By Malay Ojha | Published: 10 July 2026 at 05:30 PM
क्या भारत में भी 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लग सकती है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान दिए गए एक बयान के बाद यही सवाल तेजी से उठने लगा है। प्रधानमंत्री ने ऑस्ट्रेलिया के उस कानून की सराहना की, जिसके तहत सोलह साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है। उनके इस बयान के बाद अभिभावकों, शिक्षा जगत और तकनीकी क्षेत्र में नई बहस शुरू हो गई है कि क्या भारत सरकार भी जल्द इसी दिशा में कोई बड़ा कदम उठा सकती है।
मेलबर्न में आयोजित भारत-ऑस्ट्रेलिया शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सोशल मीडिया और सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े कानूनों में ऑस्ट्रेलिया जिस तरह बदलाव कर रहा है, वह पूरी दुनिया के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि समाज को सुरक्षित बनाने और नई पीढ़ी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऑस्ट्रेलिया के प्रयासों से भारत भी सीख ले रहा है। प्रधानमंत्री के इस बयान को भविष्य की संभावित नीति के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
ऑस्ट्रेलिया ने क्यों लगाया इतना सख्त कानून?
ऑस्ट्रेलिया ने वर्ष दो हजार पच्चीस के आखिर में दुनिया का सबसे सख्त सोशल मीडिया कानून लागू किया। इस कानून के तहत सोलह साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया मंचों का उपयोग प्रतिबंधित कर दिया गया। कानून का उद्देश्य बच्चों को बढ़ती ऑनलाइन लत, मानसिक दबाव, साइबर उत्पीड़न और हानिकारक सामग्री से बचाना है। यह कदम दुनिया के कई देशों के लिए उदाहरण बन गया है।
किन प्लेटफॉर्म पर लागू है यह नियम?
ऑस्ट्रेलिया के कानून के दायरे में फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, टिकटॉक, यूट्यूब और स्नैपचैट जैसे प्रमुख सोशल मीडिया मंच शामिल हैं। इन कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि निर्धारित आयु से कम उम्र के बच्चों का खाता न बनाया जाए। इसके लिए उम्र की पुष्टि करना भी अनिवार्य कर दिया गया है। यदि कंपनियां नियमों का पालन नहीं करतीं तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है।
क्या भारत में भी बन सकता है ऐसा कानून?
फिलहाल भारत सरकार ने बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर किसी प्रतिबंध की घोषणा नहीं की है। हालांकि प्रधानमंत्री के बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि सरकार भविष्य में इस विषय पर नए नियम बना सकती है। पिछले कुछ वर्षों में भारत डिजिटल सुरक्षा, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और सोशल मीडिया जवाबदेही को लेकर लगातार नए कानून और नियम तैयार करता रहा है। ऐसे में विशेषज्ञ मान रहे हैं कि आने वाले समय में बच्चों के लिए अलग सुरक्षा मानक तय किए जा सकते हैं।
दुनिया के कई देश भी कर रहे हैं तैयारी
सिर्फ ऑस्ट्रेलिया ही नहीं, कई दूसरे देश भी बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाने की दिशा में बढ़ रहे हैं। ब्रिटेन में भी सोलह साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया, गेमिंग और लाइव स्ट्रीमिंग पर कड़े नियम लागू करने की योजना सामने आ चुकी है। कनाडा, ब्राजील और इंडोनेशिया कुछ प्रतिबंध पहले ही लागू कर चुके हैं। वहीं फ्रांस, स्पेन, डेनमार्क, थाईलैंड और दक्षिण कोरिया जैसे देश भी इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।
बच्चों की मानसिक सेहत बनी सबसे बड़ी चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र में लगातार मोबाइल और सोशल मीडिया का इस्तेमाल बच्चों की पढ़ाई, व्यवहार, नींद और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल रहा है। कई शोधों में यह सामने आया है कि जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों में तनाव, अकेलापन और ध्यान भटकने जैसी समस्याओं को बढ़ा सकता है। यही कारण है कि दुनिया के कई देश अब सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए कई अहम समझौते
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस दौरे में दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते भी हुए। दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, परमाणु ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। सबसे अहम समझौता वाणिज्यिक यूरेनियम आपूर्ति से जुड़ा है, जिसके तहत ऑस्ट्रेलिया भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रमों के लिए यूरेनियम उपलब्ध कराएगा। इसे दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने वाला बड़ा कदम माना जा रहा है।
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