By Malay Ojha | Published: 03 June 2026 at 09:09 AM
वाराणसी में मंगलवार की रात उस समय हलचल मच गई जब प्रशासन और रेलवे की संयुक्त टीम भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच काशी रेलवे स्टेशन के आसपास पहुंची। कुछ ही देर में क्षेत्र में मौजूद कई चिन्हित निर्माणों पर ध्वस्तीकरण अभियान शुरू कर दिया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार पूरी कार्रवाई इतनी तेजी से हुई कि अधिकांश लोगों को इसकी जानकारी तब मिली जब बुलडोजर मौके पर पहुंच चुके थे।
कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में बदल दिया गया था। पुलिस बल, पीएसी और रेलवे सुरक्षा बल के जवान बड़ी संख्या में तैनात रहे। आसपास के मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी गई और आम लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई। अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति को रोकना बताया गया।
सबसे पहले हटाया गया धार्मिक स्थल
सूत्रों के मुताबिक राजघाट पुलिस चौकी के पास रेलवे भूमि पर बने एक हनुमान मंदिर को सबसे पहले हटाया गया। इसके बाद अजगैब शहीद मजार क्षेत्र और उससे जुड़े अन्य निर्माणों पर कार्रवाई आगे बढ़ाई गई। प्रशासन ने पहले से चिन्हित ढांचों को हटाने की प्रक्रिया एक के बाद एक पूरी की।
वर्षों पुराने विवाद से जुड़ा मामला
जिस क्षेत्र में कार्रवाई हुई, वहां भूमि स्वामित्व को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। रेलवे का दावा रहा है कि संबंधित जमीन उसके अधिकार क्षेत्र में आती है, जबकि कुछ स्थानीय पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए जाते रहे हैं। यही वजह रही कि यह इलाका लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ था।
मीडिया की पहुंच भी सीमित रही
ध्वस्तीकरण के दौरान सुरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी रखी गई कि मीडिया प्रतिनिधियों को भी कार्रवाई स्थल तक पहुंचने की अनुमति नहीं दी गई। अधिकारियों की ओर से तत्काल कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया, जिससे कार्रवाई को लेकर लोगों के बीच कई तरह की चर्चाएं होती रहीं।
आखिर क्यों जरूरी बनी यह कार्रवाई?
जानकारी के अनुसार काशी रेलवे स्टेशन को एक बड़े मल्टी मॉडल परिवहन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए करीब 47 एकड़ से अधिक क्षेत्र में विकास कार्य प्रस्तावित है। इसके तहत स्टेशन परिसर और आसपास की भूमि को नए स्वरूप में तैयार किया जाना है।
बदलेगा काशी रेलवे स्टेशन का पूरा स्वरूप
करीब 336 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना के तहत स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। यात्रियों को बेहतर प्रतीक्षालय, अत्याधुनिक टिकट व्यवस्था, भोजन सुविधाएं, विश्राम कक्ष और सुगम आवागमन जैसी सेवाएं उपलब्ध कराने की तैयारी है। परियोजना का लक्ष्य स्टेशन को आधुनिक परिवहन केंद्र के रूप में विकसित करना है।
रेल, सड़क और जल मार्ग का होगा संगम
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि रेल सेवा के साथ सड़क और जल परिवहन को भी एक-दूसरे से जोड़ा जाएगा। गंगा तट के निकट होने का लाभ उठाते हुए स्टेशन को घाट क्षेत्रों से जल मार्ग के जरिए जोड़ने की योजना बनाई गई है। इससे यात्रियों को एक ही स्थान से कई परिवहन सुविधाएं मिल सकेंगी।
पर्यटन और यातायात को मिलेगा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजना पूरी होने के बाद शहर में यातायात का दबाव कम हो सकता है। साथ ही देश और विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं तथा पर्यटकों को भी अधिक सुविधाजनक यात्रा व्यवस्था मिलेगी। प्रशासन का दावा है कि इससे वाराणसी की परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
अब आगे किस बात पर रहेगी नजर?
फिलहाल लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि परियोजना के अगले चरण में किन क्षेत्रों में विकास कार्य आगे बढ़ाया जाएगा। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि ध्वस्तीकरण को लेकर प्रभावित पक्षों की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है। लेकिन इतना तय है कि काशी रेलवे स्टेशन के आसपास शुरू हुआ यह अभियान आने वाले समय में शहर के नक्शे को काफी हद तक बदल सकता है।
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