By Malay Ojha | Published: 25 June 2026 at 11:41 AM
भोजपुर में भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने एक बार फिर नया मोड़ ले लिया है। घटना के आठ दिन बाद भोजपुर के पुलिस अधीक्षक खुद भरत तिवारी के घर पहुंचे और परिवार से मुलाकात की। इस दौरान परिजनों ने पुलिस अधीक्षक के सामने सीधा सवाल रखा कि अगर भरत ने आत्मसमर्पण कर दिया था तो उसे गोली क्यों मारी गई। परिवार ने इसे सीधा हत्या का मामला बताया है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग दोहराई है।
पुलिस अधीक्षक के गांव पहुंचते ही माहौल भावुक हो गया। भरत के भाई ने अधिकारियों से पूछा कि जब भरत ने अपना हथियार नीचे रख दिया था, तब पुलिस ने उस पर गोली चलाने की जरूरत क्यों समझी। परिवार का कहना है कि इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए और जो भी जिम्मेदार हैं, उन्हें सजा मिलनी चाहिए।
पुलिस ने निष्पक्ष जांच का दिया भरोसा
परिजनों से बातचीत के दौरान पुलिस अधीक्षक ने भरोसा दिलाया कि पूरे मामले की हर पहलू से जांच की जाएगी। उन्होंने परिवार को सुरक्षा का भी आश्वासन दिया। हालांकि मुलाकात के बाद परिवार ने साफ कहा कि केवल आश्वासन से वे संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि जब तक कार्रवाई नहीं होती, तब तक न्याय अधूरा रहेगा।
17 जून को हुआ था एनकाउंटर
भरत तिवारी का एनकाउंटर 17 जून को हुआ था। उस दिन की घटना के बाद से ही मामला लगातार चर्चा में है। परिवार ने शुरुआत से दावा किया कि यह मुठभेड़ नहीं बल्कि योजनाबद्ध हत्या थी। परिजनों का आरोप है कि पुलिस पहले भी घर आकर धमकी दे चुकी थी।
पढ़ाई पूरी कर नौकरी की तैयारी कर रहा था भरत
भरत की मां आशा देवी का कहना है कि उनका बेटा विज्ञान स्नातक की पढ़ाई पूरी कर चुका था और नौकरी की तैयारी कर रहा था। परिवार के मुताबिक इसी दौरान वह समाजसेवा से जुड़ा और गांव के बाढ़ पीड़ितों के हक में आवाज उठाने लगा। विस्थापित परिवारों के पुनर्वास की मांग को लेकर वह लगातार सक्रिय था।
विस्थापन की लड़ाई बना विवाद की वजह
परिवार का कहना है कि जवैनिया गांव के विस्थापित लोगों को बसाने की मांग को लेकर भरत कई बार अधिकारियों तक पहुंचा, लेकिन उसकी बात नहीं सुनी गई। धीरे-धीरे यह संघर्ष बड़ा होता गया और हालात ऐसे बने कि उसने हथियार उठा लिया। परिवार का दावा है कि इस पूरे विवाद की जड़ यही आंदोलन था।
पुलिसकर्मियों पर दर्ज हो चुका है मामला
इस मामले में संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। अब परिवार केंद्रीय जांच एजेंसी से पूरे मामले की जांच कराने की मांग कर रहा है। भरत की मां ने साफ कहा है कि उन्हें अपने बेटे के लिए न्याय चाहिए और परिवार की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए।
मीडिया के सवालों से बचते दिखे अधिकारी
परिवार से मुलाकात के बाद जब मीडिया ने पुलिस अधीक्षक से इस पूरे मामले और जांच की स्थिति को लेकर सवाल पूछे तो उन्होंने खुलकर जवाब नहीं दिया। इससे कई नए सवाल खड़े हो गए हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच किस दिशा में जाती है और भरत तिवारी के परिवार को कब तक न्याय मिल पाता है।
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