By Malay Ojha | Published: 29 June 2026 at 07:48 AM
मध्य पूर्व में एक बार फिर बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका और ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ते तनाव को कम करने के लिए बातचीत का रास्ता चुना है। दोनों देशों के प्रतिनिधि मंगलवार को कतर की राजधानी दोहा में मुलाकात करेंगे। इस दौरान समुद्री मार्ग पर नियंत्रण, जहाजों की आवाजाही और भविष्य की व्यवस्था पर चर्चा होने की संभावना है।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल दोनों देशों ने किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला किया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब कुछ दिन पहले तक दोनों देशों के बीच सीधा टकराव देखने को मिल रहा था। अधिकारियों का कहना है कि बातचीत जारी रहने तक जहाजों की आवाजाही पर किसी तरह की रोक नहीं लगाई जाएगी।
फिलहाल पीछे हटे दोनों देश
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका और ईरान दोनों ने स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए एक कदम पीछे हटने पर सहमति बनाई है। इसका सबसे बड़ा फायदा अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को होगा, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है।
ट्रंप की धमकी ने बढ़ाई थी चिंता
इस नाजुक संघर्ष-विराम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि यदि ईरान समझौते का पालन नहीं करता है, तो सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू की जा सकती है। ट्रंप के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ गई थी कि कहीं यह संघर्ष फिर से युद्ध में न बदल जाए।
ईरान ने किया बड़ा दावा
इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दावा किया है कि शुरुआती शांति समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री यातायात के प्रबंधन का अधिकार ईरान के पास है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की यह दलील सही नहीं है कि ईरान को इस जलमार्ग पर कोई नियंत्रण हासिल नहीं है।
जहाजों के रास्ते को लेकर भी विवाद
ईरान ने हाल के दिनों में कुछ जहाजों को अपने तट के करीब एक अलग समुद्री मार्ग इस्तेमाल करने की सलाह दी थी। तेहरान का कहना है कि सुरक्षा कारणों से यह कदम जरूरी है। हालांकि अमेरिका और कई अन्य देशों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के होनी चाहिए।
क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में शामिल है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ी मात्रा में कच्चा तेल इसी रास्ते से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव सीधे तौर पर वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित कर सकता है।
दुनिया की नजर अब दोहा बैठक पर
अब पूरी दुनिया की नजर मंगलवार को दोहा में होने वाली बैठक पर टिकी है। अगर दोनों देश किसी स्थायी समझौते पर पहुंचते हैं, तो इससे मध्य पूर्व में तनाव कम हो सकता है और वैश्विक बाजारों को भी राहत मिलेगी। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी अभी भी बनी हुई है और आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, यह बैठक के नतीजों पर निर्भर करेगा।
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