By Malay Ojha | Published: 23 July 2026 at 01:09 PM
दक्षिण-पश्चिम मानसून ने अब ऐसा रुख अपना लिया है, जिसने मौसम विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। ताजा सैटेलाइट तस्वीरों में उत्तर भारत से लेकर हिमालय, चीन और दक्षिण कोरिया तक करीब 7 हजार से 10 हजार किलोमीटर लंबी बादलों और बारिश की पट्टी दिखाई दे रही है। मौसम विशेषज्ञ इसे मानसून के बेहद सक्रिय दौर का संकेत मान रहे हैं। इसका असर आने वाले दिनों में उत्तर और मध्य भारत के बड़े हिस्से में देखने को मिल सकता है, जहां कई इलाकों में तेज से भारी बारिश होने की संभावना है।
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, इस समय एशिया के ऊपर एक बड़ा मानसून कन्वर्जेंस जोन सक्रिय है। आसान भाषा में समझें तो यह वह क्षेत्र है, जहां अलग-अलग दिशाओं से आने वाली नम हवाएं आपस में मिलती हैं। हिंद महासागर से उठने वाली नमी वाली मानसूनी हवाओं का टकराव एशिया के दूसरे मौसम तंत्रों से होने पर बादलों का एक लंबा गलियारा तैयार हुआ है।
इस पूरे क्षेत्र में लगातार नए बारिश वाले बादल बन रहे हैं और आगे बढ़ रहे हैं। यही कारण है कि एक ही समय में भारत के अलावा एशिया के कई दूसरे हिस्सों में भी बारिश की गतिविधियां तेज होती नजर आ रही हैं। मौसम की यह तस्वीर इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसका दायरा किसी एक राज्य या देश तक सीमित नहीं है।
दो दिनों में सामान्य से 180 फीसदी ज्यादा बारिश
देश में पिछले दो दिनों के दौरान हुई बारिश ने भी मानसून की सक्रियता को साफ तौर पर दिखाया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में बारिश सामान्य दैनिक औसत के मुकाबले करीब 170 से 180 फीसदी अधिक रही है। इसे इस मानसून सीजन का अब तक का सबसे सक्रिय दौर माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली-एनसीआर के कई हिस्सों में पिछले दिनों अच्छी बारिश दर्ज की गई है। कई इलाकों में लंबे समय से गर्मी और उमस से परेशान लोगों को बारिश से राहत मिली है। वहीं, बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र का असर भी दिखाई दे रहा है, जिसके चलते पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी है।
मानसून की शुरुआत कमजोर थी, अब तस्वीर बदल रही
इस साल मानसून की शुरुआत देश के अलग-अलग हिस्सों में एक जैसी नहीं रही। कई राज्यों में समय पर बारिश नहीं होने के कारण बारिश की कमी दर्ज की गई थी। कहीं बारिश कम हुई तो कहीं मानसूनी गतिविधियां अपेक्षा के मुताबिक मजबूत नहीं रहीं। लेकिन अब मौसम का मौजूदा रुख उस तस्वीर को बदलता नजर आ रहा है।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आने वाले दिनों में मानसून इसी तरह सक्रिय रहा तो जिन इलाकों में बारिश की कमी बनी हुई है, वहां उसकी भरपाई हो सकती है। हालांकि, बारिश का वितरण हर जगह एक जैसा रहेगा, यह जरूरी नहीं है। कुछ इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है, जबकि कुछ क्षेत्रों में अभी भी कम बारिश की स्थिति बनी रह सकती है।
किसानों के लिए बारिश लेकर आई राहत की उम्मीद
मानसून की सक्रियता का सबसे बड़ा फायदा खेती-किसानी को मिलने की उम्मीद है। उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में अच्छी बारिश होने से खेतों में नमी बढ़ेगी। इससे खरीफ फसलों की बुवाई और उनकी शुरुआती बढ़त को मदद मिल सकती है। जिन इलाकों में बारिश की कमी के कारण किसान चिंतित थे, वहां यह बारिश राहत लेकर आ सकती है।
इसके साथ ही जलाशयों, तालाबों और दूसरे जल स्रोतों में पानी का स्तर बढ़ने की संभावना है। बारिश का यह दौर लंबे समय में भूजल स्तर के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है। हालांकि, खेती के लिए बारिश तभी सबसे ज्यादा उपयोगी होती है, जब वह सही अंतराल पर और संतुलित मात्रा में हो। बहुत कम समय में अत्यधिक बारिश होने पर फसलों को नुकसान भी पहुंच सकता है।
राहत के साथ बढ़ी बाढ़ और जलभराव की चिंता
मानसून की तेज बारिश जहां किसानों और आम लोगों के लिए राहत लेकर आई है, वहीं इसके साथ कई तरह के खतरे भी बढ़ गए हैं। लगातार तेज बारिश होने पर निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है। शहरों में सड़कें डूबने और यातायात प्रभावित होने का खतरा रहता है। नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने पर बाढ़ की स्थिति भी बन सकती है।
पहाड़ी राज्यों में खतरा और ज्यादा गंभीर हो सकता है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण अचानक बाढ़, भूस्खलन और पहाड़ी सड़कों पर मलबा आने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखना और प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना जरूरी होगा।
पहाड़ी राज्यों में अतिरिक्त सतर्कता जरूरी
बारिश का यह दौर अगर लंबे समय तक जारी रहता है तो पहाड़ी इलाकों में इसका असर ज्यादा दिखाई दे सकता है। पहाड़ों पर लगातार बारिश होने से मिट्टी कमजोर होती है और भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। छोटी नदियों और बरसाती नालों में अचानक पानी बढ़ने से स्थानीय स्तर पर परेशानी पैदा हो सकती है।
यही वजह है कि प्रशासन और स्थानीय एजेंसियां ऐसे इलाकों पर विशेष नजर रख रही हैं, जहां भारी बारिश के कारण अचानक हालात बिगड़ सकते हैं। यात्रियों और स्थानीय लोगों को भी मौसम खराब होने की स्थिति में अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है।
भारत की बारिश सिर्फ भारत तक सीमित नहीं
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय दिखाई दे रही बादलों की विशाल पट्टी एक बड़े एशियाई मौसम तंत्र का हिस्सा है। यह मौसम प्रणाली भारत से आगे हिमालय और पूर्वी एशिया के कई हिस्सों तक फैली हुई है। इसका मतलब यह है कि भारतीय मानसून का असर केवल देश की सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र के मौसम पर इसका प्रभाव पड़ रहा है।
हिंद महासागर से आने वाली नम हवाएं, एशिया के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय मौसम प्रणालियां और वायुमंडल में बनने वाली परिस्थितियां मिलकर इस तरह के बड़े बादल तंत्र को जन्म देती हैं। इसी वजह से एक ही मौसम प्रणाली के प्रभाव में अलग-अलग देशों के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
आने वाले दिनों में क्या होगा?
मौसम विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर है कि मानसून की यह सक्रियता कितने दिनों तक बनी रहती है। अगर बारिश का यह सिलसिला आगे भी जारी रहता है तो उत्तर और मध्य भारत में बारिश की कमी काफी हद तक दूर हो सकती है। इससे खेती और जल संसाधनों को फायदा मिलेगा।
हालांकि, लगातार भारी बारिश होने पर बाढ़, जलभराव और भूस्खलन जैसी परेशानियां भी बढ़ सकती हैं। इसलिए आने वाले दिनों में देश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज राहत और चुनौती, दोनों लेकर आ सकता है। फिलहाल हजारों किलोमीटर लंबा यह बादलों का गलियारा इस बात का संकेत जरूर दे रहा है कि **दक्षिण-पश्चिम मानसून अपने सबसे सक्रिय दौर में पहुंचता दिखाई दे रहा है।
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