By Malay Ojha | Published: 25 June 2026 at 09:29 PM
अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के मामले ने बड़ा मोड़ ले लिया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत और विशेष जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर गुरुवार को एफआईआर दर्ज कर ली गई। मामले में आठ लोगों को नामजद किया गया है, जबकि दो आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़ी कार्रवाई हो सकती है।
मामले में लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा को गिरफ्तार किया गया है। दोनों मंदिर परिसर में चढ़ावे के रूप में आने वाले नोटों की गिनती से जुड़े कार्य में लगे थे। इसके अलावा अविनाश त्रिपाठी, करुणेश पांडे, सुभाष चंद्र और मनीष यादव को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। जांच एजेंसियां इन सभी की भूमिका खंगाल रही हैं।
आठ लोगों के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर
पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष, करुणेश और लवकुश मिश्रा को नामजद किया गया है। शिकायतकर्ता श्री कृष्ण मोहन की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी और जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।
गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ मामला
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। इनमें आपराधिक साजिश, चोरी, विश्वासघात और चोरी की संपत्ति से जुड़े आरोप शामिल हैं। जांच अधिकारियों का कहना है कि आरोप सिद्ध होने की स्थिति में दोषियों को कठोर सजा का सामना करना पड़ सकता है।
क्या कहती है आपराधिक साजिश वाली धारा?
भारतीय न्याय संहिता की धारा 61 आपराधिक साजिश से संबंधित है। यदि दो या उससे अधिक व्यक्ति मिलकर किसी गैरकानूनी कार्य को अंजाम देने की योजना बनाते हैं तो यह धारा लागू होती है। यदि साजिश किसी गंभीर अपराध से जुड़ी हो तो दोषियों को उसी अपराध के मुख्य आरोपी के समान सजा मिल सकती है।
ट्रस्ट की शिकायत के बाद बढ़ी जांच
सूत्रों के अनुसार, मंदिर चढ़ावे से जुड़े लेन-देन और नकदी प्रबंधन को लेकर कुछ समय से जांच चल रही थी। विशेष जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में कई बिंदुओं पर संदेह जताया था। इसके बाद ट्रस्ट की ओर से औपचारिक शिकायत दी गई, जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज करने का निर्णय लिया गया।
राजनीतिक बयानबाजी भी हुई तेज
मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी देखने को मिली है। विश्व हिंदू परिषद के प्रमुख आलोक कुमार ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अखिलेश यादव ने उठाए थे सवाल
यह मामला सबसे पहले सात जून को व्यापक चर्चा में आया था, जब समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान की राशि में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया था। उन्होंने अदालत से भी मामले का संज्ञान लेने की मांग की थी। इसके बाद यह मुद्दा लगातार राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बना रहा।
आगे क्या?
एफआईआर दर्ज होने और शुरुआती गिरफ्तारियों के बाद अब जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। जांच एजेंसियां वित्तीय रिकॉर्ड, नकदी प्रबंधन व्यवस्था और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई और लोगों से पूछताछ हो सकती है और नए खुलासे सामने आ सकते हैं।
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