By Malay Ojha | Published: 25 June 2026 at 01:07 PM
उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की नई संगठनात्मक टीम का ऐलान कर दिया गया है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने अपनी नई टीम में कई नए और अहम चेहरों को जगह दी है। इस नई सूची में आठ महामंत्री, 6 क्षेत्रीय अध्यक्ष और 19 उपाध्यक्ष बनाए गए हैं। इसे आने वाले चुनावी समीकरणों और संगठन को मजबूत करने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
नई टीम का गठन ऐसे समय हुआ है जब प्रदेश की राजनीति लगातार गरमाई हुई है। पार्टी नेतृत्व ने साफ संकेत दिया है कि अब संगठन में संतुलन और क्षेत्रीय पकड़ दोनों को प्राथमिकता दी जाएगी। नई नियुक्तियों में सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों का खास ध्यान रखा गया है।
इन नेताओं को बनाया गया महामंत्री
प्रदेश संगठन में जिन आठ नेताओं को महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई है, उनमें राम प्रताप सिंह चौहान, गीता शाक्य, अभिजात मिश्रा, उपेंद्र रावत, संजय सिंह, शंकर लोधी, दिलीप पटेल और राजेश चौधरी शामिल हैं। इन नामों को संगठन के लिए मजबूत और सक्रिय चेहरों के तौर पर देखा जा रहा है।
6 क्षेत्रों में नए अध्यक्षों की तैनाती
पार्टी ने प्रदेश के छह बड़े क्षेत्रों में भी नए अध्यक्ष नियुक्त किए हैं। ब्रज क्षेत्र की जिम्मेदारी पूरन सिंह लोधी को दी गई है। पश्चिम क्षेत्र की कमान नवाब सिंह नागर को मिली है। कानपुर क्षेत्र में रामकिशोर साहू, अवध क्षेत्र में अवधेश द्विवेदी, काशी क्षेत्र में अशोक चौरसिया और गोरखपुर क्षेत्र में विनोद राय को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
उपाध्यक्षों की लंबी सूची में नए चेहरे
प्रदेश अध्यक्ष ने 19 उपाध्यक्षों की भी घोषणा की है। इनमें सुरेश राणा, सत्यपाल सैनी, ब्रज बहादुर, धर्मेंद्र सिंह, मोहित बेनीवाल, देवेश कोरी, प्रियंका रावत, दुर्विजय शाक्य, रमेश सिंह, नीरज सिंह, अर्चना मिश्रा, पूजा पाल, शंकर गिरी, कामेश्वर सिंह, कृतिका अग्रवाल, सुरेश मौर्य, राजेश यादव, कृष्ण बिहारी राय और आलोक गुप्ता को जगह दी गई है।
जातीय और क्षेत्रीय संतुलन पर खास फोकस
नई टीम को देखकर साफ नजर आता है कि पार्टी ने अलग-अलग वर्गों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम आने वाले बड़े चुनावों की तैयारी का हिस्सा है। संगठन में संतुलन बनाकर पार्टी जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है।
चुनावी तैयारी के लिहाज से अहम फैसला
राजनीतिक गलियारों में इस नई टीम को आने वाले चुनावों की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी की कोशिश है कि संगठन के हर स्तर पर सक्रियता बढ़े और बूथ स्तर तक मजबूत पकड़ बनाई जाए।
अब नई टीम के सामने क्या चुनौती
नई टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को और ज्यादा मजबूत करना, कार्यकर्ताओं में तालमेल बनाना और विपक्ष के हमलों का जवाब देना होगा। अब देखना होगा कि इन नई जिम्मेदारियों के साथ पार्टी प्रदेश में अपने राजनीतिक समीकरण को कितना मजबूत कर पाती है।
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