By Malay Ojha | Published: 09 July 2026 at 10:46 PM
बिहार कांग्रेस में बढ़ती अंदरूनी खींचतान का असर अब राहुल गांधी के प्रस्तावित कार्यक्रम पर भी पड़ता दिख रहा है। सूत्रों के अनुसार, पहले ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम पटना में आयोजित होने वाला था, लेकिन प्रदेश संगठन में बढ़ते मतभेद और हालिया बैठकों में सामने आई तल्खी के बाद इसे फिलहाल टाल दिया गया है। अब इस कार्यक्रम के लिए 17 जुलाई को देहरादून को चुना गया है। हालांकि कांग्रेस की ओर से इस बदलाव पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम पहले बिहार की राजधानी पटना में कराने की तैयारी थी। लेकिन प्रदेश प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष और जिलाध्यक्षों की हालिया बैठक में संगठनात्मक मतभेद खुलकर सामने आने के बाद कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया। इसके बाद जल्दबाजी में उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में 17 जुलाई को कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी शुरू कर दी गई।
कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति बनी बड़ी चुनौती
बताया जा रहा है कि बिहार में संगठन के भीतर चल रही खींचतान ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच तालमेल की कमी और अलग-अलग गुटों की सक्रियता को देखते हुए शीर्ष नेतृत्व फिलहाल किसी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम से पहले स्थिति सामान्य करने की कोशिश में है। यही वजह मानी जा रही है कि राहुल गांधी का कार्यक्रम बिहार से हटाकर दूसरे राज्य में आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
सिर्फ बिहार ही नहीं, दूसरे राज्यों में भी बढ़ी मुश्किलें
कांग्रेस की परेशानी केवल बिहार तक सीमित नहीं है। पंजाब में भी प्रदेश नेतृत्व को लेकर विवाद लगातार सुर्खियों में है। प्रदेश अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद खुलकर सामने आने के बाद पार्टी नेतृत्व को हस्तक्षेप करना पड़ा है। इन विवादों को सुलझाने के लिए प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल लगातार बैठकों में जुटे हुए हैं।
गोवा में अध्यक्ष बदलने के बाद बढ़ी नाराजगी
गोवा में प्रदेश अध्यक्ष बदलने के फैसले ने भी पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ा दिया है। अमित पाटकर को हटाकर गिरीश चोडनकर को जिम्मेदारी दिए जाने के बाद पाटकर समर्थकों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि बिना किसी पूर्व सूचना के नेतृत्व परिवर्तन किया गया। सूत्रों के मुताबिक, नाराज खेमा आगे की रणनीति पर भी विचार कर रहा है।
राहुल गांधी के सामने कई राज्यों की चुनौती
सूत्रों के अनुसार, बिहार, पंजाब और गोवा के कई नाराज नेता राहुल गांधी से मुलाकात कर अपना पक्ष रखना चाहते हैं। ऐसे में विदेश दौरे से लौटने के बाद और संसद के मानसून सत्र से पहले राहुल गांधी के सामने संगठन को संभालने की बड़ी चुनौती होगी। पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि छात्रों के बीच शुरू किया गया संवाद अभियान विवादों से प्रभावित न हो, इसलिए कार्यक्रम का स्थान बदलने का फैसला लिया गया।
छात्र राजनीति के जरिए युवाओं तक पहुंचने की रणनीति
कांग्रेस इन दिनों युवाओं और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इसी रणनीति के तहत ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। पार्टी का मानना है कि शिक्षा, रोजगार और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर संवाद बढ़ाकर नए मतदाताओं तक पहुंच बनाई जा सकती है। ऐसे में पार्टी नहीं चाहती कि संगठनात्मक विवाद इस अभियान की दिशा बदल दें।
राहुल गांधी के बिहार दौरे पर पहले भी हुआ था सियासी हमला
राहुल गांधी के संभावित बिहार दौरे को लेकर पहले भी सियासी बयानबाजी तेज हो चुकी है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने तंज कसते हुए कहा था कि राहुल गांधी जहां भी जाते हैं, वहां कांग्रेस कमजोर हो जाती है। उन्होंने कई राज्यों का उदाहरण देते हुए राहुल गांधी की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाए थे।
कांग्रेस ने दिया था करारा जवाब
भाजपा के आरोपों पर बिहार कांग्रेस ने भी पलटवार किया था। प्रदेश प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने कहा था कि विपक्ष पर निशाना साधने के बजाय भाजपा नेताओं को अपने संसदीय क्षेत्र के विकास पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता का ध्यान मूल मुद्दों से हटाने के लिए इस तरह के राजनीतिक बयान दिए जा रहे हैं।
आधिकारिक घोषणा का इंतजार
फिलहाल राहुल गांधी के कार्यक्रम में बदलाव को लेकर कांग्रेस की ओर से कोई औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है। हालांकि संगठन से जुड़े सूत्रों का दावा है कि कार्यक्रम की नई रूपरेखा लगभग तय हो चुकी है। अब सभी की नजर पार्टी के आधिकारिक कार्यक्रम और राहुल गांधी के आगामी दौरे की घोषणा पर टिकी है।
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