By Malay Ojha | Published: 04 June 2026 at 10:24 AM
पटना के मुसल्लहपुर हाट इलाके में हाल ही में हुई एक घटना ने पूरे बिहार के कोचिंग जगत को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। चर्चित शिक्षक फैजल खान, जिन्हें छात्र खान सर के नाम से जानते हैं, ने दावा किया कि उनके संस्थान के बाहर हमला हुआ, सुरक्षा कर्मी के साथ मारपीट की गई और गोलियां भी चलाई गईं। हालांकि पुलिस ने बाद में कई दावों पर सवाल उठाए और मामले में कार्रवाई करते हुए कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया। लेकिन इस पूरे विवाद ने एक बार फिर बिहार के विशाल कोचिंग कारोबार को सुर्खियों में ला दिया है।
खान सर से जुड़ा मामला केवल एक आपराधिक घटना भर नहीं माना जा रहा। इसने उस शिक्षा बाजार की ओर लोगों का ध्यान खींचा है, जो वर्षों से बिहार की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा बन चुका है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों छात्र हर साल कोचिंग संस्थानों का रुख करते हैं और यही वजह है कि राज्य में यह क्षेत्र तेजी से फैलता गया है।
क्यों खास है मुसल्लहपुर हाट?
पटना का मुसल्लहपुर हाट इलाका लंबे समय से छात्रों का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां प्रतियोगी परीक्षाओं, सरकारी नौकरियों और विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले सैकड़ों संस्थान संचालित होते हैं। हजारों छात्र रोजाना यहां पहुंचते हैं। यही कारण है कि इसे बिहार का सबसे बड़ा कोचिंग केंद्र भी कहा जाता है।
बिहार में कितने हैं कोचिंग संस्थान?
हालिया आंकड़ों के अनुसार बिहार में छह हजार से अधिक कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में इनकी संख्या लगातार बढ़ी है। सबसे ज्यादा संस्थान पटना में हैं, जबकि मुजफ्फरपुर और गया भी प्रमुख केंद्रों के रूप में उभरे हैं। अधिकांश संस्थान व्यक्तिगत स्तर पर संचालित होते हैं, जबकि कुछ बड़े ब्रांड भी इस क्षेत्र में सक्रिय हैं।
छोटे शहरों में भी बढ़ा कोचिंग का प्रभाव
केवल बड़े शहर ही नहीं, बल्कि भागलपुर, बांका और अन्य जिलों में भी कोचिंग संस्थानों की संख्या तेजी से बढ़ी है। हजारों छात्र नियमित रूप से इन संस्थानों में पढ़ाई कर रहे हैं। रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं के बढ़ते दबाव ने कोचिंग की मांग को लगातार बढ़ाया है।
हजारों करोड़ रुपये का कारोबार
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार का कोचिंग बाजार अब केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक बड़े उद्योग का रूप ले चुका है। विभिन्न आकलनों के अनुसार राज्य में निजी कोचिंग संस्थानों का वार्षिक कारोबार हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। छात्रों की फीस, अध्ययन सामग्री, छात्रावास, पुस्तकें और अन्य सेवाओं को जोड़ दिया जाए तो यह आंकड़ा और भी बड़ा हो जाता है।
लाखों परिवारों की आजीविका जुड़ी
कोचिंग उद्योग केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं है। इससे प्रशासनिक कर्मचारी, पुस्तक विक्रेता, छात्रावास संचालक, भोजनालय, परिवहन सेवा और किराये के मकान मालिक भी जुड़े हुए हैं। इस क्षेत्र ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया है।
पूर्वी भारत का सबसे बड़ा शिक्षा बाजार
देश के कई हिस्सों की तुलना में बिहार में निजी कोचिंग लेने वाले छात्रों की संख्या काफी अधिक है। प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता पाने की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण बड़ी संख्या में छात्र अतिरिक्त मार्गदर्शन की तलाश करते हैं। यही वजह है कि पटना को कई लोग देश के प्रमुख कोचिंग केंद्रों में गिनने लगे हैं।
सरकार पहले ही बना चुकी है कानून
कोचिंग संस्थानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए बिहार ने वर्षों पहले इनके नियमन के लिए विशेष कानून लागू किया था। यह कदम उठाने वाले राज्यों में बिहार सबसे आगे रहा। अब सरकार इस व्यवस्था को और मजबूत बनाने की तैयारी में है ताकि छात्रों के हितों की बेहतर सुरक्षा हो सके।
नए नियमों में क्या होगा खास?
प्रस्तावित नियमों के अनुसार एक निश्चित संख्या से अधिक छात्रों वाले हर संस्थान को पंजीकरण कराना होगा। बिना अनुमति संचालन करने वाले संस्थानों पर भारी आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। इसके अलावा शिक्षकों और कर्मचारियों के सत्यापन, आधारभूत सुविधाओं और पारदर्शिता को लेकर भी सख्त प्रावधान किए जा रहे हैं।
छात्रों को मिलेगा ज्यादा संरक्षण
सरकार ऐसे नियमों पर भी विचार कर रही है जिनसे छात्रों को बेहतर पढ़ाई का माहौल मिले। संस्थानों में न्यूनतम स्थान, योग्य शिक्षक, स्पष्ट शुल्क व्यवस्था और भ्रामक प्रचार पर रोक जैसे कदम शामिल किए जा सकते हैं। इसका उद्देश्य छात्रों और अभिभावकों के हितों की रक्षा करना है।
खान सर विवाद के बाद बढ़ी सख्ती
हालिया विवाद के बाद राज्य सरकार ने व्यापक कोचिंग नीति तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाने के संकेत दिए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में ऐसे नियम लागू किए जा सकते हैं, जो पूरे कोचिंग क्षेत्र को अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनाएंगे।
शिक्षा से कारोबार तक का सफर
बिहार में कोचिंग संस्थान अब केवल पढ़ाई का माध्यम नहीं रह गए हैं। यह एक ऐसा क्षेत्र बन चुका है, जो हजारों करोड़ रुपये के आर्थिक गतिविधि चक्र को गति देता है। खान सर से जुड़े विवाद ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि बिहार की कोचिंग दुनिया केवल शिक्षा नहीं, बल्कि एक विशाल आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था का हिस्सा बन चुकी है।

