई मौत की जांच अपने स्तर पर होनी चाहिए, लेकिन इस घटना को लेकर राजनीतिक तनाव पैदा करना उचित नहीं है। दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि मौत के मामले में निष्पक्ष जांच और परिवार को न्याय मिलना जरूरी है।

अभिषेक बनर्जी के दौरे में भी हुआ था विरोध
कांचरापाड़ा की घटना से पहले तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को भी विरोध का सामना करना पड़ा था। पीड़ित तृणमूल कार्यकर्ताओं से मिलने के दौरान उनके ऊपर अंडे फेंके जाने और उनके साथ धक्का-मुक्की किए जाने की बात सामने आई थी। इस घटना को लेकर भी तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हुए थे।

कांचरापाड़ा की घटना ने बढ़ाई बंगाल की सियासी गर्मी
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में तनाव और बढ़ा दिया है। एक तरफ तृणमूल कांग्रेस कानून-व्यवस्था और राजनीतिक विरोध के नाम पर सरकार को घेर रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा इसे जनता के गुस्से के तौर पर पेश कर रही है। कांचरापाड़ा की घटना ने दोनों दलों के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान को एक बार फिर सड़क पर ला दिया है।

पुलिस कार्रवाई पर टिकी नजर
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि ममता बनर्जी के काफिले पर वास्तव में किसने पत्थर, कीचड़ और जूते फेंके और इस मामले में पुलिस क्या कार्रवाई करती है। भाजपा ने घटना से दूरी बनाते हुए कार्रवाई की मांग की है, जबकि ममता बनर्जी ने पुलिस और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ऐसे में अब जांच और प्रशासन की कार्रवाई से ही साफ होगा कि इस विरोध के पीछे कौन लोग थे और उनकी राजनीतिक भूमिका क्या थी।

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ममता बनर्जी की कार पर कीचड़-जूता और पत्थर फेंके, कांचरापाड़ा में भारी विरोध; बोलीं- ‘मेरा सिर फट जाता’

By Malay Ojha | Published: 09 August 2026 at 05:44 PM

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को रविवार को कांचरापाड़ा में भारी विरोध का सामना करना पड़ा। पुलिस हिरासत में जान गंवाने वाले तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ता के परिवार से मिलने पहुंचीं ममता बनर्जी के काफिले को प्रदर्शनकारियों ने घेर लिया। इस दौरान उनकी कार पर कीचड़, जूते और पत्थर फेंके जाने की बात सामने आई। प्रदर्शनकारियों ने उनके खिलाफ ‘चोर-चोर’ के नारे भी लगाए। घटना के बाद ममता बनर्जी ने राज्य की नई सरकार और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए।

ममता बनर्जी जिस परिवार से मिलने पहुंची थीं, वह कांचरापाड़ा के वार्ड 23 की पूर्व तृणमूल पार्षद जेनी शर्मा कीट का परिवार है। जेनी के पति बिरजू कीट की पुलिस हिरासत में मौत हुई थी। ममता बनर्जी के वहां पहुंचने के बाद विरोध कर रहे लोगों ने उनके काफिले को रोकने की कोशिश की और चारों तरफ से घेर लिया। देखते ही देखते मौके पर राजनीतिक तनाव बढ़ गया।

‘मेरा सिर फट जाता’, ममता का पुलिस पर बड़ा आरोप
घटना के बाद ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी कार पर बड़ी ईंटें भी फेंकी गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर पत्थर या ईंट उन्हें लग जाती तो गंभीर हादसा हो सकता था। ममता ने कहा, “मेरा सिर फट जाता। मैं यहीं मर जाती।” उन्होंने पुलिस पर भाजपा को बचाने का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब हो गई है।

भाजपा पर भड़काने का आरोप, कार्रवाई की चेतावनी
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि इस विरोध के पीछे भाजपा से जुड़े लोग हैं और पुलिस उन्हें संरक्षण दे रही है। उन्होंने कहा कि वह इस मामले में मुकदमा करेंगी। ममता ने राज्य की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि बंगाल में कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं रह गई है। हालांकि, भाजपा ने ममता के आरोपों को खारिज किया और घटना में अपने कार्यकर्ताओं की भूमिका से इनकार किया।

भाजपा बोली- ममता की कार पर हमला गलत, पार्टी समर्थन नहीं करती
पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने ममता बनर्जी की कार पर हुए कथित हमले से दूरी बना ली। उन्होंने कहा कि अगर किसी ने पूर्व मुख्यमंत्री की गाड़ी पर पत्थर, कीचड़ या चप्पल फेंकी है तो भाजपा उसका समर्थन नहीं करती। उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना में भाजपा के किसी कार्यकर्ता के शामिल होने की जानकारी नहीं है। भट्टाचार्य के मुताबिक, ऐसी घटना राज्य की छवि के लिए भी ठीक नहीं है और यदि ऐसा हुआ है तो पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए।

अग्निमित्रा पॉल ने भी कहा- हिंसा भाजपा की संस्कृति नहीं
राज्य सरकार में मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने भी ममता बनर्जी के साथ इस तरह के व्यवहार का समर्थन नहीं किया। उन्होंने कहा कि किसी पर हमला करना, कालिख लगाना या जूता-चप्पल फेंकना स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनका कहना था कि ममता बनर्जी के शासनकाल को लेकर भाजपा के अपने राजनीतिक आरोप हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किसी तरह की हिंसा को सही ठहराया जाए।

भाजपा नेता ने ममता पर लगाया ‘लाशों की राजनीति’ का आरोप
वहीं भाजपा नेता अर्जुन सिंह ने ममता बनर्जी के कांचरापाड़ा दौरे पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी राजनीतिक फायदा उठाने के लिए ऐसी घटनाओं को मुद्दा बना रही हैं। उनका कहना था कि अगर किसी अपराध में किसी की भूमिका है तो कानून के मुताबिक सजा मिलनी चाहिए, लेकिन घटना को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।

पुलिस हिरासत में हुई थी बिरजू कीट की मौत
दरअसल, पूरा विवाद बिरजू कीट की पुलिस हिरासत में हुई मौत के बाद शुरू हुआ। हलीशहर थाने की पुलिस ने बिरजू कीट को कथित जबरन वसूली समेत कई मामलों में गिरफ्तार किया था। उसे शुक्रवार को अदालत में पेश किया गया था, जहां से उसे पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया था। इसके बाद शनिवार को उसकी पुलिस हिरासत में मौत की खबर सामने आई।

परिवार ने पुलिस पर लगाया मारपीट का आरोप
मृतक की पत्नी और पूर्व तृणमूल पार्षद जेनी शर्मा कीट ने आरोप लगाया कि पुलिस लॉकअप के अंदर उनके पति के साथ मारपीट की गई और इसी वजह से उनकी मौत हुई। इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है। मामले को लेकर पुलिस की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है। यही मामला बाद में राजनीतिक विवाद का बड़ा कारण बन गया और ममता बनर्जी पीड़ित परिवार से मिलने कांचरापाड़ा पहुंचीं।

ममता के दौरे को भाजपा ने बताया राजनीतिक कदम
भाजपा की ओर से आरोप लगाया गया कि ममता बनर्जी कांचरापाड़ा में माहौल को भड़काने और राजनीतिक फायदा लेने पहुंची थीं। पार्टी नेताओं ने कहा कि पुलिस हिरासत में हुई मौत की जांच अपने स्तर पर होनी चाहिए, लेकिन इस घटना को लेकर राजनीतिक तनाव पैदा करना उचित नहीं है। दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि मौत के मामले में निष्पक्ष जांच और परिवार को न्याय मिलना जरूरी है।

अभिषेक बनर्जी के दौरे में भी हुआ था विरोध
कांचरापाड़ा की घटना से पहले तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को भी विरोध का सामना करना पड़ा था। पीड़ित तृणमूल कार्यकर्ताओं से मिलने के दौरान उनके ऊपर अंडे फेंके जाने और उनके साथ धक्का-मुक्की किए जाने की बात सामने आई थी। इस घटना को लेकर भी तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हुए थे।

कांचरापाड़ा की घटना ने बढ़ाई बंगाल की सियासी गर्मी
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में तनाव और बढ़ा दिया है। एक तरफ तृणमूल कांग्रेस कानून-व्यवस्था और राजनीतिक विरोध के नाम पर सरकार को घेर रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा इसे जनता के गुस्से के तौर पर पेश कर रही है। कांचरापाड़ा की घटना ने दोनों दलों के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान को एक बार फिर सड़क पर ला दिया है।

पुलिस कार्रवाई पर टिकी नजर
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि ममता बनर्जी के काफिले पर वास्तव में किसने पत्थर, कीचड़ और जूते फेंके और इस मामले में पुलिस क्या कार्रवाई करती है। भाजपा ने घटना से दूरी बनाते हुए कार्रवाई की मांग की है, जबकि ममता बनर्जी ने पुलिस और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ऐसे में अब जांच और प्रशासन की कार्रवाई से ही साफ होगा कि इस विरोध के पीछे कौन लोग थे और उनकी राजनीतिक भूमिका क्या थी।

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