By Malay Ojha | Published: 14 July 2026 at 08:52 AM
उत्तर प्रदेश के बरेली में ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने वक्फ की संपत्तियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि वक्फ की जमीनों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है और यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई गई तो अरबों रुपये के कथित घोटाले का खुलासा हो सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह मामला हाल के चर्चित धार्मिक संस्थानों से जुड़े आर्थिक विवादों से भी बड़ा साबित हो सकता है।
मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने बताया कि उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि वक्फ की संपत्तियों का सही रिकॉर्ड तैयार किया जाए और यह पता लगाया जाए कि इन जमीनों का वास्तविक उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि निष्पक्ष जांच होगी तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।
‘गरीबों के लिए बनी व्यवस्था का नहीं मिल रहा लाभ’
मौलाना ने कहा कि वक्फ की जमीनें समाज के गरीब, बेसहारा, जरूरतमंद परिवारों, महिलाओं और बच्चों की सहायता के उद्देश्य से दान में दी गई थीं। इन संपत्तियों से होने वाली आय का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण जैसे कार्यों में होना चाहिए था। उनका आरोप है कि वास्तविक जरूरतमंदों तक इसका लाभ नहीं पहुंच रहा है।
‘कुछ लोग उठा रहे हैं सबसे ज्यादा फायदा’
उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ की कई संपत्तियों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता की कमी है। उनके मुताबिक जिन संपत्तियों का उपयोग समाज के हित में होना चाहिए था, उनसे कुछ लोग निजी लाभ कमा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि इन मामलों की बारीकी से जांच की जाए तो कई आर्थिक अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।
बरेली का भी किया जिक्र
प्रेस वार्ता के दौरान मौलाना ने दावा किया कि केवल बरेली में ही वक्फ की जमीनों से जुड़े करोड़ों और अरबों रुपये के कथित गड़बड़ी वाले मामले मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक जिले का मामला नहीं हो सकता, इसलिए पूरे प्रदेश में वक्फ संपत्तियों का व्यापक ऑडिट कराया जाना चाहिए।
पारदर्शी व्यवस्था की जरूरत बताई
मौलाना का कहना है कि वक्फ की संपत्तियां धार्मिक और सामाजिक भरोसे की धरोहर हैं। ऐसे में इनके प्रबंधन में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि सभी वक्फ संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाए, आय-व्यय का सार्वजनिक हिसाब उपलब्ध कराया जाए और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए।
जांच के बाद ही साफ होगी तस्वीर
फिलहाल मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी के आरोपों पर संबंधित वक्फ बोर्ड की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी अभी नहीं हुई है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार इस मांग पर क्या फैसला लेती है और जांच के आदेश दिए जाते हैं या नहीं। यदि जांच होती है तो उसके निष्कर्षों के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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