By Malay Ojha | Published: 22 June 2026 at 12:50 PM
भोजपुर के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर नया मोड़ ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट के वकील विशाल तिवारी ने इस कथित फर्जी एनकाउंटर की सीबीआई जांच की मांग करते हुए जनहित याचिका दाखिल की है। याचिका में एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और पूरे मामले की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाली स्वतंत्र समिति से कराने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि भरत भूषण तिवारी की मौत सिर्फ एक पुलिस कार्रवाई नहीं बल्कि एक संदिग्ध घटना है, जिसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। याचिका में कहा गया है कि अगर मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच नहीं कराई गई तो लोगों का कानून और न्याय व्यवस्था से भरोसा कमजोर हो सकता है।
‘यह हत्या का मामला हो सकता है’
याचिका में दावा किया गया है कि भरत भूषण तिवारी की मौत को महज पुलिस मुठभेड़ बताकर बंद नहीं किया जा सकता। कई वीडियो और स्थानीय लोगों के बयानों से यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या उन्होंने आत्मसमर्पण के बाद गोली खाई थी। ऐसे में पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है।
मांझी ने एनकाउंटर को बताया सही
दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने इस कार्रवाई का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति पुलिस पर हथियार तानता है तो पुलिस के पास कार्रवाई करने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं बचता।
मांझी ने कहा, “अगर वहां दो पुलिसकर्मी मारे जाते तो क्या वह सही होता? पुलिस पर पिस्टल तानने वाले के खिलाफ कार्रवाई होगी ही।”
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि यदि भरत भूषण तिवारी मानसिक रूप से परेशान थे, तो उनके पास हथियार आया कहां से।
पवन सिंह ने उठाए सवाल
भारतीय जनता पार्टी के विधान पार्षद और भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह ने इस घटना पर दुख जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि भरत भूषण तिवारी गरीब और बाढ़ पीड़ित परिवारों की समस्याओं को उठाने वाले व्यक्ति थे और उनकी मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है।
पवन सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों में सामने आए वीडियो कई सवाल खड़े करते हैं। यदि वीडियो में दिखाई गई परिस्थितियां सही हैं, तो पूरे मामले की पारदर्शी जांच होनी चाहिए ताकि सच जनता के सामने आ सके।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
मामले की शुरुआत 15 जून को हुई, जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ। वीडियो में भरत भूषण तिवारी हाथ में पिस्टल लेकर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते दिखाई दिए।
इसके बाद 17 जून को शाहपुर थाना प्रभारी राजेश मालाकर बिलौटी गांव पहुंचे और भरत तिवारी से बातचीत की। इस दौरान भी उनके हाथ में पिस्टल देखी गई और वह सरकारी व्यवस्था से नाराज नजर आए।
18 जून को हुई पुलिस कार्रवाई
18 जून को पुलिस और विशेष कार्य बल की टीम ने भरत भूषण तिवारी के घर को चारों तरफ से घेर लिया। इसी दौरान वह फेसबुक पर लाइव थे। वायरल वीडियो में दावा किया गया कि उन्होंने अपनी पिस्टल फेंक दी थी और आत्मसमर्पण कर दिया था।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि आत्मसमर्पण के बाद उन्हें गोली मारी गई। घायल हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां बाद में पटना में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
मौत के बाद बढ़ा विवाद
19 जून को भरत भूषण तिवारी का शव गांव पहुंचने के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर शव रखकर प्रदर्शन किया और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच नोकझोंक भी हुई, जिसके बाद हल्का बल प्रयोग करना पड़ा।
तब से यह मामला लगातार राजनीतिक रंग ले रहा है। कई नेता बिलौटी गांव पहुंच चुके हैं और एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद इस पर देशभर की नजरें टिक गई हैं।
फर्जी एनकाउंटर पर कार्रवाई की मांग तेज
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष धनंजय कुमार सिन्हा ने सरकार और पुलिस पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि जांच में यह मुठभेड़ फर्जी साबित होती है तो इसमें शामिल पुलिस अधिकारियों और जवानों पर हत्या का मामला दर्ज किया जाना चाहिए। सिन्हा ने आरोप लगाया कि राज्य में हो रहे लगातार एनकाउंटर को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। साथ ही कहा कि अगर किसी भी स्तर पर जिम्मेदारी तय होती है तो मुख्यमंत्री के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
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