By Malay Ojha | Published: 09 July 2026 at 10:44 AM
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब और खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी सेना ने मशहद जाने वाले दो अहम रेलवे पुलों को निशाना बनाया है। ईरान का दावा है कि यह हमला ऐसे समय किया गया, जब देश के दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की तैयारियां चल रही थीं। इस आरोप के बाद पूरे पश्चिम एशिया में हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिकी सेना ने दक्षिणी इलाकों में सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ पूर्वी क्षेत्र में मौजूद दो ऐसे रेलवे पुलों पर भी हमला किया, जिनके जरिए बड़ी संख्या में लोग मशहद पहुंचते हैं। संगठन का आरोप है कि इन पुलों को निशाना बनाने का उद्देश्य अंतिम संस्कार के कार्यक्रम को प्रभावित करना था।
अमेरिका पर लगाए गंभीर आरोप
आईआरजीसी ने अमेरिका को “विश्वासघाती” बताते हुए कहा कि ऐसे हमलों से ईरान झुकने वाला नहीं है। संगठन ने चेतावनी दी कि इस कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा और अमेरिकी सैन्य गतिविधियों का उचित समय पर जवाब मिलेगा। आईआरजीसी ने कहा कि इस तरह के हमले ईरानी जनता के हौसले को कमजोर नहीं, बल्कि और मजबूत करेंगे।
रेलवे पुल पर तड़के हुआ हमला
ईरानी मीडिया के अनुसार, गोलिस्तान प्रांत में स्थित आक तेकेह खान रेलवे पुल पर तड़के विस्फोट हुआ। सरकारी समाचार एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया कि पुल के पास एक प्रक्षेप्य गिरा, जिसके बाद राहत और बचाव दल को मौके पर भेजा गया। आईआरजीसी की क्षेत्रीय इकाई का दावा है कि इस हमले में क्रूज मिसाइल का इस्तेमाल किया गया। हालांकि अब तक किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है।
दो धमाकों की आवाज से मचा हड़कंप
स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, हमले के दौरान लगातार दो तेज धमाकों की आवाज सुनाई दी। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके को घेर लिया और रेलवे मार्ग की जांच शुरू कर दी। शुरुआती जानकारी के अनुसार पुल को नुकसान पहुंचा है, लेकिन नुकसान की आधिकारिक तस्वीर अभी सामने नहीं आई है।
अमेरिकी पक्ष ने क्या कहा
अमेरिकी मीडिया में एक अधिकारी के हवाले से दावा किया गया कि उत्तर और उत्तर-पूर्वी ईरान के दो रेलवे पुलों पर सैन्य कार्रवाई की गई है। वहीं अमेरिकी केंद्रीय सैन्य कमान ने इतना जरूर कहा कि उसने ईरान की सैन्य क्षमता और समुद्री मार्गों के लिए खतरा पैदा करने वाले ठिकानों को कमजोर करने के उद्देश्य से अतिरिक्त कार्रवाई की है। हालांकि पुलों को निशाना बनाने के आरोप पर अमेरिका की ओर से अलग से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
ईरान का पलटवार करने का दावा
इन घटनाओं के बाद आईआरजीसी ने दावा किया कि उसने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से जवाबी हमला किया है। संगठन के अनुसार कई प्रमुख सैन्य अड्डों को निशाना बनाया गया। आईआरजीसी ने इसे अमेरिका के खिलाफ “पहला दंडात्मक चरण” बताया और संकेत दिया कि आगे भी कार्रवाई की जा सकती है।
मशहद में जुटी भारी भीड़
दूसरी ओर, ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक दिवंगत सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए मशहद में लाखों लोग पहुंच रहे हैं। शहर की कई प्रमुख सड़कों पर भारी भीड़ के कारण यातायात लगभग ठप हो गया है। सुरक्षा एजेंसियों ने दरगाह के आसपास का इलाका पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया है।
हवाई अड्डा भी किया गया बंद
सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए मशहद हवाई अड्डे पर उड़ानों का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। सरकारी प्रतिनिधिमंडलों और शोक कार्यक्रमों के कारण आम यात्रियों की आवाजाही पर भी रोक लगा दी गई है। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा समीक्षा के बाद ही आगे की व्यवस्था तय की जाएगी।
पूरे क्षेत्र में बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और सैन्य कार्रवाई का सिलसिला जारी रहा तो इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा और वैश्विक व्यापार मार्गों पर पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान की अगली रणनीति पर टिकी हुई है।
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