By Malay Ojha | Published: 06 June 2026 at 11:26 AM
लखनऊ में आयोजित श्रीराम कथा कार्यक्रम के दौरान जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसने राजनीतिक और रणनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में उन्होंने कहा कि यदि ऑपरेशन सिंदूर दो दिन और जारी रहता तो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर भारत का हिस्सा बन सकता था। उनके इस बयान ने कार्यक्रम का केंद्र बिंदु बना दिया।
अपने संबोधन में रामभद्राचार्य ने कहा कि भारत द्वारा चलाया गया ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद के खिलाफ एक निर्णायक कार्रवाई थी। उन्होंने दावा किया कि अभियान की गति और प्रभाव को देखते हुए यदि यह कुछ और समय तक जारी रहता तो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को लेकर स्थिति पूरी तरह बदल सकती थी। उनके इस बयान पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भी खास रुचि दिखाई।
राजनाथ सिंह की मौजूदगी में कही बड़ी बात
कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे। रामभद्राचार्य ने अपने संबोधन के दौरान उनकी ओर संकेत करते हुए कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा और सीमाओं की रक्षा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। उन्होंने रक्षा मंत्री के कार्यकाल में सुरक्षा मोर्चे पर हुई कार्रवाइयों की भी सराहना की।
ऑपरेशन सिंदूर का किया उल्लेख
रामभद्राचार्य ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान की धरती पर मौजूद कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। उनके अनुसार यह अभियान केवल सैन्य कार्रवाई नहीं था, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत के दृढ़ संकल्प का भी प्रतीक था। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण कदम बताया।
सेना प्रमुख से जुड़ा किस्सा भी सुनाया
अपने संबोधन के दौरान रामभद्राचार्य ने भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक अवसर पर सेना प्रमुख ने उनसे गुरु दक्षिणा देने की इच्छा जताई थी। इस पर उन्होंने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को भारत में वापस लाने की अपनी इच्छा व्यक्त की थी। इस प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय एकता और अखंडता पर जोर दिया।
वर्ष 2029 को लेकर भी की भविष्यवाणी
कार्यक्रम के दौरान रामभद्राचार्य ने राजनीतिक भविष्य को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2029 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर सरकार बना सकते हैं और राजनाथ सिंह पुनः रक्षा मंत्री की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। उनके इस बयान को लेकर भी कार्यक्रम में चर्चा होती रही।
विश्वविद्यालय को केंद्रीय दर्जा देने की मांग
रामभद्राचार्य ने अपने संबोधन को केवल राष्ट्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने अपने नाम से संचालित दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि इससे दिव्यांग विद्यार्थियों को बेहतर अवसर और संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।
रामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की अपील
उन्होंने केंद्र सरकार से रामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की मांग भी की। रामभद्राचार्य ने कहा कि भगवान राम भारतीय संस्कृति, मर्यादा और राष्ट्रीय चेतना के प्रतीक हैं। उनके अनुसार रामचरितमानस केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि भारतीय समाज के सांस्कृतिक मूल्यों का महत्वपूर्ण दस्तावेज है।
राजनाथ सिंह ने भी साझा किए अपने अनुभव
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि वह पिछले तीन दशकों से रामभद्राचार्य को जानते हैं। उन्होंने उनके ज्ञान, विद्वता और समाज के प्रति योगदान की सराहना की। साथ ही कहा कि ऐसे संत समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं।
पहलगाम हमले के बाद चर्चा में आया था ऑपरेशन
गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख उस सैन्य कार्रवाई के संदर्भ में किया जाता है, जिसे पहलगाम आतंकी हमले के बाद आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाने के लिए चलाया गया था। इसी अभियान को आधार बनाकर रामभद्राचार्य ने अपने संबोधन में पीओके को लेकर यह बड़ा दावा किया, जो अब राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं का विषय बन गया है।

