By Malay Ojha | Published: 04 June 2026 at 08:53 AM
मुजफ्फरपुर शहर में गुरुवार तड़के हुए एक दर्दनाक हादसे ने निजी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र स्थित प्रसाद अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर बने गहन चिकित्सा कक्ष में अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। हादसे के बाद पीड़ित परिवारों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि आग लगते ही अस्पताल के कई कर्मचारी मरीजों को उनके हाल पर छोड़कर वहां से निकल गए, जिससे हालात और भयावह हो गए।
घटना के बाद अस्पताल परिसर में मौजूद परिजनों का गुस्सा साफ दिखाई दिया। कई लोगों ने आरोप लगाया कि जब गहन चिकित्सा कक्ष में धुआं भरने लगा, तब मरीजों को बाहर निकालने की कोई समुचित व्यवस्था नहीं की गई। एक परिवार ने दावा किया कि उनके पिता की इस हादसे में जान चली गई, लेकिन घंटों बाद भी उन्हें शव नहीं सौंपा गया। इस आरोप के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं।
तड़के लगी आग, धुएं से मची अफरा-तफरी
जानकारी के अनुसार सुबह करीब तीन बजे अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर अचानक आग भड़क उठी। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट को आग लगने की संभावित वजह माना जा रहा है। आग के साथ ही पूरे वार्ड में तेजी से धुआं फैल गया। कई मरीज गंभीर हालत में भर्ती थे और वे खुद बाहर निकलने की स्थिति में नहीं थे। ऐसे में धुएं ने स्थिति को और खतरनाक बना दिया।
बंद गेट ने बढ़ाई मुश्किलें
हादसे के दौरान मौजूद लोगों का कहना है कि गहन चिकित्सा कक्ष का मुख्य प्रवेश द्वार बंद था। परिजनों ने जिला प्रशासन के सामने शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि यदि निकास मार्ग खुला होता तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी। धुएं के कारण लोगों का दम घुटने लगा और राहत कार्य शुरू होने तक हालात बेहद चिंताजनक बने रहे।
जांच में सामने आई बड़ी लापरवाही
जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने घटना के बाद अस्पताल की व्यवस्था की जांच कराई। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि जिस वार्ड में तेरह बिस्तरों की अनुमति थी, वहां पंद्रह मरीज भर्ती किए गए थे। क्षमता से अधिक मरीजों को रखने को प्रशासन ने गंभीर लापरवाही माना है। अधिकारियों का कहना है कि इस बिंदु की भी विस्तृत जांच की जाएगी।
तीन मरीजों की मौत, कई का इलाज जारी
प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक हादसे में अब तक तीन मरीजों की मौत हो चुकी है। इनमें कुछ की मौत दम घुटने से हुई जबकि कुछ आग और धुएं की चपेट में आ गए। वहीं कई अन्य मरीजों को आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। गहन चिकित्सा कक्ष के प्रभारी भी आग की चपेट में आकर झुलस गए, जिनका इलाज चल रहा है।
फायर सेफ्टी सिस्टम पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों और पीड़ित परिवारों का कहना है कि अस्पताल में लगी अग्निशमन व्यवस्था केवल दिखावे तक सीमित थी। आरोप है कि जरूरत पड़ने पर सुरक्षा उपकरणों ने काम नहीं किया। यदि अग्निशमन व्यवस्था समय पर सक्रिय होती तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था। अब लोग यह जानना चाहते हैं कि अस्पताल को सुरक्षा मानकों का प्रमाणपत्र किस आधार पर मिला था।
दमकल टीम ने संभाला मोर्चा
आग की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। फायर अधिकारियों और बचावकर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। राहत और बचाव अभियान के दौरान करीब पच्चीस लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इसके बाद उन्हें अलग-अलग अस्पतालों में उपचार के लिए भेजा गया।
अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर निजी अस्पतालों में सुरक्षा मानकों की वास्तविक स्थिति को सामने ला दिया है। शहर के लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थानों में भी सुरक्षा नियमों का पालन नहीं होगा तो मरीजों की जान कितनी सुरक्षित है। प्रशासन ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

