By Malay Ojha | Published: 05 June 2026 at 10:45 AM
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सवेरा कैंसर हॉस्पिटल के निदेशक एवं वरिष्ठ कैंसर सर्जन डॉ. वी.पी. सिंह ने कैंसर और पर्यावरण प्रदूषण के बढ़ते संबंध को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि लगातार खराब होती पर्यावरणीय स्थिति अब केवल प्रकृति तक सीमित समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह सीधे लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के मामलों में वृद्धि का कारण बन रही है।
डॉ. सिंह ने कहा कि वायु, जल और खाद्य प्रदूषण आज सार्वजनिक स्वास्थ्य के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुके हैं। बढ़ते औद्योगीकरण, वाहनों की संख्या में वृद्धि और रासायनिक प्रदूषण के कारण लोगों का स्वास्थ्य लगातार प्रभावित हो रहा है। इसका असर आने वाले वर्षों में और अधिक गंभीर रूप में देखने को मिल सकता है।
प्रदूषित हवा से फेफड़ों के कैंसर का जोखिम
उन्होंने बताया कि वायु प्रदूषण अब फेफड़ों के कैंसर के प्रमुख कारणों में गिना जाने लगा है। सड़कों पर बढ़ते वाहनों से निकलने वाला धुआं, कारखानों से उत्सर्जित गैसें और वातावरण में मौजूद सूक्ष्म विषैले कण श्वसन तंत्र को लगातार नुकसान पहुंचाते हैं। लंबे समय तक ऐसे वातावरण में रहने वाले लोगों में कैंसर सहित कई गंभीर रोगों का खतरा बढ़ जाता है।
दूषित पानी भी बन सकता है घातक
डॉ. सिंह के अनुसार, भूजल और पेयजल में मौजूद हानिकारक रासायनिक तत्व भी स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा हैं। कई क्षेत्रों में पानी में आर्सेनिक, भारी धातुएं और अन्य जहरीले तत्व पाए जाते हैं, जो लंबे समय तक शरीर में प्रवेश करने पर लीवर, मूत्राशय, पेट और त्वचा से जुड़े कैंसर का जोखिम बढ़ा सकते हैं।
खेती में बढ़ते रसायनों पर चिंता
उन्होंने कृषि क्षेत्र में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बढ़ते इस्तेमाल पर भी चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि अत्यधिक रासायनिक प्रयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है और यही तत्व खाद्यान्नों के माध्यम से मानव शरीर तक पहुंचते हैं। लंबे समय तक ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करने से शरीर में कैंसरकारी तत्व जमा होने की आशंका बढ़ जाती है।
पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने की अपील
वरिष्ठ कैंसर सर्जन ने कहा कि केवल सरकारी प्रयासों से पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। स्वच्छता, वृक्षारोपण, जल संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण जैसे प्रयासों को जन आंदोलन का रूप देना समय की आवश्यकता है।
प्लास्टिक और रसायनों के उपयोग में सावधानी जरूरी
उन्होंने लोगों से प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और रासायनिक पदार्थों के अनियंत्रित प्रयोग से बचने की अपील की। उनके अनुसार, यदि आज पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता नहीं दी गई तो भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां और गंभीर हो सकती हैं।
स्वस्थ पर्यावरण ही सुरक्षित भविष्य की नींव
डॉ. सिंह ने कहा कि स्वच्छ हवा, शुद्ध पानी और हरियाली से भरपूर वातावरण केवल प्रकृति की रक्षा नहीं करते, बल्कि लोगों को कई गंभीर बीमारियों से भी बचाते हैं। उन्होंने कहा कि स्वस्थ समाज और सुरक्षित भविष्य के लिए पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाना होगा।

