By Malay Ojha | Published: 19 June 2026 at 02:31 PM
झारखंड में राज्यसभा चुनाव खत्म होने के बाद अब सियासी पारा चढ़ गया है। एक सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा समर्थित उम्मीदवार और दूसरी सीट पर भारतीय जनता पार्टी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार की जीत के बाद कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। हार के बाद कांग्रेस ने आरजेडी पर समर्थन नहीं देने और क्रॉस वोटिंग का आरोप लगाया है।
इन आरोपों पर झारखंड सरकार में मंत्री और आरजेडी विधायक संजय यादव ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने साफ कहा कि लालू यादव की राजनीति की पहचान अलग है और वे कभी भी बीजेपी का समर्थन नहीं कर सकते। संजय यादव ने कहा कि यह आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं और सिर्फ राजनीतिक बचाव के लिए लगाए जा रहे हैं।
कांग्रेस प्रभारी पर ही पलटवार
संजय यादव ने इस पूरे मामले में कांग्रेस प्रभारी पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के अंदर ही गड़बड़ी हुई और उसके लिए बाहर किसी को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर हार हुई है तो कांग्रेस को अपने घर के अंदर झांकना चाहिए।
‘हमारे चारों वोट कांग्रेस को गए’
आरजेडी विधायक ने दावा किया कि पार्टी के सभी चार विधायकों ने कांग्रेस उम्मीदवार के समर्थन में वोट दिया। उन्होंने कहा कि वे खुद भी वोटिंग का हिस्सा थे और पूरे भरोसे के साथ कह सकते हैं कि पार्टी लाइन से कोई विचलन नहीं हुआ।
कांग्रेस की हार के बाद बढ़ी हलचल
राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद झारखंड की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है। महागठबंधन के भीतर अविश्वास की चर्चा शुरू हो गई है। कांग्रेस की हार को लेकर विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों अलग-अलग दावे कर रहे हैं।
सरयू राय ने दिया नया सियासी फॉर्मूला
चुनाव के बाद जदयू विधायक और पूर्व मंत्री सरयू राय ने भी नया राजनीतिक फॉर्मूला सामने रख दिया। उन्होंने कहा कि अगर झारखंड मुक्ति मोर्चा, आरजेडी, वाम दल और वे खुद साथ आ जाएं तो बिना कांग्रेस और बीजेपी के भी सरकार चल सकती है।
आरजेडी ने क्या दिया जवाब?
सरयू राय के इस प्रस्ताव पर संजय यादव ने कहा कि वे बड़े और अनुभवी नेता हैं, लेकिन आरजेडी वही करेगी जो पार्टी नेतृत्व तय करेगा। उन्होंने साफ किया कि अंतिम फैसला लालू यादव और शीर्ष नेतृत्व का ही होगा।
क्या महागठबंधन में दरार बढ़ेगी?
राज्यसभा चुनाव के बाद जिस तरह से सहयोगी दल एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं, उससे साफ है कि गठबंधन के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है। आने वाले दिनों में यह विवाद और बड़ा रूप ले सकता है।
झारखंड की राजनीति में नया मोड़
इस पूरे घटनाक्रम ने झारखंड की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि कांग्रेस और आरजेडी इस विवाद को कैसे संभालते हैं और क्या इसका असर आगे के चुनावी समीकरणों पर पड़ेगा।
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