By Malay Ojha | Published: 23 July 2026 at 07:56 PM
दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के बाद पुलिस ने अब उपद्रव करने वालों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, हिंसा में शामिल लोगों की पहचान वीडियो फुटेज, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और दूसरे डिजिटल सबूतों के आधार पर की जा रही है। जिन लोगों की भूमिका सामने आएगी, उनके खिलाफ मामला दर्ज करने के साथ उनके पासपोर्ट पर भी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, जंतर-मंतर के आसपास करीब डेढ़ किलोमीटर के दायरे में रात 12 बजे तक मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं बंद रखी गई हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और हिंसा करने वालों को चिन्हित करने का काम चल रहा है। पुलिस का फोकस उन लोगों पर है, जिन पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, पुलिस के साथ झड़प करने या हिंसक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। जांच में भूमिका सामने आने के बाद संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
वीडियो और सीसीटीवी फुटेज से हो रही पहचान
हिंसा में शामिल लोगों तक पहुंचने के लिए पुलिस अलग-अलग स्रोतों से जुटाए गए सबूतों की जांच कर रही है। प्रदर्शन स्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग के अलावा मौके पर बनाए गए वीडियो फुटेज को भी खंगाला जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हिंसा के दौरान कौन लोग सीधे तौर पर शामिल थे और किसकी भूमिका क्या रही।
आरोपियों के पासपोर्ट पर भी कार्रवाई की तैयारी
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जिन लोगों के खिलाफ हिंसा में शामिल होने के पर्याप्त सबूत मिलेंगे, उनके खिलाफ केवल मुकदमा दर्ज करने तक कार्रवाई सीमित नहीं रह सकती। ऐसे लोगों के पासपोर्ट रद्द कराने या उनसे जुड़े दूसरे यात्रा दस्तावेजों पर कार्रवाई के लिए भी संबंधित प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम कार्रवाई जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
जंतर-मंतर के आसपास मोबाइल-इंटरनेट सेवाएं बंद
इस बीच जंतर-मंतर के करीब डेढ़ किलोमीटर के दायरे में मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं रात 12 बजे तक बंद रखी गई हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब प्रदर्शन को लेकर इलाके में तनाव और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस पहले से सतर्क है। प्रशासन की कोशिश है कि किसी भी तरह की अफवाह या गलत सूचना फैलने से स्थिति और न बिगड़े।
रासुका की शक्तियां भी 18 अक्टूबर तक बढ़ीं
जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच दिल्ली के उपराज्यपाल ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत दिल्ली पुलिस को मिली निवारक हिरासत की शक्तियों की अवधि भी बढ़ा दी है। दिल्ली सरकार के गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, यह अधिकार 18 अक्टूबर तक जारी रहेगा। इसके तहत दिल्ली पुलिस आयुक्त को कानून के तहत किसी व्यक्ति को एहतियातन हिरासत में लेने की शक्ति प्राप्त है।
पुलिस को एहतियातन हिरासत में रखने का अधिकार
राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत सरकार ऐसे व्यक्ति को एहतियातन हिरासत में रखने का आदेश दे सकती है, जिसकी गतिविधियों को देश की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था या शांति के लिए खतरा माना जाता है। इस कानून के तहत किसी व्यक्ति को शुरुआती तौर पर तीन महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है। कानूनी प्रावधानों के तहत इसकी अवधि परिस्थितियों और तय प्रक्रिया के अनुसार आगे भी बढ़ सकती है।
रासुका का फैसला प्रदर्शन से जुड़ा नहीं: अधिकारी
हालांकि, दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने साफ किया है कि रासुका के तहत पुलिस की शक्तियों को बढ़ाना कोई नया या विशेष फैसला नहीं है। अधिकारी के मुताबिक, दिल्ली पुलिस आयुक्त को यह अधिकार नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत हर कुछ समय बाद दिया जाता रहा है। इस बार भी यह अवधि पूरी होने के बाद इसे आगे बढ़ाया गया है और इसका जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन से सीधा संबंध नहीं है।
दिल्ली पुलिस ने भी दी सफाई
दिल्ली पुलिस ने भी इस मामले में अपना पक्ष सामने रखा है। पुलिस के अनुसार, रासुका के तहत शक्तियों का मौजूदा नवीनीकरण 19 जुलाई से 18 अक्टूबर तक की अवधि के लिए है। पुलिस का कहना है कि इससे जुड़ा आदेश प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही जारी किया जा चुका था। इसलिए इसे मौजूदा आंदोलन या हाल की हिंसा से जोड़ना सही नहीं है।
पुलिस ने कहा- यह नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया
पुलिस के मुताबिक, रासुका के तहत शक्तियों का विस्तार किसी विशेष अनुरोध या मौजूदा प्रदर्शन को ध्यान में रखकर नहीं किया गया है। यह लंबे समय से चली आ रही नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। पुलिस ने उन खबरों पर भी आपत्ति जताई है, जिनमें इस फैसले को जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन से जोड़कर देखा गया।
नीट में कथित गड़बड़ी के खिलाफ चल रहा आंदोलन
दरअसल, कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से 20 जून से जंतर-मंतर पर नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर प्रदर्शन किया जा रहा है। प्रदर्शनकारी परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई है।
संसद मार्च के दौरान हुई थी झड़प
सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। इसी दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बन गई और हिंसा की घटनाएं सामने आईं। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों की पहचान शुरू कर दी है। अब जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाने पर है कि हिंसा में वास्तव में कौन लोग शामिल थे और उनकी भूमिका कितनी गंभीर थी।
जांच पूरी होने के बाद होगी आगे की कार्रवाई
पुलिस सूत्रों का कहना है कि अभी जांच जारी है और उपलब्ध सबूतों के आधार पर एक-एक व्यक्ति की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस का दावा है कि हिंसा में शामिल किसी भी व्यक्ति को केवल प्रदर्शन में शामिल होने के आधार पर निशाना नहीं बनाया जाएगा, बल्कि कार्रवाई उपलब्ध सबूतों और उसकी वास्तविक भूमिका के आधार पर की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद मुकदमा दर्ज करने और अन्य कानूनी कदम उठाने का फैसला किया जाएगा।
हिंसा के आरोपियों पर पुलिस की नजर
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और उसके बाद हुई हिंसा ने दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। एक तरफ पुलिस हिंसा में शामिल लोगों की पहचान कर रही है, तो दूसरी तरफ प्रशासन ने इलाके में संचार सेवाओं को लेकर भी कदम उठाए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में पुलिस की जांच और कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी। खास तौर पर उन लोगों के खिलाफ क्या कदम उठाया जाता है, जिन्हें हिंसा का जिम्मेदार पाया जाएगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
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