By Malay Ojha | Published: 23 July 2026 at 04:43 PM
महाराष्ट्र के शिरडी में छात्रों के समर्थन में आयोजित मौन आंदोलन के दौरान वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे अचानक भावुक हो गए और फफक-फफककर रोने लगे। तबीयत ठीक नहीं होने के बावजूद वह आंदोलन में शामिल होने पहुंचे थे। दिल्ली में छात्रों और युवाओं के चल रहे प्रदर्शन के समर्थन में आयोजित इस आंदोलन में अन्ना हजारे कुछ देर तक बैठे रहे। उनके भावुक होने का दृश्य देखकर वहां मौजूद लोग भी गंभीर हो गए।
मौन आंदोलन का आयोजन शिरडी के वाडिया पार्क स्थित गांधी स्मारक में किया गया था। अन्ना हजारे की तबीयत ठीक नहीं थी, इसके बावजूद वह छात्रों के समर्थन में आयोजित इस कार्यक्रम में पहुंचे। वह कुछ समय तक वहां रुके और मौन आंदोलन में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। इसके बाद वह वहां से चले गए, लेकिन उनके जाने के बाद भी आंदोलन जारी रहा।
अन्ना के आंसुओं ने खींचा सबका ध्यान
आंदोलन के दौरान अन्ना हजारे के अचानक रो पड़ने से वहां का माहौल भावुक हो गया। वह काफी देर तक भावनाओं पर काबू नहीं रख सके। उनके समर्थकों और आंदोलन में शामिल लोगों के लिए यह पल बेहद भावुक करने वाला था। छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर अन्ना पहले भी अपनी चिंता जाहिर करते रहे हैं। इस बार उनका भावुक होना भी इसी चिंता से जोड़कर देखा जा रहा है।
छात्रों की आवाज सुनने की सरकार से अपील
इससे पहले बुधवार को अन्ना हजारे ने छात्रों के प्रदर्शन को लेकर सरकार से बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र में किसी भी समस्या का समाधान बातचीत और संवाद के जरिए होना चाहिए। अगर अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे छात्रों और युवाओं को बल प्रयोग का सामना करना पड़े, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता की बात है।
आंदोलन को सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला न मानें
अन्ना हजारे ने कहा था कि छात्रों के आंदोलन को केवल कानून-व्यवस्था की समस्या मानना ठीक नहीं है। उनके मुताबिक, युवा अपने भविष्य और अधिकारों को लेकर सड़कों पर अपनी आवाज उठा रहे हैं। ऐसे में उनकी समस्याओं को समझना और उनकी बात सुनना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने सरकार से अपील की कि छात्रों और आंदोलनकारियों के साथ बातचीत कर उनकी मांगों को गंभीरता से समझा जाए।
पेपर लीक और बेरोजगारी पर उठाए सवाल
अन्ना हजारे ने युवाओं से जुड़े कई अहम मुद्दों का भी जिक्र किया। उन्होंने पेपर लीक, बेरोजगारी और भर्ती प्रक्रिया में होने वाली देरी को गंभीर समस्या बताया। उनका कहना था कि इन मुद्दों का सीधा असर युवाओं के भविष्य पर पड़ता है। लंबे समय तक भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं होने और परीक्षाओं से जुड़े विवाद सामने आने से युवाओं में निराशा बढ़ती है।
युवाओं के भविष्य को लेकर जताई चिंता
वरिष्ठ समाजसेवी का कहना है कि जब युवा अपने भविष्य को लेकर सवाल उठा रहे हों, तब उनकी आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। युवाओं के लिए नौकरी और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया केवल रोजगार का मुद्दा नहीं है, बल्कि उनके पूरे भविष्य से जुड़ा सवाल है। ऐसे में सरकार को छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए उनके साथ सकारात्मक बातचीत करनी चाहिए।
बोले- दमन से किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं
अन्ना हजारे ने लोकतंत्र में संवाद की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी समस्या का स्थायी समाधान दमन के रास्ते से नहीं निकाला जा सकता। उनका मानना है कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत का रास्ता खुला रहना चाहिए। इससे विवाद को बढ़ने से रोकने के साथ-साथ किसी समाधान तक पहुंचने की संभावना भी बनती है।
गांधी के सत्याग्रह का दिया हवाला
छात्रों और युवाओं के आंदोलन को लेकर अपनी बात रखते हुए अन्ना हजारे ने महात्मा गांधी के सत्याग्रह का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना और संवाद के जरिए समाधान तलाशना जरूरी है। उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा तभी संभव है जब असहमति की आवाज को सुना जाए और समस्याओं का समाधान बातचीत से निकाला जाए।
शिरडी में जारी रहा मौन आंदोलन
शिरडी के गांधी स्मारक में आयोजित मौन आंदोलन में अन्ना हजारे की मौजूदगी ने कार्यक्रम को खास बना दिया। हालांकि, तबीयत खराब होने के कारण वह वहां ज्यादा देर तक नहीं रुके और कुछ समय बाद चले गए। उनके जाने के बावजूद आंदोलन में शामिल लोग अपनी जगह पर डटे रहे। छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर आयोजित इस मौन प्रदर्शन के जरिए शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का संदेश दिया गया।
अन्ना के भावुक होने से फिर चर्चा में आया छात्र आंदोलन
अन्ना हजारे के इस तरह भावुक होकर रोने से छात्रों के आंदोलन का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। एक तरफ छात्र और युवा अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं अन्ना हजारे जैसे वरिष्ठ समाजसेवी भी उनके साथ संवाद और शांतिपूर्ण समाधान की बात कर रहे हैं। अब देखना होगा कि सरकार छात्रों की मांगों पर किस तरह आगे बढ़ती है और आंदोलन को लेकर बातचीत का कोई रास्ता निकलता है या नहीं।
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