Monday, June 15, 2026

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ट्रंप की ईरान डील पर इजरायल ने फेरा पानी? लगातार हमलों से मिडिल-ईस्ट में फिर बढ़ा बड़े युद्ध का खतरा

By Malay Ojha | Published: 15 June 2026 at 12:41 PM

मिडिल-ईस्ट में तनाव कम करने की अमेरिकी कोशिशों को बड़ा झटका लगता दिख रहा है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन जहां ईरान के साथ समझौते के जरिए क्षेत्र में शांति बहाल करने का दावा कर रहा है, वहीं इजरायल का रुख पूरी तस्वीर बदलता नजर आ रहा है। इजरायली सेना की लगातार सैन्य कार्रवाई और हवाई हमलों ने इस आशंका को बढ़ा दिया है कि क्षेत्र एक बार फिर बड़े संघर्ष की ओर बढ़ सकता है।

अमेरिका की ओर से हाल के दिनों में ईरान के साथ तनाव कम करने के संकेत दिए गए थे। दावा किया गया कि परमाणु गतिविधियों और समुद्री मार्गों से जुड़े विवादों को लेकर दोनों पक्ष किसी समझ की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन इसी दौरान इजरायल ने अपने सुरक्षा अभियानों की रफ्तार कम करने के बजाय और तेज कर दी।

इजरायल क्यों नहीं दिखा भरोसे में?
इजरायल की सबसे बड़ी चिंता ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। नेतन्याहू सरकार का मानना है कि केवल समझौते या आश्वासनों के आधार पर ईरान पर भरोसा नहीं किया जा सकता। इजरायली नेतृत्व का तर्क है कि जब तक ईरान की परमाणु क्षमताओं को पूरी तरह निष्क्रिय नहीं किया जाता, तब तक किसी भी समझौते को स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता।

ट्रंप प्रशासन की योजना पर सवाल
अमेरिकी प्रशासन की कथित योजना में ईरान को कुछ आर्थिक राहत देने और बदले में उसके समृद्ध यूरेनियम भंडार को नियंत्रित करने जैसे प्रस्तावों की चर्चा रही है। इसके साथ ही क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य गतिविधियां बहाल करने पर भी जोर दिया गया है। हालांकि इन प्रयासों को लेकर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं।

ईरान को मजबूत होने का डर
इजरायल को आशंका है कि यदि प्रतिबंधों में राहत मिलती है तो ईरान को आर्थिक मजबूती हासिल हो सकती है। इजरायली सुरक्षा तंत्र का मानना है कि इससे तेहरान को भविष्य में अपनी सैन्य और रणनीतिक क्षमताएं बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। यही वजह है कि इजरायल किसी भी जल्दबाजी में हुए समझौते को लेकर सतर्क दिखाई दे रहा है।

हमले जारी, तनाव बरकरार
इजरायली सुरक्षा एजेंसियां और वायुसेना बीते दिनों में कई बार ईरान समर्थित ठिकानों को निशाना बना चुकी हैं। इन कार्रवाइयों ने यह संकेत दिया है कि इजरायल अपनी सुरक्षा नीति में किसी बड़े बदलाव के मूड में नहीं है। क्षेत्रीय जानकारों का मानना है कि ऐसे कदम कूटनीतिक प्रयासों को कमजोर कर सकते हैं।

नेतन्याहू का सख्त संदेश
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू लगातार यह कहते रहे हैं कि देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उनका मानना है कि किसी भी बाहरी दबाव या अंतरराष्ट्रीय पहल से ऊपर इजरायल की सुरक्षा जरूरतें हैं। यही वजह है कि सरकार ईरान को लेकर नरम रुख अपनाने से बच रही है।

क्या फिर बढ़ सकता है युद्ध?
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कूटनीतिक प्रक्रिया और सैन्य कार्रवाई समानांतर चलती रही तो हालात और जटिल हो सकते हैं। एक तरफ अमेरिका तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है, दूसरी तरफ इजरायल की सख्त रणनीति क्षेत्र में नई अनिश्चितता पैदा कर रही है। ऐसे में मिडिल-ईस्ट में स्थायी शांति की राह फिलहाल आसान नहीं दिख रही।

दुनिया की नजर आगे की घटनाओं पर
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच आगे क्या समीकरण बनते हैं। यदि किसी पक्ष ने आक्रामक कदम बढ़ाया तो इसका असर केवल क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।

Breaking Hindi News और ताज़ा अपडेट्स पाएं सबसे पहले Aryavarta Live पर। यहां आपको भारत, पाकिस्तान, अमेरिका समेत दुनिया भर की महत्वपूर्ण खबरें मिलेंगी। खेल, मनोरंजन, व्यापार, टेक्नोलॉजी, क्राइम, उत्तर प्रदेश और बिहार की हर बड़ी खबर पढ़ने के लिए जुड़े रहें Aryavarta Live के साथ।

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ट्रंप की ईरान डील पर इजरायल ने फेरा पानी? लगातार हमलों से मिडिल-ईस्ट में फिर बढ़ा बड़े युद्ध का खतरा

By Malay Ojha | Published: 15 June 2026 at 12:41 PM

मिडिल-ईस्ट में तनाव कम करने की अमेरिकी कोशिशों को बड़ा झटका लगता दिख रहा है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन जहां ईरान के साथ समझौते के जरिए क्षेत्र में शांति बहाल करने का दावा कर रहा है, वहीं इजरायल का रुख पूरी तस्वीर बदलता नजर आ रहा है। इजरायली सेना की लगातार सैन्य कार्रवाई और हवाई हमलों ने इस आशंका को बढ़ा दिया है कि क्षेत्र एक बार फिर बड़े संघर्ष की ओर बढ़ सकता है।

अमेरिका की ओर से हाल के दिनों में ईरान के साथ तनाव कम करने के संकेत दिए गए थे। दावा किया गया कि परमाणु गतिविधियों और समुद्री मार्गों से जुड़े विवादों को लेकर दोनों पक्ष किसी समझ की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन इसी दौरान इजरायल ने अपने सुरक्षा अभियानों की रफ्तार कम करने के बजाय और तेज कर दी।

इजरायल क्यों नहीं दिखा भरोसे में?
इजरायल की सबसे बड़ी चिंता ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। नेतन्याहू सरकार का मानना है कि केवल समझौते या आश्वासनों के आधार पर ईरान पर भरोसा नहीं किया जा सकता। इजरायली नेतृत्व का तर्क है कि जब तक ईरान की परमाणु क्षमताओं को पूरी तरह निष्क्रिय नहीं किया जाता, तब तक किसी भी समझौते को स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता।

ट्रंप प्रशासन की योजना पर सवाल
अमेरिकी प्रशासन की कथित योजना में ईरान को कुछ आर्थिक राहत देने और बदले में उसके समृद्ध यूरेनियम भंडार को नियंत्रित करने जैसे प्रस्तावों की चर्चा रही है। इसके साथ ही क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य गतिविधियां बहाल करने पर भी जोर दिया गया है। हालांकि इन प्रयासों को लेकर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं।

ईरान को मजबूत होने का डर
इजरायल को आशंका है कि यदि प्रतिबंधों में राहत मिलती है तो ईरान को आर्थिक मजबूती हासिल हो सकती है। इजरायली सुरक्षा तंत्र का मानना है कि इससे तेहरान को भविष्य में अपनी सैन्य और रणनीतिक क्षमताएं बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। यही वजह है कि इजरायल किसी भी जल्दबाजी में हुए समझौते को लेकर सतर्क दिखाई दे रहा है।

हमले जारी, तनाव बरकरार
इजरायली सुरक्षा एजेंसियां और वायुसेना बीते दिनों में कई बार ईरान समर्थित ठिकानों को निशाना बना चुकी हैं। इन कार्रवाइयों ने यह संकेत दिया है कि इजरायल अपनी सुरक्षा नीति में किसी बड़े बदलाव के मूड में नहीं है। क्षेत्रीय जानकारों का मानना है कि ऐसे कदम कूटनीतिक प्रयासों को कमजोर कर सकते हैं।

नेतन्याहू का सख्त संदेश
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू लगातार यह कहते रहे हैं कि देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उनका मानना है कि किसी भी बाहरी दबाव या अंतरराष्ट्रीय पहल से ऊपर इजरायल की सुरक्षा जरूरतें हैं। यही वजह है कि सरकार ईरान को लेकर नरम रुख अपनाने से बच रही है।

क्या फिर बढ़ सकता है युद्ध?
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कूटनीतिक प्रक्रिया और सैन्य कार्रवाई समानांतर चलती रही तो हालात और जटिल हो सकते हैं। एक तरफ अमेरिका तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है, दूसरी तरफ इजरायल की सख्त रणनीति क्षेत्र में नई अनिश्चितता पैदा कर रही है। ऐसे में मिडिल-ईस्ट में स्थायी शांति की राह फिलहाल आसान नहीं दिख रही।

दुनिया की नजर आगे की घटनाओं पर
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच आगे क्या समीकरण बनते हैं। यदि किसी पक्ष ने आक्रामक कदम बढ़ाया तो इसका असर केवल क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।

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