By Malay Ojha | Published: 21 July 2026 at 02:57 PM
सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर चल रही सुनवाई के बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने उन्हें उनकी पसंद के मेदांता अस्पताल में शिफ्ट करने की अनुमति दे दी है। अदालत ने यह फैसला मेडिकल रिपोर्ट और डॉक्टरों से हुई बातचीत के बाद लिया। सुनवाई में यह बात सामने आई कि वांगचुक की सेहत पर लगातार निगरानी रखना जरूरी है। सरकार ने भी उन्हें मेदांता ले जाने पर आपत्ति नहीं जताई, लेकिन इसके साथ एक अहम शर्त रखी।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत के सामने रखी गई मेडिकल रिपोर्ट और डॉक्टरों की राय पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके बाद कोर्ट ने वांगचुक को मेदांता अस्पताल में शिफ्ट करने की अनुमति दी। उनकी अब तक की सभी मेडिकल रिपोर्ट और जांच से जुड़ी जानकारी वहां इलाज करने वाले डॉक्टरों को उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि आगे के इलाज में किसी तरह की परेशानी न हो।
डॉक्टरों से बातचीत के बाद कोर्ट ने लिया फैसला
सुनवाई के दौरान अदालत ने अलग-अलग डॉक्टरों की राय भी जानी। कोर्ट के सामने मौजूद मेडिकल जानकारी के आधार पर यह बात सामने आई कि वांगचुक की हालत पर लगातार नजर रखने की जरूरत है। हालांकि, उनकी निगरानी किस जगह की जाए, इसको लेकर डॉक्टरों की राय पूरी तरह एक जैसी नहीं थी। कुछ डॉक्टरों का मानना था कि उनकी लगातार चिकित्सकीय निगरानी जरूरी है, जबकि डॉक्टर टंडन ने अस्पताल में ही निगरानी रखने की जरूरत पर जोर दिया।
सरकार ने कहा- मेदांता जाने पर कोई आपत्ति नहीं
सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि सरकार को वांगचुक के मेदांता अस्पताल जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, सरकार ने यह शर्त रखी कि उन्हें डॉक्टरों की सलाह के खिलाफ अस्पताल से छुट्टी नहीं दी जानी चाहिए। सरकार का कहना था कि वांगचुक की सेहत को देखते हुए इलाज और निगरानी में किसी तरह का जोखिम नहीं लिया जा सकता।
सरकार को किस बात का डर?
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से यह चिंता भी जताई गई कि वांगचुक के आसपास मौजूद कुछ लोग उन्हें अस्पताल से बाहर ले जाने की कोशिश कर सकते हैं। सॉलिसिटर जनरल ने अदालत के सामने सवाल रखा कि अगर वांगचुक अस्पताल से बाहर निकलकर दोबारा प्रदर्शन स्थल पर पहुंचते हैं और इस दौरान उनकी तबीयत बिगड़ती है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। सरकार का तर्क था कि मामला सीधे उनकी जान और सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए किसी भी तरह का जोखिम उठाना ठीक नहीं होगा।
पसंद का अस्पताल चुनने के अधिकार पर भी चर्चा
सुनवाई के दौरान वांगचुक की पसंद के अस्पताल और डॉक्टरों से इलाज कराने के अधिकार का मुद्दा भी सामने आया। सरकार की ओर से कहा गया कि वांगचुक अपनी पसंद का अस्पताल और डॉक्टर चुन सकते हैं, लेकिन उन्हें चिकित्सकीय सलाह के विपरीत अस्पताल से छुट्टी नहीं लेनी चाहिए। यानी इलाज के दौरान उनकी सुरक्षा और लगातार निगरानी को लेकर अदालत और सरकार दोनों की चिंता बनी रही।
हाई कोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट और डॉक्टरों की राय को माना अहम
अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट देखने और डॉक्टरों से बातचीत के बाद माना कि वांगचुक की सेहत पर लगातार निगरानी जरूरी है। सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि निगरानी किसी दूसरी जगह पर भी की जा सकती है, लेकिन अस्पताल में रहने की स्थिति में उनकी तबीयत बिगड़ने पर तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है। इसी वजह से अस्पताल में निगरानी रखने की राय को भी गंभीरता से लिया गया।
पत्नी की याचिका पर हो रही थी सुनवाई
यह मामला सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो की ओर से दायर अपील से जुड़ा है। उन्होंने वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से उनकी पसंद के निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग की थी। इससे पहले एकल पीठ ने उन्हें निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति नहीं दी थी, जिसके बाद मामला खंडपीठ के सामने पहुंचा।
पहले भी कोर्ट ने सेहत पर नजर रखने का दिया था निर्देश
इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट पहले भी वांगचुक की सेहत को लेकर चिंता जता चुका है। अदालत ने सरकार से कहा था कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति की नियमित चिकित्सकीय निगरानी की जाए और डॉक्टरों की सलाह के आधार पर जरूरत पड़ने पर जरूरी चिकित्सा कदम उठाए जाएं। कोर्ट ने यह भी कहा था कि किसी भी नागरिक का जीवन महत्वपूर्ण है और उसकी जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए।
भूख हड़ताल के बीच बिगड़ी थी तबीयत
सोनम वांगचुक लंबे समय से चल रही भूख हड़ताल के कारण चर्चा में हैं। उनकी सेहत बिगड़ने के बाद उन्हें प्रदर्शन स्थल से अस्पताल ले जाया गया था। इसके बाद उनके इलाज और अस्पताल बदलने को लेकर कानूनी विवाद खड़ा हुआ। वांगचुक की ओर से उनकी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने की मांग की गई, जबकि सरकार का जोर उनकी लगातार चिकित्सकीय निगरानी और सुरक्षा पर रहा।
अब आगे क्या होगा?
हाई कोर्ट के मंगलवार के आदेश के बाद सोनम वांगचुक को मेदांता अस्पताल में शिफ्ट किए जाने का रास्ता साफ हो गया है। वहां उनके इलाज और स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जाएगी। अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान मेडिकल रिपोर्ट और विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय को अहम माना। इस पूरे मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि मेदांता में उनकी सेहत कैसी रहती है और डॉक्टर आगे उनके इलाज को लेकर क्या सलाह देते हैं। अदालत ने मामले में विस्तृत आदेश बाद में सुनाए जाने की बात कही थी।
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