By Malay Ojha | Published: 05 June 2026 at 10:05 AM
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को 54 वर्ष के हो गए। गोरक्षपीठ के महंत से लेकर देश के सबसे प्रभावशाली मुख्यमंत्रियों में अपनी पहचान बनाने तक उनका सफर लगातार चर्चा में रहा है। सात बार सांसद और दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके योगी आदित्यनाथ आज भारतीय जनता पार्टी के सबसे बड़े जनाधार वाले नेताओं में गिने जाते हैं। उनके जन्मदिन के मौके पर उनके राजनीतिक और सामाजिक सफर की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है।
योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक कद केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहा है। बीते वर्षों में उन्होंने कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक फैसलों के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई। इसी वजह से वे पार्टी के प्रमुख स्टार प्रचारकों में शामिल हुए और राष्ट्रीय राजनीति में भी उनकी भूमिका लगातार मजबूत होती गई।
दूसरी बार सरकार बनाकर बनाया रिकॉर्ड
पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद वर्ष 2022 में उन्होंने लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई। यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश की राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। गोरखपुर शहर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर वे पहली बार विधायक बने और फिर मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली।
अजय सिंह बिष्ट से योगी आदित्यनाथ बनने की कहानी
योगी आदित्यनाथ का जन्म 5 जून 1972 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के पंचूर गांव में हुआ था। उनका मूल नाम अजय सिंह बिष्ट है। सात भाई-बहनों वाले परिवार में उनका पांचवां स्थान है। शुरुआती शिक्षा के बाद उन्होंने श्रीनगर स्थित गढ़वाल विश्वविद्यालय से गणित विषय में स्नातक की पढ़ाई की।
गोरक्षपीठ ने दी नई पहचान
उच्च शिक्षा के दौरान उनका संपर्क गोरखनाथ मंदिर से हुआ। वर्ष 1994 में उन्होंने गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ से दीक्षा ग्रहण की और सन्यास का मार्ग चुना। इसी के साथ अजय सिंह बिष्ट का नाम बदलकर योगी आदित्यनाथ हो गया।
सबसे कम उम्र के सांसदों में रहे शामिल
सन्यास ग्रहण करने के कुछ वर्षों बाद ही योगी आदित्यनाथ को राजनीतिक जिम्मेदारी मिली। वर्ष 1998 में महंत अवेद्यनाथ ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित करते हुए लोकसभा चुनाव का उम्मीदवार बनाया। मात्र 26 वर्ष की उम्र में उन्होंने चुनाव जीतकर संसद पहुंचने का रिकॉर्ड बनाया।
पांच बार सांसद बनकर बढ़ाई राजनीतिक ताकत
गोरखपुर संसदीय क्षेत्र से योगी आदित्यनाथ ने लगातार वर्ष 1998, 1999, 2004, 2009 और 2014 में जीत दर्ज की। लगातार पांच बार सांसद बनने के बाद उनका प्रभाव केवल पूर्वांचल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी पहचान मजबूत हुई।
विवादों के बीच भी बढ़ता रहा जनाधार
राजनीतिक जीवन के दौरान योगी आदित्यनाथ कई विवादों में भी रहे। उन पर सांप्रदायिक बयानबाजी और आक्रामक राजनीति के आरोप लगते रहे। कुछ मामलों में उन्हें कानूनी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने राजनीतिक अभियान और जनसंपर्क को लगातार जारी रखा।
हिंदुत्व की राजनीति का प्रमुख चेहरा
पूर्वी उत्तर प्रदेश में संगठन को मजबूत करने के लिए उन्होंने विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसी दौरान उनकी पहचान हिंदुत्व की राजनीति के प्रमुख चेहरे के रूप में बनी।
2017 में संभाली उत्तर प्रदेश की कमान
वर्ष 2017 में भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल की। इसके बाद 19 मार्च 2017 को योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। मुख्यमंत्री बनने के बाद कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर उनकी सरकार लगातार चर्चा में रही।
विकास और कानून-व्यवस्था पर रहा फोकस
मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने सड़क, बिजली, निवेश, धार्मिक पर्यटन और औद्योगिक परियोजनाओं को प्राथमिकता दी। इसी दौरान माफिया और अपराधियों के खिलाफ चलाए गए अभियानों ने उन्हें ‘बुलडोजर बाबा’ की पहचान भी दिलाई।
दूसरी पारी में और मजबूत हुई पकड़
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में उनकी अगुवाई में भारतीय जनता पार्टी ने दोबारा सत्ता हासिल की। इसके बाद से योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक कद और बढ़ा है। पार्टी के भीतर और बाहर उन्हें एक मजबूत प्रशासक के रूप में देखा जाता है।
भविष्य की राजनीति पर भी बनी रहती है चर्चा
आज योगी आदित्यनाथ केवल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भर नहीं हैं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में भी गिने जाते हैं। उनके समर्थक उन्हें विकास और हिंदुत्व की राजनीति का बड़ा चेहरा मानते हैं। यही वजह है कि उनके भविष्य की भूमिका को लेकर राष्ट्रीय राजनीति में लगातार चर्चा होती रहती है।

