By aryavartalive | Published: 23 July 2026 at 10:01 PM
गुंटूर (आंध्र प्रदेश): दिल्ली की ओर मार्च कर रहे किसानों के समर्थन में सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के राष्ट्रीय सचिव डॉ. टी. हरीश स्वामी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से तत्काल बातचीत शुरू करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसानों की आवाज को दबाने के बजाय सरकार को उनके प्रतिनिधियों के साथ बैठकर उनकी समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए। डॉ. हरीश स्वामी ने किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी देने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग तथा दंडात्मक कार्रवाई रोकने की भी मांग की।
किसानों के आंदोलन को दिया पूरा समर्थन
डॉ. टी. हरीश स्वामी ने कहा कि दिल्ली की ओर मार्च कर रहे किसानों का आंदोलन देश में कृषि क्षेत्र की मौजूदा स्थिति और किसानों की समस्याओं को सामने लाता है। उन्होंने कहा कि देश का किसान अपने खेत और परिवार छोड़कर राजधानी की ओर तभी रुख करता है, जब उसे लगता है कि उसकी आवाज सरकार तक नहीं पहुंच रही है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह किसानों की बात सुने और बातचीत के जरिए रास्ता निकाले।
सरकार से बिना शर्त बातचीत की अपील
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के राष्ट्रीय सचिव ने केंद्र सरकार से किसानों के प्रतिनिधियों के साथ तत्काल और बिना किसी शर्त के बातचीत शुरू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी वर्ग की जायज मांगों को अनदेखा नहीं किया जा सकता। किसानों के आंदोलन को केवल कानून-व्यवस्था की समस्या के तौर पर देखने के बजाय उनकी वास्तविक परेशानियों को समझने की जरूरत है।
एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग
डॉ. हरीश स्वामी ने कृषि उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी देने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना बेहद जरूरी है। खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, ऐसे में किसानों की मेहनत और उत्पादन लागत को ध्यान में रखते हुए उन्हें उचित आर्थिक सुरक्षा मिलनी चाहिए।
किसानों पर कार्रवाई रोकने की मांग
उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे किसानों के खिलाफ बल प्रयोग, बैरिकेडिंग, हिरासत और अन्य दंडात्मक कार्रवाई रोकने की अपील की। डॉ. हरीश स्वामी ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने वाले किसानों की आवाज को दबाने के बजाय सरकार को उनके साथ संवाद करना चाहिए।
आपराधिक मामले वापस लेने की अपील
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के राष्ट्रीय सचिव ने शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रदर्शनों में शामिल किसानों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों और अन्य दंडात्मक कार्रवाइयों को वापस लेने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ टकराव की स्थिति पैदा करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। सरकार को भरोसे का माहौल बनाकर किसानों के साथ बातचीत आगे बढ़ानी चाहिए।
खेती की बढ़ती लागत पर जताई चिंता
डॉ. टी. हरीश स्वामी ने खेती की बढ़ती लागत को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि खाद, बीज, बिजली, सिंचाई और डीजल जैसी जरूरी चीजों की लागत किसानों पर लगातार आर्थिक दबाव बढ़ा रही है। सरकार को किसानों को इन क्षेत्रों में राहत देने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए, ताकि खेती किसानों के लिए आर्थिक रूप से टिकाऊ बनी रहे।
कर्ज राहत और फसल नुकसान का मुआवजा देने की मांग
उन्होंने किसानों को व्यापक कर्ज राहत देने और फसल नुकसान की स्थिति में समय पर मुआवजा सुनिश्चित करने की मांग की। डॉ. हरीश स्वामी ने फसल बीमा व्यवस्था को भी बेहतर बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा या किसी अन्य कारण से फसल बर्बाद होने पर किसान को सरकारी सहायता के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना चाहिए।
राष्ट्रीय कृषि नीति बनाने की जरूरत बताई
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के राष्ट्रीय सचिव ने किसानों की आय, खाद्य सुरक्षा और खेती के भविष्य को ध्यान में रखते हुए एक व्यापक राष्ट्रीय कृषि नीति बनाए जाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि किसानों से जुड़े फैसले केवल तत्काल राहत तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि सरकार को ऐसी दीर्घकालिक नीति बनानी चाहिए, जिससे किसानों की आय बढ़े और कृषि क्षेत्र मजबूत हो।
‘किसान खैरात नहीं, अपने अधिकार मांग रहे’
डॉ. टी. हरीश स्वामी ने कहा कि देश के किसान किसी खैरात की मांग नहीं कर रहे हैं। वे अपने अधिकार, सम्मान और न्याय की मांग कर रहे हैं। किसान देश की खाद्य जरूरतों को पूरा करने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी हैं। ऐसे में उनकी समस्याओं की अनदेखी करना देश के व्यापक हित में नहीं है।
सरकार से टकराव खत्म करने की अपील
उन्होंने केंद्र सरकार से किसानों के साथ टकराव की स्थिति खत्म करने और बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की। डॉ. हरीश स्वामी ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति की आवाज को सुना जाना चाहिए और किसानों की जायज मांगों पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) किसानों के न्याय, सम्मान और संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई में उनके साथ खड़ी है। उन्होंने केंद्र सरकार से किसानों के प्रतिनिधियों के साथ तत्काल बातचीत शुरू करने और उनकी मांगों का शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से समाधान निकालने की अपील की। उन्होंने कहा, किसान की आवाज भारत की आवाज है। किसान की रक्षा करें, राष्ट्र की रक्षा करें।
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