Saturday, June 27, 2026

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मंत्री को अपने ही सचिव से मांगना पड़ा मुआवजा! राजद ने कहा- बिहार में अफसर चला रहे सरकार

By Malay Ojha | Published: 27 June 2026 at 01:06 PM

बिहार में विक्रमशिला पुल पर हुई एक व्यक्ति की मौत के मामले में मुआवजे की मांग को लेकर पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर शैलेंद्र कुमार द्वारा अपने ही विभाग के सचिव को पत्र लिखे जाने पर सियासत गरमा गई है। राष्ट्रीय जनता दल ने इसे सरकार की कार्यशैली पर बड़ा सवाल बताते हुए दावा किया है कि राज्य में मंत्री नहीं, बल्कि अधिकारी सरकार चला रहे हैं।

बिहार प्रदेश राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता एजाज अहमद ने शनिवार को बयान जारी कर कहा कि यह पहली बार देखने को मिल रहा है जब किसी मंत्री को अपने ही विभाग के सचिव को पत्र लिखकर मुआवजे की मांग करनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि इस घटना ने सरकार के अंदर की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया है।

‘मंत्री सिर्फ नाम के लिए हैं’
एजाज अहमद ने आरोप लगाया कि बिहार में मंत्री केवल नाम के लिए हैं और उनके पास कोई वास्तविक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर किसी विभाग का मंत्री भी अपने सचिव से आवेदन देकर कार्रवाई की मांग कर रहा है तो इससे साफ हो जाता है कि सरकार का संचालन अधिकारियों और पदाधिकारियों के भरोसे हो रहा है।

विक्रमशिला पुल हादसे का दिया हवाला
राजद प्रवक्ता ने कहा कि विक्रमशिला पुल पर एक व्यक्ति की मौत के बाद पीड़ित परिवार को मुआवजा दिलाने के लिए मंत्री ने अपने विभाग के सचिव को पत्र लिखा। यह मामला दिखाता है कि सरकार के भीतर निर्णय लेने की शक्ति मंत्रियों के हाथ में नहीं रह गई है।

सम्राट चौधरी की सरकार पर उठाए सवाल
एजाज अहमद ने कहा कि मौजूदा सरकार में व्यवस्था पूरी तरह अफसरशाही के भरोसे चल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार में मंत्री केवल औपचारिक भूमिका निभा रहे हैं और प्रशासनिक फैसले अधिकारियों के स्तर पर ही लिए जा रहे हैं।

सरकार की कार्यशैली पर बहस तेज
राजद के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। विपक्ष इसे सरकार की कमजोरी और मंत्रियों की अधिकारहीनता का उदाहरण बता रहा है। वहीं, सत्तापक्ष की ओर से इस मुद्दे पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

पहले भी उठते रहे हैं ऐसे सवाल
बिहार की राजनीति में समय-समय पर यह सवाल उठता रहा है कि क्या नौकरशाही का दखल बढ़ता जा रहा है और क्या मंत्री अपने विभागों में पूरी तरह स्वतंत्र हैं। विक्रमशिला पुल हादसे से जुड़ा यह मामला एक बार फिर उसी बहस को केंद्र में ले आया है।

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मंत्री को अपने ही सचिव से मांगना पड़ा मुआवजा! राजद ने कहा- बिहार में अफसर चला रहे सरकार

By Malay Ojha | Published: 27 June 2026 at 01:06 PM

बिहार में विक्रमशिला पुल पर हुई एक व्यक्ति की मौत के मामले में मुआवजे की मांग को लेकर पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर शैलेंद्र कुमार द्वारा अपने ही विभाग के सचिव को पत्र लिखे जाने पर सियासत गरमा गई है। राष्ट्रीय जनता दल ने इसे सरकार की कार्यशैली पर बड़ा सवाल बताते हुए दावा किया है कि राज्य में मंत्री नहीं, बल्कि अधिकारी सरकार चला रहे हैं।

बिहार प्रदेश राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता एजाज अहमद ने शनिवार को बयान जारी कर कहा कि यह पहली बार देखने को मिल रहा है जब किसी मंत्री को अपने ही विभाग के सचिव को पत्र लिखकर मुआवजे की मांग करनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि इस घटना ने सरकार के अंदर की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया है।

‘मंत्री सिर्फ नाम के लिए हैं’
एजाज अहमद ने आरोप लगाया कि बिहार में मंत्री केवल नाम के लिए हैं और उनके पास कोई वास्तविक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर किसी विभाग का मंत्री भी अपने सचिव से आवेदन देकर कार्रवाई की मांग कर रहा है तो इससे साफ हो जाता है कि सरकार का संचालन अधिकारियों और पदाधिकारियों के भरोसे हो रहा है।

विक्रमशिला पुल हादसे का दिया हवाला
राजद प्रवक्ता ने कहा कि विक्रमशिला पुल पर एक व्यक्ति की मौत के बाद पीड़ित परिवार को मुआवजा दिलाने के लिए मंत्री ने अपने विभाग के सचिव को पत्र लिखा। यह मामला दिखाता है कि सरकार के भीतर निर्णय लेने की शक्ति मंत्रियों के हाथ में नहीं रह गई है।

सम्राट चौधरी की सरकार पर उठाए सवाल
एजाज अहमद ने कहा कि मौजूदा सरकार में व्यवस्था पूरी तरह अफसरशाही के भरोसे चल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार में मंत्री केवल औपचारिक भूमिका निभा रहे हैं और प्रशासनिक फैसले अधिकारियों के स्तर पर ही लिए जा रहे हैं।

सरकार की कार्यशैली पर बहस तेज
राजद के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। विपक्ष इसे सरकार की कमजोरी और मंत्रियों की अधिकारहीनता का उदाहरण बता रहा है। वहीं, सत्तापक्ष की ओर से इस मुद्दे पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

पहले भी उठते रहे हैं ऐसे सवाल
बिहार की राजनीति में समय-समय पर यह सवाल उठता रहा है कि क्या नौकरशाही का दखल बढ़ता जा रहा है और क्या मंत्री अपने विभागों में पूरी तरह स्वतंत्र हैं। विक्रमशिला पुल हादसे से जुड़ा यह मामला एक बार फिर उसी बहस को केंद्र में ले आया है।

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