By Malay Ojha | Published: 09 July 2026 at 07:24 PM
पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी को उस समय बड़ा राजनीतिक झटका लगा, जब पार्टी के तीन वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसदों ने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कोलकाता में आयोजित कार्यक्रम में सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाइक को पार्टी की सदस्यता दिलाई। तीनों नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने से पहले राज्यसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया।
पार्टी में शामिल कराने के बाद शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि तीनों नेताओं ने औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ले ली है। उन्होंने इसे पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण बदलाव बताते हुए कहा कि इन नेताओं का अनुभव और संसदीय कार्यशैली पार्टी को नई मजबूती देगी।
केंद्र से टकराव की राजनीति पर साधा निशाना
शमिक भट्टाचार्य ने तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि लंबे समय तक चली राजनीतिक व्यवस्था ने राज्य के विकास को प्रभावित किया। उनके अनुसार, केंद्र सरकार के साथ सहयोग करने के बजाय लगातार टकराव की राजनीति की गई, जिससे विकास कार्यों की गति प्रभावित हुई। उन्होंने कहा कि अब कई नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और देश के विकास के एजेंडे पर भरोसा जताते हुए भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़ रहे हैं।
तीनों नेताओं का किया स्वागत
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाइक जैसे अनुभवी नेताओं का पार्टी में स्वागत करना भारतीय जनता पार्टी के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि पूरे संगठन और कार्यकर्ताओं की ओर से तीनों नेताओं का स्वागत किया जाता है और आने वाले समय में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।
सुखेंदु शेखर राय ने तृणमूल पर बोला हमला
भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद सुखेंदु शेखर राय ने तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति बदल चुकी है और तृणमूल कांग्रेस का प्रभाव लगातार कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि अब पश्चिम बंगाल की जनता बदलाव चाहती है और राज्य की राजनीति नए दौर में प्रवेश कर रही है।
विकास के मुद्दे पर उठाए सवाल
सुखेंदु शेखर राय ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में लंबे समय तक विकास की राजनीति के बजाय विरोध और टकराव की राजनीति को प्राथमिकता दी गई। उनके अनुसार, दूसरे राज्यों में केंद्र और राज्य सरकारें विकास परियोजनाओं के लिए मिलकर काम करती हैं, जबकि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक संघर्ष को अधिक महत्व दिया गया। उन्होंने कहा कि इसका असर राज्य की कई पीढ़ियों पर पड़ा और बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार और बेहतर अवसरों की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ा।
राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा फैसला
राजनीतिक जानकार इस घटनाक्रम को केवल तीन नेताओं के दल बदलने तक सीमित नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि लोकसभा चुनाव के बाद यदि किसी दल के वरिष्ठ नेता लगातार पार्टी छोड़ते हैं तो इसका असर संगठन और कार्यकर्ताओं के मनोबल पर भी पड़ सकता है। ऐसे में तीन राज्यसभा सांसदों का एक साथ तृणमूल कांग्रेस छोड़ना आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति को नई दिशा दे सकता है।
आने वाले दिनों में बढ़ सकती है सियासी हलचल
भारतीय जनता पार्टी ने इस घटनाक्रम को अपनी बड़ी राजनीतिक सफलता बताया है, जबकि तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस पर विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में और नेता भी पाला बदलते हैं तो इसका असर राज्य की सियासी तस्वीर पर पड़ सकता है। फिलहाल तीन वरिष्ठ नेताओं के एक साथ पार्टी छोड़ने से पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।
WhatsApp चैनल जॉइन करें

