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RBI का बड़ा फैसला: रेपो रेट में नहीं हुआ बदलाव, वैश्विक तनाव के बीच विकास दर का अनुमान घटाया

By Malay Ojha | Published: 05 June 2026 at 11:12 AM

भारतीय रिजर्व बैंक ने जून 2026 की मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्याज दरों को लेकर यथास्थिति बनाए रखने का फैसला किया है। केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया और इसे 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। हालांकि, वैश्विक परिस्थितियों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को देखते हुए आर्थिक विकास दर के अनुमान में कटौती कर दी गई है। यही इस नीति समीक्षा की सबसे बड़ी घोषणा मानी जा रही है।

मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि समिति ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही मौद्रिक नीति का रुख भी तटस्थ रखा गया है। इस फैसले से फिलहाल गृह ऋण, वाहन ऋण और अन्य कर्जों की ब्याज दरों में तत्काल किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं दिख रही है।

ब्याज दरों में नहीं हुआ कोई फेरबदल
केंद्रीय बैंक ने केवल रेपो रेट ही नहीं, बल्कि अन्य प्रमुख दरों को भी यथावत रखा है। स्थायी जमा सुविधा दर 5 प्रतिशत पर कायम रहेगी, जबकि सीमांत स्थायी सुविधा दर और बैंक दर को 5.5 प्रतिशत पर बनाए रखा गया है। इससे स्पष्ट है कि रिजर्व बैंक ने इस बार मौद्रिक नीति के मोर्चे पर स्थिरता को प्राथमिकता दी है।

विकास दर के अनुमान में कटौती
नीति समीक्षा का दूसरा बड़ा पहलू आर्थिक विकास दर के अनुमान में कमी है। आरबीआई ने माना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। इसी कारण चालू वित्त वर्ष के लिए विकास दर का अनुमान पहले की तुलना में घटाया गया है।

तिमाही आधार पर क्या है नया अनुमान
केंद्रीय बैंक के अनुसार चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रह सकती है। दूसरी तिमाही के लिए 6.3 प्रतिशत, तीसरी तिमाही के लिए 6.5 प्रतिशत और चौथी तिमाही के लिए 6.8 प्रतिशत वृद्धि दर का अनुमान जताया गया है। यह दर्शाता है कि आरबीआई आने वाले महीनों में वैश्विक चुनौतियों के प्रभाव को लेकर सतर्क बना हुआ है।

महंगाई को लेकर क्या कहा गया
आरबीआई ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर के अनुमान को 5.1 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि महंगाई का मूल दबाव अभी नियंत्रण में है और कीमतों में व्यापक स्तर पर असामान्य बढ़ोतरी के संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं। यही वजह है कि केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में बदलाव की आवश्यकता महसूस नहीं की।

निवेशकों के लिए भी अहम घोषणा
मौद्रिक नीति समीक्षा के दौरान केंद्रीय बैंक ने प्रवासी भारतीयों और भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों को लेकर भी महत्वपूर्ण घोषणा की। अब उन्हें कुछ ऐसे इक्विटी साधनों में अधिक निवेश की अनुमति मिलेगी, जिनका कारोबार शेयर बाजार में सूचीबद्ध रूप में नहीं होता। इस कदम को विदेशी निवेश आकर्षित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

आम लोगों पर क्या होगा असर
रेपो रेट में बदलाव नहीं होने का सीधा मतलब यह है कि मौजूदा समय में कर्ज की लागत में तत्काल कोई बड़ा परिवर्तन नहीं होगा। जिन लोगों ने पहले से गृह ऋण या अन्य ऋण ले रखे हैं, उनकी मासिक किस्तों पर भी फिलहाल कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा। वहीं बचत और निवेश योजनाओं पर भी तत्काल असर सीमित रहने की संभावना है।

आगे की नीति पर टिकी रहेंगी निगाहें
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में वैश्विक हालात, कच्चे तेल की कीमतों और महंगाई के रुख को देखते हुए केंद्रीय बैंक आगे की रणनीति तय करेगा। फिलहाल आरबीआई ने स्थिरता और संतुलन का रास्ता अपनाते हुए ब्याज दरों को यथावत रखने का फैसला किया है।

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RBI का बड़ा फैसला: रेपो रेट में नहीं हुआ बदलाव, वैश्विक तनाव के बीच विकास दर का अनुमान घटाया

By Malay Ojha | Published: 05 June 2026 at 11:12 AM

भारतीय रिजर्व बैंक ने जून 2026 की मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्याज दरों को लेकर यथास्थिति बनाए रखने का फैसला किया है। केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया और इसे 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। हालांकि, वैश्विक परिस्थितियों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को देखते हुए आर्थिक विकास दर के अनुमान में कटौती कर दी गई है। यही इस नीति समीक्षा की सबसे बड़ी घोषणा मानी जा रही है।

मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि समिति ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही मौद्रिक नीति का रुख भी तटस्थ रखा गया है। इस फैसले से फिलहाल गृह ऋण, वाहन ऋण और अन्य कर्जों की ब्याज दरों में तत्काल किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं दिख रही है।

ब्याज दरों में नहीं हुआ कोई फेरबदल
केंद्रीय बैंक ने केवल रेपो रेट ही नहीं, बल्कि अन्य प्रमुख दरों को भी यथावत रखा है। स्थायी जमा सुविधा दर 5 प्रतिशत पर कायम रहेगी, जबकि सीमांत स्थायी सुविधा दर और बैंक दर को 5.5 प्रतिशत पर बनाए रखा गया है। इससे स्पष्ट है कि रिजर्व बैंक ने इस बार मौद्रिक नीति के मोर्चे पर स्थिरता को प्राथमिकता दी है।

विकास दर के अनुमान में कटौती
नीति समीक्षा का दूसरा बड़ा पहलू आर्थिक विकास दर के अनुमान में कमी है। आरबीआई ने माना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। इसी कारण चालू वित्त वर्ष के लिए विकास दर का अनुमान पहले की तुलना में घटाया गया है।

तिमाही आधार पर क्या है नया अनुमान
केंद्रीय बैंक के अनुसार चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रह सकती है। दूसरी तिमाही के लिए 6.3 प्रतिशत, तीसरी तिमाही के लिए 6.5 प्रतिशत और चौथी तिमाही के लिए 6.8 प्रतिशत वृद्धि दर का अनुमान जताया गया है। यह दर्शाता है कि आरबीआई आने वाले महीनों में वैश्विक चुनौतियों के प्रभाव को लेकर सतर्क बना हुआ है।

महंगाई को लेकर क्या कहा गया
आरबीआई ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर के अनुमान को 5.1 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि महंगाई का मूल दबाव अभी नियंत्रण में है और कीमतों में व्यापक स्तर पर असामान्य बढ़ोतरी के संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं। यही वजह है कि केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में बदलाव की आवश्यकता महसूस नहीं की।

निवेशकों के लिए भी अहम घोषणा
मौद्रिक नीति समीक्षा के दौरान केंद्रीय बैंक ने प्रवासी भारतीयों और भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों को लेकर भी महत्वपूर्ण घोषणा की। अब उन्हें कुछ ऐसे इक्विटी साधनों में अधिक निवेश की अनुमति मिलेगी, जिनका कारोबार शेयर बाजार में सूचीबद्ध रूप में नहीं होता। इस कदम को विदेशी निवेश आकर्षित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

आम लोगों पर क्या होगा असर
रेपो रेट में बदलाव नहीं होने का सीधा मतलब यह है कि मौजूदा समय में कर्ज की लागत में तत्काल कोई बड़ा परिवर्तन नहीं होगा। जिन लोगों ने पहले से गृह ऋण या अन्य ऋण ले रखे हैं, उनकी मासिक किस्तों पर भी फिलहाल कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा। वहीं बचत और निवेश योजनाओं पर भी तत्काल असर सीमित रहने की संभावना है।

आगे की नीति पर टिकी रहेंगी निगाहें
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में वैश्विक हालात, कच्चे तेल की कीमतों और महंगाई के रुख को देखते हुए केंद्रीय बैंक आगे की रणनीति तय करेगा। फिलहाल आरबीआई ने स्थिरता और संतुलन का रास्ता अपनाते हुए ब्याज दरों को यथावत रखने का फैसला किया है।

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