By Malay Ojha | Published: 09 August 2026 at 11:04 AM
पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के बाद पहली बार नीट विवाद और छात्रों के प्रदर्शन पर खुलकर बात की है। भुवनेश्वर में छात्रों और शिक्षकों के बीच पहुंचे प्रधान ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने जेन जेड यानी नई युवा पीढ़ी को गुमराह करने की कोशिश की थी। उन्होंने साफ किया कि युवाओं से उनकी कोई व्यक्तिगत नाराजगी नहीं थी, बल्कि वह उन्हें देश की सबसे बड़ी ताकत मानते हैं।
धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को भुवनेश्वर की जीएम यूनिवर्सिटी में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए नीट विवाद के दौरान हुए प्रदर्शनों पर अपनी बात रखी। उनका यह बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि शिक्षा मंत्री पद छोड़ने के बाद उन्होंने पहली बार सार्वजनिक रूप से उस पूरे घटनाक्रम पर विस्तार से प्रतिक्रिया दी है।
‘जेन जेड हमारे देश के बच्चे हैं’
प्रधान ने कहा कि जेन जेड को लेकर उनके मन में किसी तरह की व्यक्तिगत समस्या नहीं थी। उनके मुताबिक, यह देश के बच्चे हैं और उनकी अपनी आकांक्षाएं हैं। उन्होंने कहा कि भारत में हर साल करीब दो करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं। पिछले दस वर्षों में करीब 20 करोड़ बच्चे इस देश में जन्मे हैं। यही युवा आने वाले समय में भारत को दुनिया में आगे ले जाने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।
प्रदर्शन के दौरान गुमराह करने का आरोप
पूर्व शिक्षा मंत्री ने कहा कि नीट को लेकर जब छात्रों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा था, उस दौरान कुछ लोगों ने जेन जेड को गुमराह करने की कोशिश की। प्रधान के इस बयान को उनके इस्तीफे और उसके बाद हुए छात्र आंदोलनों के संदर्भ में देखा जा रहा है। उन्होंने हालांकि अपने बयान में किसी खास व्यक्ति या संगठन का नाम नहीं लिया।
‘मंत्री पद मेरे लिए महत्वपूर्ण नहीं था’
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि मंत्री पद उनके लिए कोई व्यक्तिगत महत्व रखने वाली चीज नहीं थी। प्रधान के मुताबिक, उन्होंने खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा देने की पेशकश की थी। उनके बयान से साफ है कि वह अपने पद को जिम्मेदारी के तौर पर देखते थे, न कि व्यक्तिगत प्रतिष्ठा के रूप में।
युवाओं की आकांक्षाओं पर दिया जोर
प्रधान ने छात्रों के बीच अपनी बात रखते हुए कहा कि नई पीढ़ी की उम्मीदों और सपनों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनका कहना था कि देश की बड़ी युवा आबादी आने वाले वर्षों में भारत की दिशा तय करेगी। उन्होंने जेन जेड को ऐसी ताकत बताया, जिसे देश के भविष्य के लिए समझना और उसके साथ संवाद करना जरूरी है।
नीट विवाद के बीच बढ़ा था छात्रों का दबाव
नीट को लेकर विवाद के दौरान देश के कई हिस्सों में छात्रों ने प्रदर्शन किया था। दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी छात्र लंबे समय तक आंदोलन करते रहे। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने के साथ शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी शामिल थी। इस पूरे घटनाक्रम के बीच धर्मेंद्र प्रधान पर विपक्ष और छात्र संगठनों की ओर से लगातार दबाव बनाया गया।
पद छोड़ने के बाद बदला राजनीतिक संदर्भ
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय हुआ, जब नीट विवाद को लेकर सरकार पर लगातार सवाल उठ रहे थे। अब पद से हटने के करीब दो सप्ताह बाद उनका सामने आकर इस मुद्दे पर बोलना राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने अपने बयान में युवाओं और उनके भविष्य को केंद्र में रखा और यह संदेश देने की कोशिश की कि उनके लिए छात्र केवल विरोध करने वाली भीड़ नहीं, बल्कि देश के भविष्य का हिस्सा हैं।
नवीन पटनायक पर भी साधा निशाना
इसी दौरान रायराखोल में आयोजित एक दूसरे कार्यक्रम में धर्मेंद्र प्रधान ने ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल के अध्यक्ष नवीन पटनायक पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ प्रदर्शन किए जाने या वापस जाने के नारे लगाए जाने से वह परेशान नहीं हैं। हवाई अड्डे के पास बीजू जनता दल के युवा और छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं ने उनके खिलाफ प्रदर्शन किया था।
‘मैं किसान का बेटा हूं, वापस आऊंगा’
प्रदर्शन को लेकर प्रधान ने कहा कि वह किसान के बेटे हैं और अगर उन्हें वापस जाने के लिए कहा जाएगा, तब भी वह लौटकर आएंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर उन्होंने ओडिशा के लोगों को शर्मिंदा करने वाला कौन सा काम किया है। उनके इस बयान को ओडिशा की राजनीति में अपने खिलाफ चल रहे विरोध का सीधा जवाब माना जा रहा है।
नवीन पटनायक के आरोपों पर भी पलटवार
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि नवीन पटनायक उन्हें ओडिशा के लोगों के लिए शर्मिंदगी और बुरा व्यक्ति तक बताते रहे हैं। प्रधान ने आरोप लगाया कि बीजू जनता दल अध्यक्ष युवाओं को उनके खिलाफ होने वाले प्रदर्शनों में शामिल कर रहे हैं। हालांकि, नवीन पटनायक की ओर से इन आरोपों पर इस बयान के संदर्भ में तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इस्तीफे के बाद सामने आई प्रधान की नई तस्वीर
धर्मेंद्र प्रधान के ताजा बयान को सिर्फ नीट विवाद से जोड़कर नहीं देखा जा रहा है। एक तरफ उन्होंने छात्र आंदोलन के दौरान जेन जेड को गुमराह किए जाने की बात कही, तो दूसरी तरफ उन्होंने इसी युवा पीढ़ी को देश के भविष्य की सबसे अहम ताकत बताया। साथ ही उन्होंने अपने इस्तीफे को व्यक्तिगत नुकसान के बजाय जिम्मेदारी से जोड़कर पेश किया। ऐसे में उनके बयान से यह संकेत मिलता है कि वह नीट विवाद के दौरान बने राजनीतिक और छात्र विरोध के नैरेटिव पर अब खुलकर अपनी स्थिति सामने रखना चाहते हैं।
युवाओं को लेकर संदेश पर टिकी नजर
नीट विवाद के बाद देश में परीक्षा व्यवस्था, छात्रों की नाराजगी और युवाओं की राजनीतिक भागीदारी को लेकर बहस तेज हुई है। ऐसे समय में धर्मेंद्र प्रधान का जेन जेड को लेकर दिया गया बयान आने वाले दिनों में राजनीतिक चर्चा का विषय बन सकता है। खासकर इसलिए, क्योंकि उन्होंने एक ही बयान में छात्रों के प्रदर्शन के पीछे गुमराह किए जाने की बात कही और उसी युवा पीढ़ी को भारत के भविष्य का सबसे बड़ा आधार भी बताया।
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