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राबड़ी देवी के बंगले पर छिड़ी सियासी जंग, तेज प्रताप ने कर दी ऐसी भविष्यवाणी कि मच गया नया बवाल!

By Malay Ojha | Published: 03 June 2026 at 08:36 AM

पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को सरकारी आवास खाली करने के नोटिस के बाद बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। मामला अब सिर्फ एक सरकारी बंगले तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के हालिया बयान के बाद राष्ट्रीय जनता दल और उसके नेताओं ने सरकार पर तीखे सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

विवाद उस समय और गहरा गया जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि सरकारी आवास किसी की निजी संपत्ति नहीं होता और पद छोड़ने के बाद उसे खाली करना ही पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में किसी को विशेष अधिकार नहीं मिल सकते और सरकारी संसाधनों का उपयोग नियमों के अनुसार होना चाहिए। मुख्यमंत्री के इस बयान को विपक्ष ने सीधे तौर पर राबड़ी देवी से जोड़कर देखा।

तेज प्रताप यादव ने किया तीखा पलटवार
मुख्यमंत्री की टिप्पणी के बाद राबड़ी देवी के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेज प्रताप यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को अपनी भाषा पर नियंत्रण रखना चाहिए क्योंकि वह राज्य के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठे हैं। उनके अनुसार जिस पद पर कोई व्यक्ति बैठता है, उसकी गरिमा और मर्यादा का सम्मान करना जरूरी होता है।

‘कुर्सी का सम्मान करें’ बोले तेज प्रताप
तेज प्रताप यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कहे जा सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस कुर्सी पर बैठकर पूरे प्रदेश का नेतृत्व किया जाता है, उस पद की गरिमा बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत टिप्पणियों की जगह नीति और नियमों की बात होनी चाहिए।

आठ-नौ महीने में कुर्सी छोड़ने का दावा
राजनीतिक बयानबाजी के बीच तेज प्रताप यादव ने एक बड़ा दावा भी कर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले आठ से नौ महीनों के भीतर सम्राट चौधरी स्वयं मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लिए मजबूर हो सकते हैं। उन्होंने इसे अपनी राजनीतिक भविष्यवाणी बताते हुए कहा कि जनता सब देख रही है और समय आने पर जवाब भी देगी।

विपक्ष ने उठाए दोहरे मापदंड के सवाल
तेज प्रताप यादव ने सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि यदि सरकारी आवास खाली कराने का नियम लागू किया जा रहा है तो यह सभी पूर्व पदाधिकारियों और नेताओं पर समान रूप से लागू होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि अन्य कई नेताओं के सरकारी आवासों को लेकर ऐसी सख्ती क्यों नहीं दिखाई जा रही है।

मुख्यमंत्री आवास को लेकर भी उठाए सवाल
उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री आवास परिसर में हुए बदलावों और विस्तार को लेकर भी सरकार को जवाब देना चाहिए। तेज प्रताप के अनुसार यदि नियम और कानून की बात हो रही है तो सभी मामलों की समान रूप से समीक्षा होनी चाहिए। केवल चुनिंदा व्यक्तियों को निशाना बनाना उचित नहीं माना जा सकता।

राबड़ी देवी की वर्तमान भूमिका का हवाला
तेज प्रताप यादव ने कहा कि उनकी मां आज भी सक्रिय राजनीति में हैं और सदन की सदस्य हैं। ऐसे में उनके आवास को लेकर जिस तरह की कार्रवाई की जा रही है, वह कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने दावा किया कि सरकार को पहले स्पष्ट करना चाहिए कि समान परिस्थितियों वाले अन्य नेताओं के मामलों में क्या कदम उठाए गए हैं।

बंगले से आगे बढ़ी राजनीतिक लड़ाई
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद अब सिर्फ एक सरकारी बंगले तक सीमित नहीं है। आगामी चुनावी माहौल को देखते हुए दोनों पक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक गर्मा सकता है, क्योंकि बयानबाजी का दौर लगातार तेज होता दिखाई दे रहा है।

बिहार की राजनीति में बढ़ सकता है टकराव
सरकारी आवास को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रदेश की बड़ी राजनीतिक बहस बन चुका है। एक तरफ सरकार नियमों का हवाला दे रही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।

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राबड़ी देवी के बंगले पर छिड़ी सियासी जंग, तेज प्रताप ने कर दी ऐसी भविष्यवाणी कि मच गया नया बवाल!

By Malay Ojha | Published: 03 June 2026 at 08:36 AM

पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को सरकारी आवास खाली करने के नोटिस के बाद बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। मामला अब सिर्फ एक सरकारी बंगले तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के हालिया बयान के बाद राष्ट्रीय जनता दल और उसके नेताओं ने सरकार पर तीखे सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

विवाद उस समय और गहरा गया जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि सरकारी आवास किसी की निजी संपत्ति नहीं होता और पद छोड़ने के बाद उसे खाली करना ही पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में किसी को विशेष अधिकार नहीं मिल सकते और सरकारी संसाधनों का उपयोग नियमों के अनुसार होना चाहिए। मुख्यमंत्री के इस बयान को विपक्ष ने सीधे तौर पर राबड़ी देवी से जोड़कर देखा।

तेज प्रताप यादव ने किया तीखा पलटवार
मुख्यमंत्री की टिप्पणी के बाद राबड़ी देवी के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेज प्रताप यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को अपनी भाषा पर नियंत्रण रखना चाहिए क्योंकि वह राज्य के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठे हैं। उनके अनुसार जिस पद पर कोई व्यक्ति बैठता है, उसकी गरिमा और मर्यादा का सम्मान करना जरूरी होता है।

‘कुर्सी का सम्मान करें’ बोले तेज प्रताप
तेज प्रताप यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कहे जा सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस कुर्सी पर बैठकर पूरे प्रदेश का नेतृत्व किया जाता है, उस पद की गरिमा बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत टिप्पणियों की जगह नीति और नियमों की बात होनी चाहिए।

आठ-नौ महीने में कुर्सी छोड़ने का दावा
राजनीतिक बयानबाजी के बीच तेज प्रताप यादव ने एक बड़ा दावा भी कर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले आठ से नौ महीनों के भीतर सम्राट चौधरी स्वयं मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लिए मजबूर हो सकते हैं। उन्होंने इसे अपनी राजनीतिक भविष्यवाणी बताते हुए कहा कि जनता सब देख रही है और समय आने पर जवाब भी देगी।

विपक्ष ने उठाए दोहरे मापदंड के सवाल
तेज प्रताप यादव ने सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि यदि सरकारी आवास खाली कराने का नियम लागू किया जा रहा है तो यह सभी पूर्व पदाधिकारियों और नेताओं पर समान रूप से लागू होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि अन्य कई नेताओं के सरकारी आवासों को लेकर ऐसी सख्ती क्यों नहीं दिखाई जा रही है।

मुख्यमंत्री आवास को लेकर भी उठाए सवाल
उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री आवास परिसर में हुए बदलावों और विस्तार को लेकर भी सरकार को जवाब देना चाहिए। तेज प्रताप के अनुसार यदि नियम और कानून की बात हो रही है तो सभी मामलों की समान रूप से समीक्षा होनी चाहिए। केवल चुनिंदा व्यक्तियों को निशाना बनाना उचित नहीं माना जा सकता।

राबड़ी देवी की वर्तमान भूमिका का हवाला
तेज प्रताप यादव ने कहा कि उनकी मां आज भी सक्रिय राजनीति में हैं और सदन की सदस्य हैं। ऐसे में उनके आवास को लेकर जिस तरह की कार्रवाई की जा रही है, वह कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने दावा किया कि सरकार को पहले स्पष्ट करना चाहिए कि समान परिस्थितियों वाले अन्य नेताओं के मामलों में क्या कदम उठाए गए हैं।

बंगले से आगे बढ़ी राजनीतिक लड़ाई
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद अब सिर्फ एक सरकारी बंगले तक सीमित नहीं है। आगामी चुनावी माहौल को देखते हुए दोनों पक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक गर्मा सकता है, क्योंकि बयानबाजी का दौर लगातार तेज होता दिखाई दे रहा है।

बिहार की राजनीति में बढ़ सकता है टकराव
सरकारी आवास को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रदेश की बड़ी राजनीतिक बहस बन चुका है। एक तरफ सरकार नियमों का हवाला दे रही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।

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