Thursday, June 25, 2026

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NEET सॉल्वर गैंग में फिर सामने आया पीएमसीएच का नाम, पुराने घोटालों का रिकॉर्ड खोल रहा बड़ा राज

By Malay Ojha | Published: 25 June 2026 at 12:35 PM

नीट परीक्षा में सॉल्वर गैंग के खुलासे के बाद एक बार फिर पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल का नाम चर्चा में है। शुरुआती जांच में सामने आ रहा है कि परीक्षा में दूसरे अभ्यर्थियों की जगह बैठने और फर्जी तरीके से पास कराने वाले नेटवर्क में मेडिकल छात्रों की भूमिका रही है। यह पहली बार नहीं है जब इस तरह के मामले में पीएमसीएच का नाम सामने आया हो।

मेडिकल परीक्षाओं में गड़बड़ी और फर्जीवाड़े का इतिहास पीएमसीएच से नया नहीं जुड़ा है। पिछले एक दशक में देश के अलग-अलग राज्यों की पुलिस कई बार यहां पहुंच चुकी है। कई छात्रों से पूछताछ हुई, कुछ गिरफ्तार भी हुए, लेकिन सख्त कार्रवाई की कमी के कारण यह सिलसिला रुकता नहीं दिखा।

विशेषज्ञ बोले- मोटी रकम के लालच में फंसते हैं छात्र
बिहार के वरिष्ठ चिकित्सक और चिकित्सा शिक्षा से जुड़े रहे डॉ अजय कुमार का कहना है कि मेडिकल परीक्षा के इस खेल में इतनी बड़ी रकम लगती है कि कई छात्र लालच में फंस जाते हैं। उनका मानना है कि अगर शुरुआत में ही कठोर कार्रवाई हो जाए तो इस तरह के गिरोहों की कमर टूट सकती है।

व्यापम से लेकर पेपर लीक तक जुड़ता रहा नाम
साल 2015 में व्यापम घोटाले की जांच के दौरान मध्य प्रदेश की जांच टीम पटना और मुजफ्फरपुर मेडिकल कॉलेज पहुंची थी। उस समय बिहार के कई छात्रों पर शक जताया गया था। टीम ने घंटों पूछताछ की थी और कई अहम दस्तावेज खंगाले थे।

हरियाणा और तेलंगाना पुलिस भी पहुंच चुकी है
इसी साल हरियाणा पुलिस भी एक छात्र की तलाश में पीएमसीएच आई थी। इसके बाद 2016 में मेडिकल पेपर लीक मामले में तेलंगाना पुलिस ने पटना पुलिस के साथ मिलकर जांच की थी। उस दौरान एक आरोपी छात्र से भी पूछताछ हुई थी।

राजधानी की अपराध शाखा ने भी की थी गिरफ्तारी
2017 में राजधानी की अपराध शाखा ने पीएमसीएच के रेडियोलॉजी विभाग के एक स्नातकोत्तर छात्र को परीक्षा में फर्जीवाड़े के आरोप में गिरफ्तार किया था। उस समय भी जांच एजेंसियों ने कई बार कॉलेज परिसर का दौरा किया था।

पुराने ‘मुन्ना भाई’ मॉडल की फिर चर्चा
बिहार में रंजीत डॉन का नाम मेडिकल परीक्षा माफिया के तौर पर लंबे समय तक चर्चा में रहा है। नब्बे के दशक के बाद से मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में सॉल्वर बैठाने और सीट दिलाने का खेल लगातार चलता रहा। अब नीट में फिर ऐसे नेटवर्क के सामने आने से पुराने मामले याद किए जा रहे हैं।

विपक्ष ने सरकार पर लगाए संरक्षण के आरोप
मुख्य विपक्षी दल ने आरोप लगाया है कि इस तरह के गिरोह बिना राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण के नहीं चल सकते। विपक्ष का कहना है कि अगर पहले ही कठोर कार्रवाई होती तो आज यह स्थिति नहीं बनती।

सरकार बोली- दोषी किसी भी हाल में नहीं बचेंगे
सरकार की ओर से कहा गया है कि पूरे मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। जांच एजेंसियां सक्रिय हैं और जिन छात्रों या लोगों की भूमिका सामने आएगी, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

नीट परीक्षा के दिन 47 छात्र रहे अनुपस्थित
इस बार का सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि नीट परीक्षा के दिन पीएमसीएच के 47 छात्र अनुपस्थित बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसियां अब इस कड़ी को भी खंगाल रही हैं कि कहीं इन छात्रों का इस्तेमाल दूसरे परीक्षार्थियों की जगह बैठाने में तो नहीं हुआ।

बड़ा सवाल- क्या इस बार टूटेगा सॉल्वर गैंग का नेटवर्क?
हर बार की तरह इस बार भी कार्रवाई शुरू हो चुकी है, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार दोषियों को सजा मिलेगी या फिर मामला समय के साथ ठंडा पड़ जाएगा। क्योंकि अगर मेडिकल के भविष्य के डॉक्टर ही इस खेल में शामिल होंगे, तो पूरे स्वास्थ्य तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे।

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NEET सॉल्वर गैंग में फिर सामने आया पीएमसीएच का नाम, पुराने घोटालों का रिकॉर्ड खोल रहा बड़ा राज

By Malay Ojha | Published: 25 June 2026 at 12:35 PM

नीट परीक्षा में सॉल्वर गैंग के खुलासे के बाद एक बार फिर पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल का नाम चर्चा में है। शुरुआती जांच में सामने आ रहा है कि परीक्षा में दूसरे अभ्यर्थियों की जगह बैठने और फर्जी तरीके से पास कराने वाले नेटवर्क में मेडिकल छात्रों की भूमिका रही है। यह पहली बार नहीं है जब इस तरह के मामले में पीएमसीएच का नाम सामने आया हो।

मेडिकल परीक्षाओं में गड़बड़ी और फर्जीवाड़े का इतिहास पीएमसीएच से नया नहीं जुड़ा है। पिछले एक दशक में देश के अलग-अलग राज्यों की पुलिस कई बार यहां पहुंच चुकी है। कई छात्रों से पूछताछ हुई, कुछ गिरफ्तार भी हुए, लेकिन सख्त कार्रवाई की कमी के कारण यह सिलसिला रुकता नहीं दिखा।

विशेषज्ञ बोले- मोटी रकम के लालच में फंसते हैं छात्र
बिहार के वरिष्ठ चिकित्सक और चिकित्सा शिक्षा से जुड़े रहे डॉ अजय कुमार का कहना है कि मेडिकल परीक्षा के इस खेल में इतनी बड़ी रकम लगती है कि कई छात्र लालच में फंस जाते हैं। उनका मानना है कि अगर शुरुआत में ही कठोर कार्रवाई हो जाए तो इस तरह के गिरोहों की कमर टूट सकती है।

व्यापम से लेकर पेपर लीक तक जुड़ता रहा नाम
साल 2015 में व्यापम घोटाले की जांच के दौरान मध्य प्रदेश की जांच टीम पटना और मुजफ्फरपुर मेडिकल कॉलेज पहुंची थी। उस समय बिहार के कई छात्रों पर शक जताया गया था। टीम ने घंटों पूछताछ की थी और कई अहम दस्तावेज खंगाले थे।

हरियाणा और तेलंगाना पुलिस भी पहुंच चुकी है
इसी साल हरियाणा पुलिस भी एक छात्र की तलाश में पीएमसीएच आई थी। इसके बाद 2016 में मेडिकल पेपर लीक मामले में तेलंगाना पुलिस ने पटना पुलिस के साथ मिलकर जांच की थी। उस दौरान एक आरोपी छात्र से भी पूछताछ हुई थी।

राजधानी की अपराध शाखा ने भी की थी गिरफ्तारी
2017 में राजधानी की अपराध शाखा ने पीएमसीएच के रेडियोलॉजी विभाग के एक स्नातकोत्तर छात्र को परीक्षा में फर्जीवाड़े के आरोप में गिरफ्तार किया था। उस समय भी जांच एजेंसियों ने कई बार कॉलेज परिसर का दौरा किया था।

पुराने ‘मुन्ना भाई’ मॉडल की फिर चर्चा
बिहार में रंजीत डॉन का नाम मेडिकल परीक्षा माफिया के तौर पर लंबे समय तक चर्चा में रहा है। नब्बे के दशक के बाद से मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में सॉल्वर बैठाने और सीट दिलाने का खेल लगातार चलता रहा। अब नीट में फिर ऐसे नेटवर्क के सामने आने से पुराने मामले याद किए जा रहे हैं।

विपक्ष ने सरकार पर लगाए संरक्षण के आरोप
मुख्य विपक्षी दल ने आरोप लगाया है कि इस तरह के गिरोह बिना राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण के नहीं चल सकते। विपक्ष का कहना है कि अगर पहले ही कठोर कार्रवाई होती तो आज यह स्थिति नहीं बनती।

सरकार बोली- दोषी किसी भी हाल में नहीं बचेंगे
सरकार की ओर से कहा गया है कि पूरे मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। जांच एजेंसियां सक्रिय हैं और जिन छात्रों या लोगों की भूमिका सामने आएगी, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

नीट परीक्षा के दिन 47 छात्र रहे अनुपस्थित
इस बार का सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि नीट परीक्षा के दिन पीएमसीएच के 47 छात्र अनुपस्थित बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसियां अब इस कड़ी को भी खंगाल रही हैं कि कहीं इन छात्रों का इस्तेमाल दूसरे परीक्षार्थियों की जगह बैठाने में तो नहीं हुआ।

बड़ा सवाल- क्या इस बार टूटेगा सॉल्वर गैंग का नेटवर्क?
हर बार की तरह इस बार भी कार्रवाई शुरू हो चुकी है, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार दोषियों को सजा मिलेगी या फिर मामला समय के साथ ठंडा पड़ जाएगा। क्योंकि अगर मेडिकल के भविष्य के डॉक्टर ही इस खेल में शामिल होंगे, तो पूरे स्वास्थ्य तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे।

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