By Malay Ojha | Published: 09 July 2026 at 04:14 PM
राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के चर्चित मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। तीनों आरोपियों से पूछताछ के बाद नकदी, सोने के जेवर, मोबाइल फोन और एक कार बरामद की गई है। जांच में यह भी सामने आया है कि चोरी के पैसों से एक आरोपी ने अपनी पत्नी को सोने का लॉकेट उपहार में दिया था, जिसे पुलिस ने बरामद कर लिया है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ में कई नए सुराग मिले हैं और मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है।
पुलिस रिमांड पर चल रहे तीनों आरोपी लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और करुणेश पांडेय से लगातार पूछताछ की जा रही है। उनकी निशानदेही पर अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की गई, जहां से चोरी से जुड़ी कई अहम चीजें बरामद हुईं। पुलिस का मानना है कि बरामद सामान से पूरे मामले की कड़ियां और मजबूत होंगी।
किस आरोपी से क्या-क्या मिला?
जांच के दौरान आरोपी अनुकल्प मिश्रा के कब्जे से 20 हजार रुपये नकद, सोने की चेन, एक मोबाइल फोन और उसके पिता के नाम पर खरीदी गई एक कार बरामद की गई। पुलिस ने कार को भी जब्त कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि बरामद संपत्ति की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसका संबंध चोरी की रकम से है या नहीं।
पत्नी को दिया था सोने का लॉकेट
पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपी लवकुश मिश्रा ने चोरी के पैसों से अपनी पत्नी के लिए सोने का लॉकेट खरीदा था। पुलिस ने वह लॉकेट भी बरामद कर लिया है। इसके अलावा उसके पास से 38 हजार रुपये नकद भी मिले हैं। वहीं तीसरे आरोपी करुणेश पांडेय के कब्जे से 15 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं।
सुनसान जगह पर होता था पैसों का बंटवारा
जांच के दौरान पुलिस तीनों आरोपियों को उस स्थान पर भी लेकर गई, जहां कथित तौर पर चोरी के बाद पैसों का बंटवारा किया जाता था। यह जगह चौदह कोसी परिक्रमा मार्ग के पास बताई जा रही है। पुलिस के मुताबिक आरोपी वारदात के बाद यहीं इकट्ठा होते थे और आपस में रकम बांटते थे। इससे पहले एक अन्य आरोपी अविनाश शुक्ला को भी इसी स्थान पर ले जाकर पूछताछ की जा चुकी है।
फर्जी रसीदों से श्रद्धालुओं को बनाया जाता था निशाना
पुलिस जांच में एक और अहम खुलासा हुआ है। आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने श्रद्धालुओं से चढ़ावे के नाम पर धन जुटाने के लिए फर्जी रसीदों का इस्तेमाल किया। ये रसीदें देखने में असली जैसी थीं और उन पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का लोगो भी छपा हुआ था। पहली नजर में आम श्रद्धालु के लिए असली और नकली रसीद में फर्क करना बेहद मुश्किल था।
ऑनलाइन व्यवस्था शुरू होने के बाद बदला तरीका
जांच एजेंसियों के अनुसार, जब ट्रस्ट की ओर से ऑनलाइन रसीद प्रणाली लागू कर दी गई तो आरोपियों ने कथित तौर पर इन फर्जी रसीदों का इस्तेमाल बंद कर दिया। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फर्जी रसीदों के जरिए कितने लोगों से धन लिया गया और इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
जांच अभी जारी, कई और खुलासों की उम्मीद
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ लगातार जारी है और मामले के कई पहलुओं की जांच की जा रही है। बरामद सामान, बैंक लेनदेन और अन्य दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का दावा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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