By Malay Ojha | Published: 29 July 2026 at 08:12 PM
नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्रों के संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा हमला बोला है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को संसद से करीब 500 मीटर की दूरी पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं पर जिस तरह की कार्रवाई हुई, वह बिना गृह मंत्रालय की जानकारी और मंजूरी के नहीं हो सकती। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली पुलिस और त्वरित कार्रवाई बल गृह मंत्रालय के अधीन आते हैं और अब इस पूरे मामले की जिम्मेदारी अमित शाह को लेनी होगी। राहुल ने यहां तक कहा कि छात्रों पर कथित बर्बरता के लिए जिम्मेदार गृह मंत्री को पद छोड़ना होगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने छात्रों पर हुई कार्रवाई से जुड़ी पांच तस्वीरें दिखाईं। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान युवाओं पर लाठीचार्ज किया गया और कथित तौर पर पैलेट गन का इस्तेमाल भी हुआ। राहुल ने कहा कि उन्होंने ऐसे एक घायल युवक से मुलाकात की है, जिसके शरीर में पैलेट के निशान हैं और आंख में चोट लगने के बाद उसकी देखने की क्षमता प्रभावित हुई है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों के साथ जानबूझकर और सोची-समझी तरीके से अत्याचार किया गया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ भी पुलिसकर्मियों के दुर्व्यवहार की तस्वीरें सामने आई हैं। उनके मुताबिक, संसद से इतनी कम दूरी पर देश के युवाओं के साथ ऐसा व्यवहार गंभीर सवाल खड़े करता है।
‘पैलेट गन चलाने का फैसला किसने लिया?’
राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों पर कार्रवाई करने वाली सुरक्षा एजेंसियों में दिल्ली पुलिस या केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की त्वरित कार्रवाई बल की भूमिका होने का दावा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों ही केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रशासनिक दायरे में आते हैं। इसी आधार पर राहुल ने सवाल उठाया कि अगर वास्तव में पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ, तो इसकी मंजूरी किस स्तर पर दी गई?
राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने 25 जुलाई को अमित शाह को पत्र लिखकर दो सीधे सवाल पूछे थे। पहला, क्या गृह मंत्री के तौर पर उन्होंने छात्रों के खिलाफ पैलेट गन जैसी घातक कार्रवाई को मंजूरी दी थी? दूसरा, प्रदर्शन के दौरान सादे कपड़ों में लाठी लेकर कार्रवाई करते दिख रहे लोगों की पहचान क्या थी और वे वहां किसके आदेश पर पहुंचे थे? राहुल के मुताबिक, उनके पत्र का अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।
‘आखिरी फैसला गृह मंत्री और प्रधानमंत्री का होता है’
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने कहा कि जब पुलिस कार्रवाई में गोली या पैलेट गन जैसे हथियारों के इस्तेमाल का सवाल आता है, तो इसकी जिम्मेदारी केवल मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों तक सीमित नहीं रह सकती। उन्होंने दावा किया कि ऐसी स्थिति में अंतिम निर्णय गृह मंत्री और प्रधानमंत्री के स्तर पर होता है।
राहुल ने कहा, “अमित शाह गृह मंत्री हैं। पैलेट गन का इस्तेमाल बिना गृह मंत्री की इजाजत के नहीं किया जा सकता।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों के आंदोलन पर हुई कार्रवाई को लेकर सरकार को जवाब देना चाहिए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
संसद में बोलने से रोके जाने का भी लगाया आरोप
राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने छात्रों पर हुई कार्रवाई का मुद्दा लोकसभा में उठाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें अपनी बात पूरी रखने का मौका नहीं दिया गया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने कई बार लोकसभा अध्यक्ष से सदन को व्यवस्थित करने की अपील की, लेकिन उन्हें बोलने नहीं दिया गया।
राहुल के मुताबिक, उनसे माफी मांगने के बाद ही बोलने की बात कही गई। उन्होंने कहा कि वह अपने मुद्दे उठाने के अधिकार से पीछे नहीं हटेंगे और माफी मांगने से इनकार कर दिया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विपक्ष का काम सरकार से सवाल पूछना और जनता से जुड़े मुद्दों को सदन में उठाना है।
‘अमित शाह को जाना होगा’
राहुल गांधी ने इस पूरे मामले को लेकर अमित शाह के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि जिन छात्रों और युवाओं ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया, उनके साथ कथित तौर पर हुई हिंसक कार्रवाई की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। राहुल ने कहा कि छात्रों पर कार्रवाई के पीछे जो भी जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और गृह मंत्री को इस मामले पर देश के सामने जवाब देना चाहिए।
पैलेट गन के इस्तेमाल पर सरकार और विपक्ष के दावे अलग
हालांकि, पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर सरकार और विपक्ष के दावे अलग-अलग हैं। सरकार की ओर से कहा गया है कि प्रदर्शन के दौरान गोली नहीं चलाई गई और कार्रवाई में आंसू गैस के गोले इस्तेमाल किए गए। वहीं, राहुल गांधी लगातार दावा कर रहे हैं कि छात्रों पर पैलेट गन चलाई गई और कुछ प्रदर्शनकारियों को इससे चोटें आईं।
इस बीच, मामले की जांच से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की त्वरित कार्रवाई बल की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे हैं। एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि एक जवान ने कथित तौर पर पैलेट गन जैसी श्रेणी में आने वाली एंटी-रायट गन से दो बार फायर किया था और यह कार्रवाई एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के आदेश पर किए जाने की बात सामने आई। दूसरी रिपोर्ट में जांच के हवाले से सात राउंड फायर किए जाने और पांच के प्रदर्शनकारियों को लगने का दावा किया गया है। हालांकि, इन दावों और घटनाक्रम को लेकर अंतिम आधिकारिक निष्कर्ष का इंतजार है।
अब गृह मंत्री के जवाब पर टिकी नजर
छात्रों के संसद मार्च के दौरान हुई कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। राहुल गांधी ने एक तरफ जहां अमित शाह को सीधे तौर पर घेरा है, वहीं गृह मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका को लेकर जवाब मांगा है। दूसरी ओर, सरकार की ओर से पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों को लेकर अलग दावा किया गया है।
ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 20 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान वास्तव में किस तरह के हथियारों का इस्तेमाल हुआ, किस अधिकारी ने कार्रवाई के आदेश दिए और क्या किसी स्तर पर पैलेट गन चलाने की अनुमति दी गई थी। राहुल गांधी के आरोपों के बाद इस मामले पर राजनीतिक दबाव और बढ़ सकता है। वहीं, जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि छात्रों पर हुई कार्रवाई में किसकी क्या भूमिका थी और जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है।
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