By Malay Ojha | Published: 04 October 2026 at 04:20 PM
वाराणसी की सड़कों पर जब कोई हादसा होता है और कोई घायल मदद के इंतजार में होता है, तो अमन यादव का नाम उन लोगों में शामिल है जो बिना देर किए मौके पर पहुंचने की कोशिश करते हैं। मौसम कैसा भी हो, अमन अपनी बाइक पर फर्स्ट एड किट लेकर जरूरतमंदों तक पहुंचते हैं और प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें अस्पताल पहुंचाने में मदद करते हैं।
हादसे की खबर मिलते ही निकल पड़ते हैं अमन
अमन के मुताबिक, कई बार सड़क हादसों में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने से पहले तत्काल प्राथमिक उपचार की जरूरत होती है। इसी सोच के साथ वह अपनी बाइक पर जरूरी दवाएं, मरहम-पट्टी और फर्स्ट एड का सामान लेकर चलते हैं। अब तक वह सड़क हादसों में घायल कई लोगों को प्राथमिक उपचार देने के साथ अस्पताल पहुंचाने में मदद कर चुके हैं।
गुमशुदा लोगों को परिवार से मिलाने की कोशिश
अमन की सेवा सिर्फ सड़क हादसों तक सीमित नहीं है। वह भटके या गुम हुए लोगों को उनके परिवार तक पहुंचाने में भी मदद करते हैं। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर संपर्क करने के साथ सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल किया जाता है। अमन का दावा है कि अब तक 16 राज्यों से जुड़े लोगों को उनके परिजनों तक पहुंचाने में उन्होंने मदद की है।
लावारिस शवों के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी
जिन लोगों का अंतिम संस्कार करने वाला कोई नहीं होता, उनके लिए भी अमन आगे आते हैं। वाराणसी के घाटों पर वह कई लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करा चुके हैं। उनका कहना है कि जिनका कोई नहीं होता, उनके लिए वह बेटे की तरह अपना फर्ज निभाने की कोशिश करते हैं।
एक घटना ने बदल दी जिंदगी की दिशा
अमन बताते हैं कि एक बार एक महिला अकेलेपन से परेशान होकर अपनी जान देने की कोशिश कर रही थी। परिवार के ज्यादातर सदस्य विदेश में रहते थे और अकेलेपन की वजह से वह बेहद परेशान थी। अमन ने उसकी जान बचाने के बाद कई दिनों तक उसकी देखभाल की। अमन के मुताबिक, इसी घटना ने उन्हें लोगों की मदद के लिए लगातार काम करने की प्रेरणा दी।
अस्पताल की हालत देखकर लिया संकल्प
अमन बताते हैं कि उस दौर में अस्पतालों की व्यवस्था देखकर वह काफी परेशान हुए थे। मरीजों की हालत ने उन्हें इस दिशा में कुछ करने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने डॉक्टरों, अधिकारियों और मंत्रियों को पत्र लिखकर लोगों की परेशानियों और अस्पतालों की व्यवस्था से जुड़े मुद्दे उठाने शुरू किए।
2015 में मिली बाइक, बढ़ा मदद का दायरा
लोगों के सुझाव पर अमन ने फर्स्ट एड से जुड़ी जरूरी चीजें अपने साथ रखना शुरू किया। साल 2015 में शहर के एक व्यापारी ने उन्हें बाइक दी। इसके बाद वह कम समय में जरूरतमंदों तक पहुंचने लगे। उनकी बाइक में प्राथमिक उपचार का जरूरी सामान हमेशा मौजूद रहता है।
अब कई युवा भी जुड़े
अमन के काम से प्रभावित होकर कई युवा भी उनके साथ जुड़े। अमन उन्हें जरूरी प्रशिक्षण देकर जरूरतमंदों की मदद के लिए तैयार करते हैं। उनका कहना है कि अब लोगों में भी जागरूकता बढ़ी है और सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने के लिए लोग आगे आने लगे हैं। वह इसे अपनी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानते हैं।
इलाज के लिए आर्थिक मदद भी जुटाते हैं
शुरुआत में अमन अपनी जेब से लोगों की मदद करते थे। लेकिन काम का दायरा बढ़ने के बाद यह अकेले संभव नहीं रहा। अब लोग भी आर्थिक सहयोग करते हैं। अमन बताते हैं कि कई गंभीर रूप से घायल और जरूरतमंद लोगों के इलाज के लिए उन्होंने लोगों से मदद जुटाकर व्यवस्था कराई है।
सेवा को ही अपना मकसद मानते हैं
अमन के लिए यह काम किसी एक दिन या एक घटना तक सीमित नहीं है। सड़क पर घायल व्यक्ति से लेकर अपने परिवार से बिछड़े इंसान और लावारिस शव तक, वह जरूरत के समय मदद करने की कोशिश करते हैं। यही वजह है कि वाराणसी में उनकी पहचान ऐसे व्यक्ति के तौर पर बनी है, जिसे मदद के लिए लोग फोन कर सकते हैं। 
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