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बिहार में 92 लाख स्मार्ट मीटर से बदली बिजली व्यवस्था, चोरी घटी और बिलिंग दक्षता 88% के पार

By aryavartalive | Published: 08 August 2026 at 01:08 PM

बिहार ने बिजली वितरण व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल के मामले में देश के प्रमुख राज्यों में अपनी जगह बना ली है। राज्य में अब तक 92 लाख प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जो देशभर में लगाए गए कुल प्रीपेड स्मार्ट मीटरों का करीब 70 प्रतिशत है। बिहार के ऊर्जा सचिव और बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक अजय यादव ने बताया कि स्मार्ट मीटरिंग के साथ बिजली चोरी में कमी आई है और बिलिंग व्यवस्था पहले के मुकाबले ज्यादा पारदर्शी हुई है।

92 लाख स्मार्ट मीटर ने बदली तस्वीर
नई दिल्ली में आयोजित सातवें सीआईआई अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सम्मेलन एवं प्रदर्शनी में ऊर्जा सचिव अजय यादव ने बिहार में बिजली क्षेत्र में हुए बदलावों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देश में लगाए गए कुल स्मार्ट मीटरों में बिहार की हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत है। उनके मुताबिक स्मार्ट मीटर अब सिर्फ बिजली का बिल तैयार करने का साधन नहीं रह गया है, बल्कि बिजली वितरण व्यवस्था को समझने और उसे बेहतर तरीके से चलाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है।

बिलिंग दक्षता 75 से बढ़कर 88 प्रतिशत
अजय यादव के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2019-20 में बिहार की बिलिंग दक्षता 75.14 प्रतिशत थी। यह आंकड़ा वित्तीय वर्ष 2025-26 में बढ़कर 88.46 प्रतिशत हो गया। इसी अवधि में संग्रहण दक्षता भी 86 प्रतिशत से बढ़कर 100 प्रतिशत तक पहुंच गई। यानी जितनी बिजली की बिलिंग हुई, उसकी राशि की वसूली में भी बड़ा सुधार दर्ज किया गया है।

बिजली नुकसान में भी बड़ी गिरावट
बिहार के बिजली क्षेत्र में सबसे बड़ा बदलाव एटी एंड सी नुकसान के आंकड़ों में दिखाई देता है। वर्ष 2019-20 में यह नुकसान 35.12 प्रतिशत था, जो 2025-26 में घटकर 11.54 प्रतिशत रह गया। ऊर्जा सचिव ने कहा कि बिजली वितरण व्यवस्था में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से नुकसान कम करने और राजस्व व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिली है। एसीएस-एआरआर का अंतर भी अब सकारात्मक हो गया है।

स्मार्ट मीटर से तैयार हुआ अरबों डेटा
बिहार में स्मार्ट मीटरिंग के जरिए करीब 10 अरब डेटा पॉइंट्स तैयार किए गए हैं। बिजली विभाग अब इस आंकड़े का इस्तेमाल यह समझने में कर रहा है कि अलग-अलग इलाकों में बिजली की खपत किस समय और किस तरह बढ़ती या घटती है। इससे बिजली की मांग का अनुमान लगाने और उसी के अनुसार व्यवस्था तैयार करने में मदद मिल रही है।

बिजली की मांग का अंदाजा पहले से
स्मार्ट मीटर से मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर बिजली की मांग का बेहतर अनुमान लगाया जा सकता है। इससे बिजली वितरण कंपनियों को पीक समय में बढ़ने वाली मांग के लिए पहले से तैयारी करने में मदद मिलती है। बिहार में टाइम ऑफ डे टैरिफ भी लागू किया गया है, जिसके जरिए अलग-अलग समय में बिजली की खपत को बेहतर तरीके से संभालने की कोशिश की जा रही है।

दो लाख ट्रांसफॉर्मर की निगरानी
बिहार में करीब दो लाख डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर मीटर लगाए गए हैं। इन मीटरों की मदद से ट्रांसफॉर्मरों की स्थिति पर नजर रखना आसान हुआ है। किसी इलाके में बिजली की खपत अचानक बढ़ने, तकनीकी समस्या आने या ट्रांसफॉर्मर पर अधिक दबाव पड़ने की स्थिति में समय रहते जानकारी मिलने की संभावना बढ़ी है। इससे रखरखाव और बिजली वितरण नेटवर्क की विश्वसनीयता बेहतर करने में मदद मिल रही है।

इस साल बिजली की मांग 9,475 मेगावाट
ऊर्जा सचिव ने बताया कि बिहार ने इस वर्ष 9,475 मेगावाट की रिकॉर्ड पीक डिमांड पूरी की है। राज्य में शहरी इलाकों में 23 से 24 घंटे और ग्रामीण इलाकों में 22 से 23 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि अब चुनौती केवल ज्यादा बिजली उपलब्ध कराने की नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं और उद्योगों को बेहतर गुणवत्ता की लगातार बिजली देने की भी है।

उद्योगों के लिए बिजली पर बढ़ा जोर
बिहार सरकार राज्य में औद्योगिकीकरण को गति देने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके लिए बिजली आपूर्ति को भरोसेमंद बनाना अहम माना जा रहा है। ऊर्जा सचिव ने बताया कि राज्य में 13 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना है। ऐसे में आने वाले समय में बिजली की मांग और बढ़ सकती है। इसी को देखते हुए वितरण नेटवर्क को तकनीकी रूप से मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

अब बिजली विभाग में डिजिटल निगरानी
बिहार के बिजली वितरण नेटवर्क में इंटरनेट से जुड़े उपकरणों, भौगोलिक सूचना प्रणाली आधारित संपत्ति की मैपिंग, डिजिटल संपत्ति रजिस्टर और एकीकृत ग्राहक सेवा मंच का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। इसका उद्देश्य बिजली नेटवर्क की स्थिति की रियल टाइम जानकारी हासिल करना और किसी समस्या पर जल्द फैसला लेना है।

एक पोर्टल पर 21 ऑनलाइन सेवाएं
उपभोक्ताओं के लिए ‘सुविधा बिहार पोर्टल’ के जरिए 21 ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। बिजली विभाग का दावा है कि ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ने से उपभोक्ताओं को दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत कम हुई है। शिकायत, सेवा और दूसरी जरूरी प्रक्रियाओं को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।

सौर ऊर्जा पर भी बिहार का फोकस
बिहार अब बिजली वितरण व्यवस्था को केवल मौजूदा मांग पूरी करने तक सीमित नहीं रखना चाहता। राज्य में घरों की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने, कृषि फीडरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने और पीएम-कुसुम योजना के विस्तार पर भी काम किया जा रहा है। इसके साथ ही स्मार्ट ग्रिड और उन्नत आंकड़ा विश्लेषण तकनीक के जरिए बिजली नेटवर्क को ज्यादा नवीकरणीय ऊर्जा संभालने के लिए तैयार किया जा रहा है।

बिजली की गुणवत्ता अब अगली चुनौती
अजय यादव ने कहा कि बिहार में बिजली की उपलब्धता के बाद अब गुणवत्ता और भरोसेमंद आपूर्ति पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। उनका कहना है कि तकनीक के इस्तेमाल से उद्योगों और आम उपभोक्ताओं दोनों को निर्बाध और बेहतर गुणवत्ता वाली बिजली देने की दिशा में आगे बढ़ा जा रहा है।

देश के ऊर्जा बदलाव में डिजिटल तकनीक अहम
सम्मेलन में शामिल विशेषज्ञों ने कहा कि भारत में बिजली की मांग बढ़ने और नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ने के साथ बिजली नेटवर्क को भी ज्यादा आधुनिक बनाना होगा। स्मार्ट मीटर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित आंकड़ा विश्लेषण, इंटरनेट से जुड़े निगरानी उपकरण और मांग के अनुसार बिजली प्रबंधन जैसी तकनीकें आने वाले समय में बिजली व्यवस्था को ज्यादा मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

तकनीक और साझेदारी पर जोर
तकनीकी सत्र में असम सरकार के अपर मुख्य सचिव डॉ. कृष्ण कुमार द्विवेदी, आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर डॉ. अनूप सिंह, किम्बल के वरिष्ठ निदेशक गोपाल पारिख और बीआरपीएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अभिषेक रंजन ने भी हिस्सा लिया। सत्र का संचालन ग्रिडक्रेस्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक मदन मोहन चक्रवर्ती ने किया।

बिहार में स्मार्ट मीटरिंग से लेकर ट्रांसफॉर्मर की डिजिटल निगरानी और ऑनलाइन उपभोक्ता सेवाओं तक बिजली व्यवस्था में तकनीक का दायरा लगातार बढ़ रहा है। 92 लाख प्रीपेड स्मार्ट मीटर, 11.54 प्रतिशत तक घटा एटी एंड सी नुकसान और 9,475 मेगावाट की रिकॉर्ड पीक डिमांड के आंकड़े बताते हैं कि राज्य की बिजली व्यवस्था पिछले कुछ वर्षों में बड़े बदलाव के दौर से गुजरी है। अब असली चुनौती इस तकनीकी बदलाव को लंबे समय तक बनाए रखते हुए उपभोक्ताओं को लगातार बेहतर और भरोसेमंद बिजली देना है।

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बिहार में 92 लाख स्मार्ट मीटर से बदली बिजली व्यवस्था, चोरी घटी और बिलिंग दक्षता 88% के पार

By aryavartalive | Published: 08 August 2026 at 01:08 PM

बिहार ने बिजली वितरण व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल के मामले में देश के प्रमुख राज्यों में अपनी जगह बना ली है। राज्य में अब तक 92 लाख प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जो देशभर में लगाए गए कुल प्रीपेड स्मार्ट मीटरों का करीब 70 प्रतिशत है। बिहार के ऊर्जा सचिव और बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक अजय यादव ने बताया कि स्मार्ट मीटरिंग के साथ बिजली चोरी में कमी आई है और बिलिंग व्यवस्था पहले के मुकाबले ज्यादा पारदर्शी हुई है।

92 लाख स्मार्ट मीटर ने बदली तस्वीर
नई दिल्ली में आयोजित सातवें सीआईआई अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सम्मेलन एवं प्रदर्शनी में ऊर्जा सचिव अजय यादव ने बिहार में बिजली क्षेत्र में हुए बदलावों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देश में लगाए गए कुल स्मार्ट मीटरों में बिहार की हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत है। उनके मुताबिक स्मार्ट मीटर अब सिर्फ बिजली का बिल तैयार करने का साधन नहीं रह गया है, बल्कि बिजली वितरण व्यवस्था को समझने और उसे बेहतर तरीके से चलाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है।

बिलिंग दक्षता 75 से बढ़कर 88 प्रतिशत
अजय यादव के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2019-20 में बिहार की बिलिंग दक्षता 75.14 प्रतिशत थी। यह आंकड़ा वित्तीय वर्ष 2025-26 में बढ़कर 88.46 प्रतिशत हो गया। इसी अवधि में संग्रहण दक्षता भी 86 प्रतिशत से बढ़कर 100 प्रतिशत तक पहुंच गई। यानी जितनी बिजली की बिलिंग हुई, उसकी राशि की वसूली में भी बड़ा सुधार दर्ज किया गया है।

बिजली नुकसान में भी बड़ी गिरावट
बिहार के बिजली क्षेत्र में सबसे बड़ा बदलाव एटी एंड सी नुकसान के आंकड़ों में दिखाई देता है। वर्ष 2019-20 में यह नुकसान 35.12 प्रतिशत था, जो 2025-26 में घटकर 11.54 प्रतिशत रह गया। ऊर्जा सचिव ने कहा कि बिजली वितरण व्यवस्था में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से नुकसान कम करने और राजस्व व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिली है। एसीएस-एआरआर का अंतर भी अब सकारात्मक हो गया है।

स्मार्ट मीटर से तैयार हुआ अरबों डेटा
बिहार में स्मार्ट मीटरिंग के जरिए करीब 10 अरब डेटा पॉइंट्स तैयार किए गए हैं। बिजली विभाग अब इस आंकड़े का इस्तेमाल यह समझने में कर रहा है कि अलग-अलग इलाकों में बिजली की खपत किस समय और किस तरह बढ़ती या घटती है। इससे बिजली की मांग का अनुमान लगाने और उसी के अनुसार व्यवस्था तैयार करने में मदद मिल रही है।

बिजली की मांग का अंदाजा पहले से
स्मार्ट मीटर से मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर बिजली की मांग का बेहतर अनुमान लगाया जा सकता है। इससे बिजली वितरण कंपनियों को पीक समय में बढ़ने वाली मांग के लिए पहले से तैयारी करने में मदद मिलती है। बिहार में टाइम ऑफ डे टैरिफ भी लागू किया गया है, जिसके जरिए अलग-अलग समय में बिजली की खपत को बेहतर तरीके से संभालने की कोशिश की जा रही है।

दो लाख ट्रांसफॉर्मर की निगरानी
बिहार में करीब दो लाख डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर मीटर लगाए गए हैं। इन मीटरों की मदद से ट्रांसफॉर्मरों की स्थिति पर नजर रखना आसान हुआ है। किसी इलाके में बिजली की खपत अचानक बढ़ने, तकनीकी समस्या आने या ट्रांसफॉर्मर पर अधिक दबाव पड़ने की स्थिति में समय रहते जानकारी मिलने की संभावना बढ़ी है। इससे रखरखाव और बिजली वितरण नेटवर्क की विश्वसनीयता बेहतर करने में मदद मिल रही है।

इस साल बिजली की मांग 9,475 मेगावाट
ऊर्जा सचिव ने बताया कि बिहार ने इस वर्ष 9,475 मेगावाट की रिकॉर्ड पीक डिमांड पूरी की है। राज्य में शहरी इलाकों में 23 से 24 घंटे और ग्रामीण इलाकों में 22 से 23 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि अब चुनौती केवल ज्यादा बिजली उपलब्ध कराने की नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं और उद्योगों को बेहतर गुणवत्ता की लगातार बिजली देने की भी है।

उद्योगों के लिए बिजली पर बढ़ा जोर
बिहार सरकार राज्य में औद्योगिकीकरण को गति देने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके लिए बिजली आपूर्ति को भरोसेमंद बनाना अहम माना जा रहा है। ऊर्जा सचिव ने बताया कि राज्य में 13 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना है। ऐसे में आने वाले समय में बिजली की मांग और बढ़ सकती है। इसी को देखते हुए वितरण नेटवर्क को तकनीकी रूप से मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

अब बिजली विभाग में डिजिटल निगरानी
बिहार के बिजली वितरण नेटवर्क में इंटरनेट से जुड़े उपकरणों, भौगोलिक सूचना प्रणाली आधारित संपत्ति की मैपिंग, डिजिटल संपत्ति रजिस्टर और एकीकृत ग्राहक सेवा मंच का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। इसका उद्देश्य बिजली नेटवर्क की स्थिति की रियल टाइम जानकारी हासिल करना और किसी समस्या पर जल्द फैसला लेना है।

एक पोर्टल पर 21 ऑनलाइन सेवाएं
उपभोक्ताओं के लिए ‘सुविधा बिहार पोर्टल’ के जरिए 21 ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। बिजली विभाग का दावा है कि ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ने से उपभोक्ताओं को दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत कम हुई है। शिकायत, सेवा और दूसरी जरूरी प्रक्रियाओं को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।

सौर ऊर्जा पर भी बिहार का फोकस
बिहार अब बिजली वितरण व्यवस्था को केवल मौजूदा मांग पूरी करने तक सीमित नहीं रखना चाहता। राज्य में घरों की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने, कृषि फीडरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने और पीएम-कुसुम योजना के विस्तार पर भी काम किया जा रहा है। इसके साथ ही स्मार्ट ग्रिड और उन्नत आंकड़ा विश्लेषण तकनीक के जरिए बिजली नेटवर्क को ज्यादा नवीकरणीय ऊर्जा संभालने के लिए तैयार किया जा रहा है।

बिजली की गुणवत्ता अब अगली चुनौती
अजय यादव ने कहा कि बिहार में बिजली की उपलब्धता के बाद अब गुणवत्ता और भरोसेमंद आपूर्ति पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। उनका कहना है कि तकनीक के इस्तेमाल से उद्योगों और आम उपभोक्ताओं दोनों को निर्बाध और बेहतर गुणवत्ता वाली बिजली देने की दिशा में आगे बढ़ा जा रहा है।

देश के ऊर्जा बदलाव में डिजिटल तकनीक अहम
सम्मेलन में शामिल विशेषज्ञों ने कहा कि भारत में बिजली की मांग बढ़ने और नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ने के साथ बिजली नेटवर्क को भी ज्यादा आधुनिक बनाना होगा। स्मार्ट मीटर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित आंकड़ा विश्लेषण, इंटरनेट से जुड़े निगरानी उपकरण और मांग के अनुसार बिजली प्रबंधन जैसी तकनीकें आने वाले समय में बिजली व्यवस्था को ज्यादा मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

तकनीक और साझेदारी पर जोर
तकनीकी सत्र में असम सरकार के अपर मुख्य सचिव डॉ. कृष्ण कुमार द्विवेदी, आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर डॉ. अनूप सिंह, किम्बल के वरिष्ठ निदेशक गोपाल पारिख और बीआरपीएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अभिषेक रंजन ने भी हिस्सा लिया। सत्र का संचालन ग्रिडक्रेस्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक मदन मोहन चक्रवर्ती ने किया।

बिहार में स्मार्ट मीटरिंग से लेकर ट्रांसफॉर्मर की डिजिटल निगरानी और ऑनलाइन उपभोक्ता सेवाओं तक बिजली व्यवस्था में तकनीक का दायरा लगातार बढ़ रहा है। 92 लाख प्रीपेड स्मार्ट मीटर, 11.54 प्रतिशत तक घटा एटी एंड सी नुकसान और 9,475 मेगावाट की रिकॉर्ड पीक डिमांड के आंकड़े बताते हैं कि राज्य की बिजली व्यवस्था पिछले कुछ वर्षों में बड़े बदलाव के दौर से गुजरी है। अब असली चुनौती इस तकनीकी बदलाव को लंबे समय तक बनाए रखते हुए उपभोक्ताओं को लगातार बेहतर और भरोसेमंद बिजली देना है।

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