Sunday, June 28, 2026

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सीजफायर के बीच भड़की नई जंग! ईरान का दावा- अमेरिका के 8 सैन्य ठिकानों पर दागीं मिसाइलें, ट्रंप को खुली चुनौती

By Malay Ojha | Published: 28 June 2026 at 09:24 AM

पश्चिम एशिया में एक बार फिर हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि उसने अमेरिका के आठ अहम सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से बड़ा हमला किया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सीजफायर का उल्लंघन नहीं करने की चेतावनी दी थी। ईरान ने इसे अमेरिका की कथित नई आक्रामकता का “निर्णायक जवाब” बताया है।

ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स यानी आईआरजीसी के मुताबिक यह सैन्य अभियान रात करीब दो बजे से तीन बजे के बीच चलाया गया। दावा किया गया है कि नौसेना और एयरोस्पेस फोर्स ने मिलकर इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। ईरान के निशाने पर अमेरिका के कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने थे।

किन-किन ठिकानों को बनाया गया निशाना?
आईआरजीसी का कहना है कि हमले में कुवैत स्थित अली अल सलेम एयरबेस और बहरीन में मौजूद अमेरिकी पांचवें बेड़े के मुख्यालय समेत कुल आठ सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। ईरान ने दावा किया कि बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन की मदद से इन ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। हालांकि अमेरिका की ओर से अभी तक इन दावों की पुष्टि नहीं की गई है।

ईरान ने क्यों किया हमला?
ईरान का आरोप है कि उससे पहले अमेरिका ने उसके समुद्री इलाके में मौजूद पांच तटीय चौकियों पर हमला किया था। तेहरान का कहना है कि एक संदिग्ध जहाज को रोकने की कार्रवाई का बहाना बनाकर उसके ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसके जवाब में यह सैन्य कार्रवाई की गई।

होर्मुज पर ईरान का बड़ा दावा
ईरान ने यह भी कहा है कि अब होर्मुज से गुजरने वाले समुद्री रास्ते की सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी उसके हाथ में है। आईआरजीसी ने चेतावनी दी है कि अगर कोई जहाज तय नियमों का उल्लंघन करेगा तो उसके खिलाफ पहले से ज्यादा सख्त कदम उठाए जाएंगे। यह बयान ऐसे समय आया है, जब दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं होर्मुज के रास्ते होने वाले तेल व्यापार पर नजर बनाए हुए हैं।

अमेरिका ने भी किया जवाबी हमला
उधर अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमान ने कहा है कि उसने ईरान के भीतर कुछ ठिकानों पर कार्रवाई की है। अमेरिका का दावा है कि यह कदम एक व्यापारिक तेल टैंकर पर हुए हमले के जवाब में उठाया गया। हालांकि दोनों देशों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।

ईरान में धमाकों की खबर
ईरान के सरकारी चैनल ने बताया कि होर्मोज़गान प्रांत के सिरिक इलाके में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक एक दूरसंचार टावर को निशाना बनाया गया है। इसके अलावा क़ेशम द्वीप से भी धमाकों की खबरें सामने आई हैं, लेकिन नुकसान की पूरी जानकारी अभी नहीं मिल पाई है।

एक जहाज से शुरू हुआ नया विवाद
बताया जा रहा है कि पूरा विवाद शुक्रवार की एक घटना के बाद बढ़ा। ईरानी नौसेना ने होर्मुज से गुजर रहे एक जहाज पर चेतावनी के तौर पर फायरिंग की थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव तेजी से बढ़ गया और फिर जवाबी कार्रवाई का सिलसिला शुरू हो गया।

सीजफायर पर भी आमने-सामने
ईरान का आरोप है कि अमेरिका कई बार उस सीजफायर का उल्लंघन कर चुका है, जिसकी घोषणा खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की थी। तेहरान का कहना है कि वह पहले भी कई बार जवाबी कार्रवाई कर चुका है और जरूरत पड़ने पर आगे भी अपने हितों की रक्षा करेगा।

क्या बढ़ सकता है बड़ा संकट?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई का यह दौर जारी रहा तो पूरे पश्चिम एशिया में बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव दुनिया भर में तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार पर असर डाल सकता है।

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सीजफायर के बीच भड़की नई जंग! ईरान का दावा- अमेरिका के 8 सैन्य ठिकानों पर दागीं मिसाइलें, ट्रंप को खुली चुनौती

By Malay Ojha | Published: 28 June 2026 at 09:24 AM

पश्चिम एशिया में एक बार फिर हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि उसने अमेरिका के आठ अहम सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से बड़ा हमला किया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सीजफायर का उल्लंघन नहीं करने की चेतावनी दी थी। ईरान ने इसे अमेरिका की कथित नई आक्रामकता का “निर्णायक जवाब” बताया है।

ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स यानी आईआरजीसी के मुताबिक यह सैन्य अभियान रात करीब दो बजे से तीन बजे के बीच चलाया गया। दावा किया गया है कि नौसेना और एयरोस्पेस फोर्स ने मिलकर इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। ईरान के निशाने पर अमेरिका के कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने थे।

किन-किन ठिकानों को बनाया गया निशाना?
आईआरजीसी का कहना है कि हमले में कुवैत स्थित अली अल सलेम एयरबेस और बहरीन में मौजूद अमेरिकी पांचवें बेड़े के मुख्यालय समेत कुल आठ सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। ईरान ने दावा किया कि बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन की मदद से इन ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। हालांकि अमेरिका की ओर से अभी तक इन दावों की पुष्टि नहीं की गई है।

ईरान ने क्यों किया हमला?
ईरान का आरोप है कि उससे पहले अमेरिका ने उसके समुद्री इलाके में मौजूद पांच तटीय चौकियों पर हमला किया था। तेहरान का कहना है कि एक संदिग्ध जहाज को रोकने की कार्रवाई का बहाना बनाकर उसके ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसके जवाब में यह सैन्य कार्रवाई की गई।

होर्मुज पर ईरान का बड़ा दावा
ईरान ने यह भी कहा है कि अब होर्मुज से गुजरने वाले समुद्री रास्ते की सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी उसके हाथ में है। आईआरजीसी ने चेतावनी दी है कि अगर कोई जहाज तय नियमों का उल्लंघन करेगा तो उसके खिलाफ पहले से ज्यादा सख्त कदम उठाए जाएंगे। यह बयान ऐसे समय आया है, जब दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं होर्मुज के रास्ते होने वाले तेल व्यापार पर नजर बनाए हुए हैं।

अमेरिका ने भी किया जवाबी हमला
उधर अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमान ने कहा है कि उसने ईरान के भीतर कुछ ठिकानों पर कार्रवाई की है। अमेरिका का दावा है कि यह कदम एक व्यापारिक तेल टैंकर पर हुए हमले के जवाब में उठाया गया। हालांकि दोनों देशों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।

ईरान में धमाकों की खबर
ईरान के सरकारी चैनल ने बताया कि होर्मोज़गान प्रांत के सिरिक इलाके में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक एक दूरसंचार टावर को निशाना बनाया गया है। इसके अलावा क़ेशम द्वीप से भी धमाकों की खबरें सामने आई हैं, लेकिन नुकसान की पूरी जानकारी अभी नहीं मिल पाई है।

एक जहाज से शुरू हुआ नया विवाद
बताया जा रहा है कि पूरा विवाद शुक्रवार की एक घटना के बाद बढ़ा। ईरानी नौसेना ने होर्मुज से गुजर रहे एक जहाज पर चेतावनी के तौर पर फायरिंग की थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव तेजी से बढ़ गया और फिर जवाबी कार्रवाई का सिलसिला शुरू हो गया।

सीजफायर पर भी आमने-सामने
ईरान का आरोप है कि अमेरिका कई बार उस सीजफायर का उल्लंघन कर चुका है, जिसकी घोषणा खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की थी। तेहरान का कहना है कि वह पहले भी कई बार जवाबी कार्रवाई कर चुका है और जरूरत पड़ने पर आगे भी अपने हितों की रक्षा करेगा।

क्या बढ़ सकता है बड़ा संकट?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई का यह दौर जारी रहा तो पूरे पश्चिम एशिया में बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव दुनिया भर में तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार पर असर डाल सकता है।

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