Tuesday, June 9, 2026

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पटना में ऑटो हड़ताल खत्म, ट्रैफिक पुलिस से समझौते के बाद दोपहर से सड़कों पर लौटे वाहन

By aryavartalive | Published: 08 June 2026 at 11:07 PM

पटना में सोमवार को कई घंटों तक आम लोगों की परेशानी का कारण बनी ऑटो हड़ताल आखिरकार समाप्त हो गई। ट्रैफिक पुलिस और ऑटो यूनियनों के बीच हुई महत्वपूर्ण वार्ता के बाद दोपहर दो बजे से राजधानी के सभी प्रमुख मार्गों पर ऑटो का संचालन फिर से शुरू कर दिया गया। आंदोलन की सबसे बड़ी खास बात यह रही कि सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने खुलकर ऑटो चालकों का समर्थन किया और प्रदेश अध्यक्ष धनंजय कुमार सिन्हा तथा उपाध्यक्ष विनय झा मौके पर मौजूद रहे।

सुबह से ही राजधानी के कई प्रमुख इलाकों में ऑटो सेवा पूरी तरह प्रभावित रही। बोरिंग रोड, राजा पुल, पाटलिपुत्र स्टेशन, गांधी मैदान, आशियाना, बेली रोड और दानापुर जैसे व्यस्त मार्गों पर यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। दफ्तर जाने वाले लोगों, छात्रों और रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाले यात्रियों को वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ा।

डाकबंगला चौराहा बना आंदोलन का केंद्र
ऑटो चालकों ने अपनी मांगों को लेकर आक्रोश मार्च निकाला। यह मार्च शहर के विभिन्न हिस्सों से गुजरते हुए डाकबंगला चौराहा पहुंचा, जहां बड़ी संख्या में चालक एकत्र हुए। बाद में यह मार्च सभा में तब्दील हो गया। सभा के दौरान चालकों ने अपनी समस्याओं को लेकर जोरदार नारेबाजी की और प्रशासन से तत्काल समाधान की मांग उठाई।

ट्रैफिक पुलिस और यूनियन के बीच बनी सहमति
बढ़ते आंदोलन और यातायात पर पड़ रहे असर को देखते हुए ट्रैफिक डीएसपी-4 की पहल पर यूनियन प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए बुलाया गया। कई दौर की बातचीत के बाद ट्रैफिक पुलिस और ऑटो संगठनों के बीच सहमति बनी। अधिकारियों ने चालकों की समस्याओं को सुनने के साथ-साथ यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी दी।

यातायात व्यवस्था में किए गए बड़े बदलाव
वार्ता में यह तय किया गया कि अब डाकबंगला चौराहा से स्टेशन की ओर व्यावसायिक वाहनों, ऑटो, ई-रिक्शा और नगर बसों का सीधा प्रवेश नहीं होगा। नगर बसों को एग्जीबिशन रोड और वीणा सिनेमा मार्ग के जरिए वैकल्पिक रास्ते से संचालित किया जाएगा। वहीं ऑटो और ई-रिक्शा को कोतवाली टी-प्वाइंट, बुद्ध स्मृति मल्टी लेवल पार्किंग, जीपीओ गोलंबर और रेलवे स्टेशन पार्किंग के रास्ते आवागमन की अनुमति दी जाएगी।

नो-एंट्री नियमों पर सख्ती की तैयारी
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि बंदर बगीचा मार्ग से ऑटो और ई-रिक्शा की आवाजाही पर रोक रहेगी। साथ ही नो-एंट्री नियमों को पहले से अधिक सख्ती के साथ लागू किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि इससे शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में यातायात दबाव कम होगा और जाम की समस्या पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी।

क्या थीं ऑटो चालकों की मुख्य मांगें
यूनियन नेताओं का कहना था कि रेलवे स्टेशन गोलंबर से दूर ऑटो स्टैंड होने के कारण यात्रियों और चालकों दोनों को परेशानी झेलनी पड़ रही थी। इसके अलावा अव्यवस्थित तरीके से संचालित हो रहे ई-रिक्शा भी ट्रैफिक व्यवस्था को प्रभावित कर रहे थे। इन मुद्दों को लेकर लंबे समय से नाराजगी बनी हुई थी, जिसके चलते आंदोलन का रास्ता अपनाया गया।

आंदोलन को मिला राजनीतिक समर्थन
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के प्रदेश अध्यक्ष धनंजय कुमार सिन्हा और उपाध्यक्ष विनय झा ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर चालकों की मांगों को उचित बताया। पार्टी नेताओं ने कहा कि आम मेहनतकश लोगों की समस्याओं का समाधान बातचीत और सकारात्मक पहल के जरिए होना चाहिए। उन्होंने प्रशासन द्वारा वार्ता के बाद लिए गए फैसलों का स्वागत भी किया।

हड़ताल खत्म, यात्रियों को मिली राहत
प्रशासन से आश्वासन मिलने के बाद यूनियनों ने दोपहर दो बजे से हड़ताल समाप्त करने की घोषणा कर दी। इसके बाद राजधानी के सभी प्रमुख मार्गों पर ऑटो का परिचालन सामान्य रूप से शुरू हो गया। इससे यात्रियों ने भी राहत की सांस ली और कई घंटों से प्रभावित परिवहन व्यवस्था धीरे-धीरे पटरी पर लौट आई।

आगे भी जारी रहेगी मांगों की निगरानी
आंदोलन और वार्ता में प्रगतिशील ऑटो चालक यूनियन, गांधी मैदान ऑटो चालक यूनियन, बिहार राज्य ऑटो चालक संघ और अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यूनियन नेताओं ने कहा कि यदि भविष्य में समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा, लेकिन फिलहाल वार्ता के जरिए निकले समाधान का स्वागत किया जा रहा है।

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पटना में ऑटो हड़ताल खत्म, ट्रैफिक पुलिस से समझौते के बाद दोपहर से सड़कों पर लौटे वाहन

By aryavartalive | Published: 08 June 2026 at 11:07 PM

पटना में सोमवार को कई घंटों तक आम लोगों की परेशानी का कारण बनी ऑटो हड़ताल आखिरकार समाप्त हो गई। ट्रैफिक पुलिस और ऑटो यूनियनों के बीच हुई महत्वपूर्ण वार्ता के बाद दोपहर दो बजे से राजधानी के सभी प्रमुख मार्गों पर ऑटो का संचालन फिर से शुरू कर दिया गया। आंदोलन की सबसे बड़ी खास बात यह रही कि सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने खुलकर ऑटो चालकों का समर्थन किया और प्रदेश अध्यक्ष धनंजय कुमार सिन्हा तथा उपाध्यक्ष विनय झा मौके पर मौजूद रहे।

सुबह से ही राजधानी के कई प्रमुख इलाकों में ऑटो सेवा पूरी तरह प्रभावित रही। बोरिंग रोड, राजा पुल, पाटलिपुत्र स्टेशन, गांधी मैदान, आशियाना, बेली रोड और दानापुर जैसे व्यस्त मार्गों पर यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। दफ्तर जाने वाले लोगों, छात्रों और रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाले यात्रियों को वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ा।

डाकबंगला चौराहा बना आंदोलन का केंद्र
ऑटो चालकों ने अपनी मांगों को लेकर आक्रोश मार्च निकाला। यह मार्च शहर के विभिन्न हिस्सों से गुजरते हुए डाकबंगला चौराहा पहुंचा, जहां बड़ी संख्या में चालक एकत्र हुए। बाद में यह मार्च सभा में तब्दील हो गया। सभा के दौरान चालकों ने अपनी समस्याओं को लेकर जोरदार नारेबाजी की और प्रशासन से तत्काल समाधान की मांग उठाई।

ट्रैफिक पुलिस और यूनियन के बीच बनी सहमति
बढ़ते आंदोलन और यातायात पर पड़ रहे असर को देखते हुए ट्रैफिक डीएसपी-4 की पहल पर यूनियन प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए बुलाया गया। कई दौर की बातचीत के बाद ट्रैफिक पुलिस और ऑटो संगठनों के बीच सहमति बनी। अधिकारियों ने चालकों की समस्याओं को सुनने के साथ-साथ यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी दी।

यातायात व्यवस्था में किए गए बड़े बदलाव
वार्ता में यह तय किया गया कि अब डाकबंगला चौराहा से स्टेशन की ओर व्यावसायिक वाहनों, ऑटो, ई-रिक्शा और नगर बसों का सीधा प्रवेश नहीं होगा। नगर बसों को एग्जीबिशन रोड और वीणा सिनेमा मार्ग के जरिए वैकल्पिक रास्ते से संचालित किया जाएगा। वहीं ऑटो और ई-रिक्शा को कोतवाली टी-प्वाइंट, बुद्ध स्मृति मल्टी लेवल पार्किंग, जीपीओ गोलंबर और रेलवे स्टेशन पार्किंग के रास्ते आवागमन की अनुमति दी जाएगी।

नो-एंट्री नियमों पर सख्ती की तैयारी
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि बंदर बगीचा मार्ग से ऑटो और ई-रिक्शा की आवाजाही पर रोक रहेगी। साथ ही नो-एंट्री नियमों को पहले से अधिक सख्ती के साथ लागू किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि इससे शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में यातायात दबाव कम होगा और जाम की समस्या पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी।

क्या थीं ऑटो चालकों की मुख्य मांगें
यूनियन नेताओं का कहना था कि रेलवे स्टेशन गोलंबर से दूर ऑटो स्टैंड होने के कारण यात्रियों और चालकों दोनों को परेशानी झेलनी पड़ रही थी। इसके अलावा अव्यवस्थित तरीके से संचालित हो रहे ई-रिक्शा भी ट्रैफिक व्यवस्था को प्रभावित कर रहे थे। इन मुद्दों को लेकर लंबे समय से नाराजगी बनी हुई थी, जिसके चलते आंदोलन का रास्ता अपनाया गया।

आंदोलन को मिला राजनीतिक समर्थन
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के प्रदेश अध्यक्ष धनंजय कुमार सिन्हा और उपाध्यक्ष विनय झा ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर चालकों की मांगों को उचित बताया। पार्टी नेताओं ने कहा कि आम मेहनतकश लोगों की समस्याओं का समाधान बातचीत और सकारात्मक पहल के जरिए होना चाहिए। उन्होंने प्रशासन द्वारा वार्ता के बाद लिए गए फैसलों का स्वागत भी किया।

हड़ताल खत्म, यात्रियों को मिली राहत
प्रशासन से आश्वासन मिलने के बाद यूनियनों ने दोपहर दो बजे से हड़ताल समाप्त करने की घोषणा कर दी। इसके बाद राजधानी के सभी प्रमुख मार्गों पर ऑटो का परिचालन सामान्य रूप से शुरू हो गया। इससे यात्रियों ने भी राहत की सांस ली और कई घंटों से प्रभावित परिवहन व्यवस्था धीरे-धीरे पटरी पर लौट आई।

आगे भी जारी रहेगी मांगों की निगरानी
आंदोलन और वार्ता में प्रगतिशील ऑटो चालक यूनियन, गांधी मैदान ऑटो चालक यूनियन, बिहार राज्य ऑटो चालक संघ और अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यूनियन नेताओं ने कहा कि यदि भविष्य में समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा, लेकिन फिलहाल वार्ता के जरिए निकले समाधान का स्वागत किया जा रहा है।

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