Wednesday, June 24, 2026

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सरेंडर के बाद फायरिंग का सच क्या है? भरत तिवारी एनकाउंटर की होगी न्यायिक जांच, सच्चाई सामने लाएंगे रिटायर्ड जज

By Malay Ojha | Published: 24 June 2026 at 09:31 PM

भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में अब बड़ा कदम उठाया गया है। 17 जून को हुई इस घटना की न्यायिक जांच के लिए औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। इस पूरे मामले की जांच अब पटना हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में की जाएगी। सरकार ने बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

सरकार की मंजूरी के बाद अब यह साफ हो गया है कि मामले की जांच पूरी तरह न्यायिक स्तर पर होगी। रिटायर्ड जज विनोद कुमार सिन्हा को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे इस पूरे एनकाउंटर की सभी परिस्थितियों, सबूतों और दावों की गहराई से जांच करेंगे। सरकार का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जाएगी।

सरकार ने उठाया बड़ा कदम, विवाद के बीच फैसला
इस मामले को लेकर पिछले कई दिनों से लगातार राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सवाल उठ रहे थे। विपक्ष और कई संगठन इस एनकाउंटर पर गंभीर आरोप लगा रहे थे। इसी दबाव के बीच सरकार ने पहले ही न्यायिक जांच की घोषणा की थी, और अब औपचारिक रूप से जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

वीडियो सामने आने के बाद बढ़ा विवाद
घटना के दिन का एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें यह दावा किया जा रहा है कि भरत तिवारी ने पुलिस के सामने हथियार फेंककर सरेंडर कर दिया था। इसके बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि सरेंडर के बाद भी उन्हें गोली मार दी गई, जो पूरी तरह गलत है। इसी वीडियो ने मामले को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है।

पहले ही दिया गया था जांच का आदेश
इस विवाद के बीच सम्राट चौधरी ने 20 जून को अपने सोशल मीडिया पोस्ट में न्यायिक जांच की घोषणा की थी। उन्होंने लिखा था कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा कराई जाएगी, ताकि घटना के हर पहलू की सच्चाई सामने आ सके।

राजनीतिक बयानबाजी और अंदरूनी मतभेद
इस मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। एनडीए के ही कुछ नेताओं ने इस एनकाउंटर पर सवाल उठाए हैं, जिससे सरकार के भीतर मतभेद की स्थिति भी दिख रही है। वहीं, सरकार के कई नेताओं का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले न्यायिक जांच की रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए।

अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर
फिलहाल पूरा मामला न्यायिक जांच के दायरे में है और अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह रिपोर्ट ही तय करेगी कि घटना के पीछे वास्तविक सच्चाई क्या है और क्या पुलिस कार्रवाई सही थी या नहीं।

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सरेंडर के बाद फायरिंग का सच क्या है? भरत तिवारी एनकाउंटर की होगी न्यायिक जांच, सच्चाई सामने लाएंगे रिटायर्ड जज

By Malay Ojha | Published: 24 June 2026 at 09:31 PM

भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में अब बड़ा कदम उठाया गया है। 17 जून को हुई इस घटना की न्यायिक जांच के लिए औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। इस पूरे मामले की जांच अब पटना हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में की जाएगी। सरकार ने बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

सरकार की मंजूरी के बाद अब यह साफ हो गया है कि मामले की जांच पूरी तरह न्यायिक स्तर पर होगी। रिटायर्ड जज विनोद कुमार सिन्हा को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे इस पूरे एनकाउंटर की सभी परिस्थितियों, सबूतों और दावों की गहराई से जांच करेंगे। सरकार का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जाएगी।

सरकार ने उठाया बड़ा कदम, विवाद के बीच फैसला
इस मामले को लेकर पिछले कई दिनों से लगातार राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सवाल उठ रहे थे। विपक्ष और कई संगठन इस एनकाउंटर पर गंभीर आरोप लगा रहे थे। इसी दबाव के बीच सरकार ने पहले ही न्यायिक जांच की घोषणा की थी, और अब औपचारिक रूप से जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

वीडियो सामने आने के बाद बढ़ा विवाद
घटना के दिन का एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें यह दावा किया जा रहा है कि भरत तिवारी ने पुलिस के सामने हथियार फेंककर सरेंडर कर दिया था। इसके बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि सरेंडर के बाद भी उन्हें गोली मार दी गई, जो पूरी तरह गलत है। इसी वीडियो ने मामले को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है।

पहले ही दिया गया था जांच का आदेश
इस विवाद के बीच सम्राट चौधरी ने 20 जून को अपने सोशल मीडिया पोस्ट में न्यायिक जांच की घोषणा की थी। उन्होंने लिखा था कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा कराई जाएगी, ताकि घटना के हर पहलू की सच्चाई सामने आ सके।

राजनीतिक बयानबाजी और अंदरूनी मतभेद
इस मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। एनडीए के ही कुछ नेताओं ने इस एनकाउंटर पर सवाल उठाए हैं, जिससे सरकार के भीतर मतभेद की स्थिति भी दिख रही है। वहीं, सरकार के कई नेताओं का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले न्यायिक जांच की रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए।

अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर
फिलहाल पूरा मामला न्यायिक जांच के दायरे में है और अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह रिपोर्ट ही तय करेगी कि घटना के पीछे वास्तविक सच्चाई क्या है और क्या पुलिस कार्रवाई सही थी या नहीं।

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