By Malay Ojha | Published: 24 June 2026 at 08:18 PM
हाजीपुर की 57 वर्षीय एक महिला, जो पिछले दस वर्षों से सांस फूलने की गंभीर समस्या से जूझ रही थीं, अब राहत की सांस ले पा रही हैं। हालत इतनी बिगड़ चुकी थी कि उन्हें हर महीने दो से तीन बार अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता था और कई बार उनकी जान बचाने के लिए कृत्रिम सांस देने वाली मशीन का सहारा लेना पड़ता था। लेकिन अब पटना के फोर्ड अस्पताल में हुई एक आधुनिक सूक्ष्म शल्य प्रक्रिया ने उनकी जिंदगी बदल दी है।
फोर्ड अस्पताल के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ और निदेशक डॉ. बी. बी. भारती की अगुवाई में यह जटिल प्रक्रिया पूरी की गई। इस टीम में डॉ. सुशांत पाठक, डॉ. सरोज, डॉ. विकास और डॉ. मनमोहन शामिल रहे। अस्पताल के मुताबिक यह पूरी प्रक्रिया सफल रही और मरीज की हालत में तेजी से सुधार हो रहा है।
बिना चीर-फाड़ हुआ हार्ट वाल्व का सफल बदलाव
डॉक्टरों ने महिला के हृदय का खराब वाल्व बिना पारंपरिक बड़ी सर्जरी के बदल दिया। यह प्रक्रिया आधुनिक सूक्ष्म शल्य तकनीक के जरिए की गई, जिसमें शरीर को कम नुकसान पहुंचता है और मरीज जल्दी ठीक होता है। अस्पताल के डॉक्टरों का दावा है कि यह तरीका पुराने खुले हृदय ऑपरेशन की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी साबित हो रहा है।
10 साल से अस्पतालों के चक्कर लगा रही थीं मरीज
मरीज लंबे समय से सांस लेने में परेशानी, थकान और सीने में भारीपन जैसी दिक्कतों से परेशान थीं। बीमारी की वजह से उनका सामान्य जीवन लगभग ठप हो गया था। हालत इतनी गंभीर हो गई थी कि परिवार को बार-बार अस्पताल का रुख करना पड़ता था। हर बार इलाज के बाद कुछ राहत मिलती, लेकिन समस्या फिर लौट आती थी।
जांच में सामने आई हृदय की गंभीर बीमारी
अस्पताल में विस्तृत जांच के दौरान पता चला कि महिला को महाधमनी वाल्व संकुचन की गंभीर समस्या थी। इस बीमारी में हृदय का वाल्व संकरा हो जाता है, जिससे शरीर में रक्त का प्रवाह बाधित होने लगता है। अगर समय पर इलाज न मिले तो यह बीमारी जानलेवा भी हो सकती है।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार पूरी प्रक्रिया सफल रही और मरीज की हालत अब पहले से काफी बेहतर है। डॉक्टरों का कहना है कि महिला अब सामान्य जीवन की ओर लौट रही हैं और उनकी सांस लेने की तकलीफ में बड़ा सुधार हुआ है।
आधुनिक तकनीक से कम हुआ जोखिम
अस्पताल के विशेषज्ञों ने बताया कि पहले ऐसी स्थिति में बड़े चीरे के साथ खुले हृदय की सर्जरी करनी पड़ती थी, जिसमें जोखिम ज्यादा होता था और मरीज को लंबे समय तक अस्पताल में रहना पड़ता था। लेकिन अब सूक्ष्म और न्यूनतम हस्तक्षेप वाली तकनीक ने इस इलाज को आसान बना दिया है।
तेजी से हो रही रिकवरी
डॉक्टरों के मुताबिक इस नई तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि मरीज जल्दी स्वस्थ हो जाता है। संक्रमण का खतरा कम होता है और दर्द भी कम होता है। यही वजह है कि अब जटिल हृदय रोगों के इलाज में ऐसी आधुनिक प्रक्रियाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।
बढ़ रही है ऐसे इलाज की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जीवनशैली और बढ़ती उम्र के साथ हृदय संबंधी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में समय पर जांच और सही इलाज बेहद जरूरी है। अगर शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज किया जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
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