By Malay Ojha | Published: 25 June 2026 at 12:12 PM
विदेश मंत्रालय ने बुधवार को एक बार फिर साफ कर दिया कि पासपोर्ट किसी की नागरिकता साबित करने वाला दस्तावेज नहीं है। मंत्रालय ने कहा कि पासपोर्ट सिर्फ यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला कागज है। इस बयान के बाद एक बार फिर देशभर में बहस तेज हो गई है। कई लोगों ने सवाल उठाया है कि जब पासपोर्ट बनाने में लंबी जांच और पुलिस पड़ताल होती है, तो फिर उसे नागरिकता का प्रमाण क्यों नहीं माना जाता।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह कोई नया नियम नहीं है। यह व्यवस्था पहले से लागू है। लेकिन विदेश मंत्रालय की ओर से दोबारा इसे साफ किए जाने के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा तेज हो गई। कई लोगों का कहना है कि आम जनता के बीच इसे लेकर भ्रम पैदा हो सकता है।
जावेद अख्तर और आदित्य ठाकरे ने उठाए सवाल
मामले पर गीतकार जावेद अख्तर और नेता आदित्य ठाकरे समेत कई लोगों ने सवाल उठाए। उनका कहना है कि पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया बेहद सख्त होती है। इसमें पहचान की जांच होती है, पुलिस सत्यापन होता है और कई स्तरों पर कागज देखे जाते हैं। ऐसे में इसे नागरिकता से अलग रखना लोगों को उलझन में डाल सकता है।
अदालत पहले ही दे चुकी है साफ संदेश
यह मामला नया नहीं है। करीब 13 साल पहले अदालत ने भी इस पर विस्तार से अपनी बात रखी थी। 2013 में आए एक फैसले में अदालत ने साफ कहा था कि आधार कार्ड, पासपोर्ट और जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज अपने आप में नागरिकता साबित नहीं करते।
जन्म के आधार पर नागरिकता का नियम क्या कहता है
अदालत ने अपने फैसले में नागरिकता कानून का हवाला देते हुए कहा था कि यदि किसी का जन्म 1 जुलाई 1987 के बाद हुआ है, तो केवल भारत में जन्म लेने से नागरिकता नहीं मिलती। इसके लिए यह जरूरी है कि माता-पिता में से कम से कम एक भारतीय नागरिक हो।
घुसपैठ से जुड़े मामलों में भी यही नियम लागू
अदालत ने यह भी कहा था कि अगर माता-पिता में एक भारतीय है लेकिन दूसरा अवैध रूप से देश में आया है, तब भी नागरिकता का अधिकार सीधे तौर पर नहीं बनता। इस नियम का इस्तेमाल घुसपैठ से जुड़े मामलों में भी किया गया था।
जन्म प्रमाण पत्र और आधार क्या साबित करते हैं
सरकारी पक्ष की ओर से अदालत में कहा गया था कि जन्म प्रमाण पत्र सिर्फ यह बताता है कि व्यक्ति का जन्म कहां हुआ। आधार कार्ड यह दिखाता है कि व्यक्ति देश में रह रहा है। लेकिन ये दस्तावेज यह साबित नहीं करते कि वह कानूनी रूप से देश का नागरिक है।
पासपोर्ट कानून में भी है यह व्यवस्था
पासपोर्ट कानून 1967 के तहत कुछ मामलों में ऐसे लोगों को भी यात्रा दस्तावेज दिया जा सकता है जो देश के नागरिक नहीं हैं। यही वजह है कि सरकार बार-बार कहती रही है कि पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।
आम लोगों में क्यों है भ्रम
आम तौर पर लोग मानते हैं कि पासपोर्ट सबसे मजबूत पहचान पत्र है। यही वजह है कि जब सरकार कहती है कि यह नागरिकता का सबूत नहीं है, तो हैरानी होना स्वाभाविक है। अब इस बयान के बाद एक बार फिर नागरिकता और पहचान के बीच का फर्क चर्चा का विषय बन गया है।
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