By aryavartalive | Published: 22 July 2026 at 02:57 PM
गुंटूर (आंध्र प्रदेश): देशभर में सरकारी विद्यालयों के बंद होने और उनके विलय को लेकर सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने केंद्र और राज्य सरकारों पर निशाना साधा है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि सरकारी स्कूलों को बंद करने की नीति का सीधा असर गरीब, ग्रामीण और आदिवासी परिवारों के बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है। पार्टी का कहना है कि इससे बच्चों के शिक्षा के अधिकार को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के राष्ट्रीय सचिव डॉ. टी. हरीश स्वामी की ओर से जारी बयान में दावा किया गया है कि वर्ष 2025-26 के यू-डाइस प्लस (UDISE+) के अस्थायी आंकड़ों के मुताबिक देशभर में करीब 88 हजार सरकारी स्कूल बंद या विलय किए गए हैं। पार्टी के अनुसार इनमें 4,791 स्कूल पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं। इससे करीब 11.89 करोड़ विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
इन राज्यों में सबसे ज्यादा स्कूल प्रभावित होने का दावा
पार्टी ने दावा किया कि सरकारी स्कूलों के बंद या विलय होने से कई राज्यों में शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ा है। इसके मुताबिक मध्य प्रदेश में 2,426, तेलंगाना में 1,292, पश्चिम बंगाल में 588, आंध्र प्रदेश में 471 और तमिलनाडु में 369 विद्यालय प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा कर्नाटक में 281, हिमाचल प्रदेश में 266, महाराष्ट्र में 239, ओडिशा में 193 और उत्तर प्रदेश में 183 स्कूलों के बंद या विलय किए जाने का दावा किया गया है।
ग्रामीण और आदिवासी बच्चों पर सबसे ज्यादा असर
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) का कहना है कि सरकारी स्कूलों को बंद करने या दूसरे विद्यालयों में विलय करने का सबसे ज्यादा नुकसान ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में रहने वाले बच्चों को हो रहा है। पार्टी के मुताबिक स्कूल दूर होने के कारण छोटे बच्चों को लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है। इससे खासकर गरीब परिवारों के बच्चों के स्कूल छोड़ने का खतरा बढ़ सकता है।
बालिकाओं की पढ़ाई को लेकर भी जताई चिंता
पार्टी ने कहा कि इस नीति का असर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और बालिकाओं पर भी पड़ सकता है। स्कूल की दूरी बढ़ने से कई परिवार अपनी बेटियों को पढ़ाई के लिए दूर भेजने में असहज हो सकते हैं। ऐसे में सरकारी स्कूलों के बंद होने का असर केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सामाजिक प्रभाव भी देखने को मिल सकता है।
सरकार से स्कूल बंद करने की प्रक्रिया रोकने की मांग
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने सरकार से सरकारी स्कूलों को बंद करने और उनका विलय करने की प्रक्रिया तत्काल रोकने की मांग की है। पार्टी ने प्रत्येक गांव में कम से कम एक प्राथमिक और एक उच्च प्राथमिक विद्यालय सुनिश्चित करने, शिक्षा बजट बढ़ाने और खाली पड़े शिक्षक पदों पर जल्द नियुक्ति करने की मांग रखी है।
राज्यवार आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग
पार्टी ने स्कूलों को बंद या विलय किए जाने से जुड़े राज्यवार आंकड़े सार्वजनिक करने की भी मांग की है। उसका कहना है कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि किन कारणों से स्कूलों को बंद या विलय किया जा रहा है और इसका विद्यार्थियों की शिक्षा पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।
शिक्षा के अधिकार के लिए आंदोलन की चेतावनी
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने कहा है कि वह सरकारी विद्यालयों को बचाने और प्रत्येक बच्चे के निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अधिकार की रक्षा के लिए देशभर में लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेगी। पार्टी ने सरकारी स्कूलों को बंद करने की नीति को शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बताया है।
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