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सरकार ने देशवासियों के भरोसे को तोड़ा : कन्नन गोपीनाथन

By aryavartalive | Published: 18 August 2026 at 06:47 PM

कटिहार: टाउन हॉल में आयोजित ‘यूथ की बात’ कार्यक्रम में युवाओं ने शिक्षा, रोजगार, परीक्षा व्यवस्था और सरकार की जवाबदेही जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। चर्चा के दौरान युवाओं ने कहा कि परीक्षाओं में गड़बड़ी और सवाल उठाने वाले युवाओं के साथ होने वाला व्यवहार उनके भरोसे को कमजोर कर रहा है। पूर्व आईएएस अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता कन्नन गोपीनाथन ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी ने सरकार और युवाओं के बीच भरोसे को चोट पहुंचाई है।

‘यूथ की बात’ कार्यक्रम का मकसद देशभर में युवाओं के बीच चल रही बेचैनी और उनके सवालों को समझना और उनसे सीधा संवाद करना था। कटिहार में आयोजित इस कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया। दर्जनों युवाओं ने शिक्षा व्यवस्था, रोजगार, जवाबदेही और लोकतंत्र से जुड़े सवाल सामने रखे। मंच पर मौजूद वक्ताओं ने भी युवाओं को अपनी बात खुलकर रखने का मौका दिया।

शिक्षा और रोजगार बने चर्चा के केंद्र
कार्यक्रम में युवाओं की सबसे बड़ी चिंता शिक्षा और रोजगार को लेकर दिखाई दी। युवाओं का कहना था कि पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर लगातार पैदा हो रही अनिश्चितता का सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ रहा है। उनका सवाल था कि जब कोई विद्यार्थी वर्षों तक मेहनत करके किसी परीक्षा की तैयारी करता है, तो परीक्षा में गड़बड़ी होने की स्थिति में उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा और उसका नुकसान कौन पूरा करेगा।

कन्नन गोपीनाथन ने भरोसे का सवाल उठाया
पूर्व आईएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथन ने कहा कि देश में सरकार और नागरिकों के बीच एक तरह का भरोसे का समझौता रहा है। उनका कहना था कि युवा पढ़ाई करेंगे, मेहनत करेंगे और परीक्षा में सफल होने की उम्मीद रखेंगे, लेकिन जब परीक्षा की व्यवस्था ही सवालों के घेरे में आ जाए तो यह भरोसा टूटता है। उनके मुताबिक यही वजह है कि आज बड़ी संख्या में युवा सड़कों पर अपनी आवाज उठा रहे हैं।

‘आंदोलन ने सरकार को जवाबदेह बनाया’
कन्नन गोपीनाथन ने युवाओं के आंदोलनों को लेकर कहा कि इसकी बड़ी उपलब्धि यह है कि युवाओं ने सरकार को जवाबदेही के लिए मजबूर किया है। उन्होंने कहा कि युवाओं के बीच पैदा हुई ऊर्जा को केवल विरोध तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे देश और समाज की बेहतरी के लिए इस्तेमाल करने की जरूरत है। उन्होंने स्कूली व्यवस्था को लेकर युवाओं की सक्रियता को सकारात्मक संकेत बताया।

सचिन ने शिक्षा मंत्री के फैसले पर सवाल उठाया
मोहनपुर और मनसाही से आए छात्र सचिन ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था को लेकर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। सचिन का कहना था कि एक जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति से जवाबदेही की उम्मीद की जाती है, लेकिन केवल चेहरे बदलने से व्यवस्था में सुधार नहीं हो सकता। उनके मुताबिक सरकार को शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी बदलाव की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

‘नीट विवाद से लाखों विद्यार्थियों का भरोसा टूटा’
कार्यक्रम में छात्रा प्रियंका ने परीक्षा व्यवस्था को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के बाद लाखों विद्यार्थियों और उनके परिवारों के मन में व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। उनका कहना था कि विद्यार्थी जब अपनी आवाज उठाने के लिए सड़क पर आते हैं और उन्हें दबाने की कोशिश होती है, तो इससे सरकार के प्रति भरोसा और कमजोर होता है।

‘युवा डरेंगे नहीं, सवाल पूछते रहेंगे’
प्रियंका ने कहा कि युवाओं को अपने भविष्य से जुड़े सवाल पूछने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि युवा अब अपने मुद्दों पर चुप रहने वाले नहीं हैं। शिक्षा, रोजगार और परीक्षा व्यवस्था जैसे सवाल सीधे उनके भविष्य से जुड़े हैं। इसलिए वे सरकार से जवाब मांगते रहेंगे। उन्होंने कहा कि युवाओं को डराने या उनकी आवाज दबाने से उनकी चिंताएं खत्म नहीं होंगी।

सबा आफरीन ने परीक्षा व्यवस्था बदलने की मांग की
पटना विश्वविद्यालय की छात्र नेत्री सबा आफरीन ने कहा कि सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने वाले युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उनकी बात सुनी जानी चाहिए। उन्होंने अपने जेल जाने का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार युवाओं की आवाज दबाना चाहती है। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में बिहार की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई।

‘एनटीए को बंद कर विकेंद्रित व्यवस्था हो’
सबा आफरीन ने परीक्षा व्यवस्था में बदलाव की मांग करते हुए कहा कि यदि परीक्षाओं को भरोसेमंद बनाना है तो मौजूदा केंद्रीय परीक्षा व्यवस्था पर फिर से विचार करना होगा। उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को बंद करने और परीक्षा व्यवस्था को विकेंद्रित करने की मांग रखी। उनका कहना था कि परीक्षा व्यवस्था जितनी पारदर्शी और जवाबदेह होगी, विद्यार्थियों का भरोसा उतना ही मजबूत होगा।

कटिहार से उठी युवाओं की आवाज
‘यूथ की बात’ कार्यक्रम में सामने आए सवाल सिर्फ कटिहार तक सीमित नहीं रहे। शिक्षा, रोजगार, परीक्षा में पारदर्शिता और सरकार की जवाबदेही आज देशभर के युवाओं से जुड़े बड़े मुद्दे हैं। कार्यक्रम में मौजूद युवाओं ने जिस तरह अपनी बात रखी, उससे साफ है कि नई पीढ़ी अपने भविष्य से जुड़े फैसलों में जवाबदेही चाहती है। वक्ताओं ने भी युवाओं के इस संवाद को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का जरूरी हिस्सा बताया।

संवाद से आंदोलन तक की नई तस्वीर
कटिहार के इस कार्यक्रम की खास बात यह रही कि यहां केवल भाषण नहीं हुए, बल्कि युवाओं को अपनी बात रखने का मंच दिया गया। शिक्षा और रोजगार जैसे सवालों के साथ लोकतंत्र और जवाबदेही पर भी चर्चा हुई। कन्नन गोपीनाथन, सबा आफरीन और कामायनी स्वामी की मौजूदगी में युवाओं ने अपनी चिंताओं को सामने रखा। कार्यक्रम से यह संदेश निकला कि युवा केवल अपने लिए अवसर नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था भी चाहते हैं जिसमें उनकी मेहनत और भविष्य के साथ भरोसे का रिश्ता कायम रहे।

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सरकार ने देशवासियों के भरोसे को तोड़ा : कन्नन गोपीनाथन

By aryavartalive | Published: 18 August 2026 at 06:47 PM

कटिहार: टाउन हॉल में आयोजित ‘यूथ की बात’ कार्यक्रम में युवाओं ने शिक्षा, रोजगार, परीक्षा व्यवस्था और सरकार की जवाबदेही जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। चर्चा के दौरान युवाओं ने कहा कि परीक्षाओं में गड़बड़ी और सवाल उठाने वाले युवाओं के साथ होने वाला व्यवहार उनके भरोसे को कमजोर कर रहा है। पूर्व आईएएस अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता कन्नन गोपीनाथन ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी ने सरकार और युवाओं के बीच भरोसे को चोट पहुंचाई है।

‘यूथ की बात’ कार्यक्रम का मकसद देशभर में युवाओं के बीच चल रही बेचैनी और उनके सवालों को समझना और उनसे सीधा संवाद करना था। कटिहार में आयोजित इस कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया। दर्जनों युवाओं ने शिक्षा व्यवस्था, रोजगार, जवाबदेही और लोकतंत्र से जुड़े सवाल सामने रखे। मंच पर मौजूद वक्ताओं ने भी युवाओं को अपनी बात खुलकर रखने का मौका दिया।

शिक्षा और रोजगार बने चर्चा के केंद्र
कार्यक्रम में युवाओं की सबसे बड़ी चिंता शिक्षा और रोजगार को लेकर दिखाई दी। युवाओं का कहना था कि पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर लगातार पैदा हो रही अनिश्चितता का सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ रहा है। उनका सवाल था कि जब कोई विद्यार्थी वर्षों तक मेहनत करके किसी परीक्षा की तैयारी करता है, तो परीक्षा में गड़बड़ी होने की स्थिति में उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा और उसका नुकसान कौन पूरा करेगा।

कन्नन गोपीनाथन ने भरोसे का सवाल उठाया
पूर्व आईएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथन ने कहा कि देश में सरकार और नागरिकों के बीच एक तरह का भरोसे का समझौता रहा है। उनका कहना था कि युवा पढ़ाई करेंगे, मेहनत करेंगे और परीक्षा में सफल होने की उम्मीद रखेंगे, लेकिन जब परीक्षा की व्यवस्था ही सवालों के घेरे में आ जाए तो यह भरोसा टूटता है। उनके मुताबिक यही वजह है कि आज बड़ी संख्या में युवा सड़कों पर अपनी आवाज उठा रहे हैं।

‘आंदोलन ने सरकार को जवाबदेह बनाया’
कन्नन गोपीनाथन ने युवाओं के आंदोलनों को लेकर कहा कि इसकी बड़ी उपलब्धि यह है कि युवाओं ने सरकार को जवाबदेही के लिए मजबूर किया है। उन्होंने कहा कि युवाओं के बीच पैदा हुई ऊर्जा को केवल विरोध तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे देश और समाज की बेहतरी के लिए इस्तेमाल करने की जरूरत है। उन्होंने स्कूली व्यवस्था को लेकर युवाओं की सक्रियता को सकारात्मक संकेत बताया।

सचिन ने शिक्षा मंत्री के फैसले पर सवाल उठाया
मोहनपुर और मनसाही से आए छात्र सचिन ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था को लेकर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। सचिन का कहना था कि एक जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति से जवाबदेही की उम्मीद की जाती है, लेकिन केवल चेहरे बदलने से व्यवस्था में सुधार नहीं हो सकता। उनके मुताबिक सरकार को शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी बदलाव की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

‘नीट विवाद से लाखों विद्यार्थियों का भरोसा टूटा’
कार्यक्रम में छात्रा प्रियंका ने परीक्षा व्यवस्था को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के बाद लाखों विद्यार्थियों और उनके परिवारों के मन में व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। उनका कहना था कि विद्यार्थी जब अपनी आवाज उठाने के लिए सड़क पर आते हैं और उन्हें दबाने की कोशिश होती है, तो इससे सरकार के प्रति भरोसा और कमजोर होता है।

‘युवा डरेंगे नहीं, सवाल पूछते रहेंगे’
प्रियंका ने कहा कि युवाओं को अपने भविष्य से जुड़े सवाल पूछने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि युवा अब अपने मुद्दों पर चुप रहने वाले नहीं हैं। शिक्षा, रोजगार और परीक्षा व्यवस्था जैसे सवाल सीधे उनके भविष्य से जुड़े हैं। इसलिए वे सरकार से जवाब मांगते रहेंगे। उन्होंने कहा कि युवाओं को डराने या उनकी आवाज दबाने से उनकी चिंताएं खत्म नहीं होंगी।

सबा आफरीन ने परीक्षा व्यवस्था बदलने की मांग की
पटना विश्वविद्यालय की छात्र नेत्री सबा आफरीन ने कहा कि सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने वाले युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उनकी बात सुनी जानी चाहिए। उन्होंने अपने जेल जाने का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार युवाओं की आवाज दबाना चाहती है। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में बिहार की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई।

‘एनटीए को बंद कर विकेंद्रित व्यवस्था हो’
सबा आफरीन ने परीक्षा व्यवस्था में बदलाव की मांग करते हुए कहा कि यदि परीक्षाओं को भरोसेमंद बनाना है तो मौजूदा केंद्रीय परीक्षा व्यवस्था पर फिर से विचार करना होगा। उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को बंद करने और परीक्षा व्यवस्था को विकेंद्रित करने की मांग रखी। उनका कहना था कि परीक्षा व्यवस्था जितनी पारदर्शी और जवाबदेह होगी, विद्यार्थियों का भरोसा उतना ही मजबूत होगा।

कटिहार से उठी युवाओं की आवाज
‘यूथ की बात’ कार्यक्रम में सामने आए सवाल सिर्फ कटिहार तक सीमित नहीं रहे। शिक्षा, रोजगार, परीक्षा में पारदर्शिता और सरकार की जवाबदेही आज देशभर के युवाओं से जुड़े बड़े मुद्दे हैं। कार्यक्रम में मौजूद युवाओं ने जिस तरह अपनी बात रखी, उससे साफ है कि नई पीढ़ी अपने भविष्य से जुड़े फैसलों में जवाबदेही चाहती है। वक्ताओं ने भी युवाओं के इस संवाद को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का जरूरी हिस्सा बताया।

संवाद से आंदोलन तक की नई तस्वीर
कटिहार के इस कार्यक्रम की खास बात यह रही कि यहां केवल भाषण नहीं हुए, बल्कि युवाओं को अपनी बात रखने का मंच दिया गया। शिक्षा और रोजगार जैसे सवालों के साथ लोकतंत्र और जवाबदेही पर भी चर्चा हुई। कन्नन गोपीनाथन, सबा आफरीन और कामायनी स्वामी की मौजूदगी में युवाओं ने अपनी चिंताओं को सामने रखा। कार्यक्रम से यह संदेश निकला कि युवा केवल अपने लिए अवसर नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था भी चाहते हैं जिसमें उनकी मेहनत और भविष्य के साथ भरोसे का रिश्ता कायम रहे।

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