By Malay Ojha | Published: 07 July 2026 at 12:21 PM
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी मामले में विशेष जांच दल (SIT) की शुरुआती रिपोर्ट ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जांच में दावा किया गया है कि महज 40 दिनों के भीतर गिनती कक्ष में 70 बार नकदी चोरी हुई। सीसीटीवी फुटेज में कुछ कर्मचारी नोटों की गड्डियां और खुले पैसे कपड़ों, जूतों और जेबों में छिपाते दिखाई दिए हैं। रिपोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर लापरवाही के साथ-साथ पूरे घटनाक्रम में कई लोगों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।
विशेष जांच दल ने 27 अप्रैल से 5 जून 2026 तक के सीसीटीवी फुटेज की जांच की। रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान गिनती कक्ष में काम करने वाले कुछ कर्मचारियों ने अलग-अलग मौकों पर कुल 70 बार चढ़ावे की रकम निकालकर अपने पास छिपाई। फुटेज में कथित तौर पर नोटों की गड्डियां कपड़ों के अंदर, जूतों और जेबों में रखते हुए कई कर्मचारी दिखाई दिए हैं। जांच एजेंसी ने इसे सुनियोजित तरीके से की गई चोरी बताया है।
किन लोगों पर सबसे गंभीर आरोप लगे
जांच रिपोर्ट में अविनाश शुक्ला और मनीष यादव को इस पूरे मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल बताया गया है। दोनों पर सबसे ज्यादा बार चोरी करने का आरोप है। वहीं अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा और करुणेश पांडे पर चोरी में सहयोग करने का आरोप लगाया गया है। जांच में यह भी सामने आया कि इन कर्मचारियों का वेतन अपेक्षाकृत कम था, लेकिन उनके बैंक खातों में बड़ी मात्रा में नकदी जमा हुई, कई सावधि जमा कराई गईं और बड़े वित्तीय लेनदेन भी मिले। इन सभी तथ्यों की वित्तीय जांच भी की जा रही है।
बाथरूम से भी मिली थी लाखों रुपये की नकदी
रिपोर्ट के मुताबिक 4 जून 2026 को मंदिर ट्रस्ट को गिनती कक्ष से जुड़े बाथरूम से 2 लाख 25 हजार रुपये नकद भी मिले थे। इस बरामदगी के बाद पूरे मामले को गंभीरता से लिया गया और विस्तृत जांच शुरू की गई। इसके बाद सीसीटीवी फुटेज, बैंक खातों और कर्मचारियों की गतिविधियों की गहराई से जांच की गई।
सुरक्षा व्यवस्था में मिली कई बड़ी खामियां
विशेष जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि गिनती कक्ष की सुरक्षा व्यवस्था में कई गंभीर कमियां थीं। कर्मचारियों की रोजाना तलाशी लेने की व्यवस्था लगभग खत्म कर दी गई थी और केवल कभी-कभार जांच होती थी। कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाले कपड़े पहनने का नियम लागू नहीं था। मोबाइल फोन, निजी चाबियां और दूसरी निजी वस्तुएं भी अंदर ले जाने पर कोई प्रभावी रोक नहीं थी। ऐसे में चोरी की संभावना लगातार बनी रही।
दानपात्रों की चाबियां भी गलत हाथों में थीं
रिपोर्ट में सबसे गंभीर सवाल दानपात्रों की चाबियों को लेकर उठाया गया है। जांच के अनुसार, बिना किसी लिखित आदेश के दानपात्रों की चाबियां रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के पास रहती थीं। विशेष जांच दल ने इसे सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी चूक माना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी किसी अधिकृत प्रक्रिया के बिना सौंपना पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है।
ट्रस्ट के जिम्मेदार अधिकारियों पर भी सवाल
जांच में मंदिर ट्रस्ट के प्रतिनिधि डॉ. अनिल मिश्रा और गिनती कक्ष के प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय व्यवस्था और नकदी संग्रह की जिम्मेदारी डॉ. मिश्रा के पास थी। उन्हें सुरक्षा में ढील की जानकारी होने के बावजूद कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया। वहीं सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी सुभाष श्रीवास्तव पर निगरानी और अनुशासन बनाए रखने में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया गया है।
टिन्नू यादव पर आपराधिक साजिश का आरोप
एसआईटी की रिपोर्ट में रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव को केवल लापरवाही तक सीमित नहीं माना गया है। जांच एजेंसी का कहना है कि उनके खिलाफ आपराधिक साजिश रचने, चोरी में सहयोग देने और इसके लिए उकसाने जैसे आरोप बनते हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि टिन्नू यादव की सिफारिश पर उनके भतीजे मनीष यादव को 15 अप्रैल 2026 से गिनती कक्ष में काम पर लगाया गया था।
बैंक खातों से मिले अहम सुराग
जांच के दौरान बैंक खातों की पड़ताल में ऐसे कई वित्तीय लेनदेन सामने आए, जिनसे यह आशंका जताई गई कि चढ़ावे की रकम की चोरी केवल 27 अप्रैल से शुरू नहीं हुई थी। जांच एजेंसी का मानना है कि यह गतिविधियां इससे पहले भी चल रही हो सकती हैं। अब जांच का दायरा बढ़ाकर पुराने रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल यह विशेष जांच दल की प्रारंभिक रिपोर्ट है। जांच एजेंसी अब डिजिटल साक्ष्यों, बैंक रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों के आधार पर अंतिम रिपोर्ट तैयार कर रही है। यदि आगे की जांच में भी यही तथ्य पुष्ट होते हैं तो आरोपियों के खिलाफ और कड़ी कानूनी कार्रवाई की संभावना है। साथ ही मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव किए जाने की भी उम्मीद जताई जा रही है।
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