By Malay Ojha | Published: 09 July 2026 at 01:25 PM
पूर्व मंत्री और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक मुकेश सहनी की प्रस्तावित प्रेस वार्ता से ठीक पहले कुशीनगर में जिस होटल में कार्यक्रम होना था, उसे पुलिस द्वारा सील किए जाने का मामला राजनीतिक विवाद का विषय बन गया है। वीआईपी ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
वीआईपी के राष्ट्रीय प्रमुख प्रवक्ता देव ज्योति ने कहा कि गुरुवार दोपहर करीब तीन बजे कुशीनगर के होटल शिवायम पैलेस में पार्टी संस्थापक मुकेश सहनी की मीडिया से बातचीत तय थी। उनका आरोप है कि कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही पुलिस ने होटल को सील कर दिया, जिससे प्रस्तावित प्रेस वार्ता नहीं हो सकी।
देव ज्योति ने इस कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए कहा कि किसी राजनीतिक दल को मीडिया के सामने अपनी बात रखने से रोकना लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है।
विपक्ष की आवाज दबाने का लगाया आरोप
वीआईपी प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि प्रदेश में विपक्षी दलों की राजनीतिक गतिविधियों पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि प्रशासनिक तंत्र का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों की आवाज दबाने के लिए किया जा रहा है, जिससे लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंच रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित की जाने वाली प्रेस वार्ता भी नहीं होने दी जाती, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। ऐसे कदम राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के स्वस्थ माहौल के अनुरूप नहीं माने जा सकते।
सरकार से जांच और कार्रवाई की मांग
देव ज्योति ने सरकार से मांग की कि होटल सील किए जाने की घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, यदि किसी अधिकारी ने नियमों के विपरीत कार्रवाई की है तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी राजनीतिक दलों को अपनी बात रखने का समान अधिकार है। यदि किसी दल की राजनीतिक गतिविधियों में इस प्रकार बाधा डाली जाती है तो इससे जनता के लोकतांत्रिक अधिकार भी प्रभावित होते हैं।
वीआईपी ने जताया कड़ा विरोध
वीआईपी ने पूरे घटनाक्रम पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। पार्टी का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक दलों की गतिविधियों को प्रशासनिक कार्रवाई के जरिए प्रभावित करना उचित नहीं है। पार्टी ने स्पष्ट किया कि वह इस मुद्दे को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाती रहेगी।
पार्टी नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में असहमति और राजनीतिक विचारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संविधान की मूल भावना है। ऐसे में किसी भी राजनीतिक कार्यक्रम को रोकने जैसी कार्रवाई कई सवाल खड़े करती है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस मामले में पुलिस या जिला प्रशासन की ओर से होटल सील किए जाने के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। प्रशासन का पक्ष आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी। वहीं, इस घटना के बाद प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी तेज होने की संभावना है।
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